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Gyanvapi Masjid:खोजे गए 'शिवलिंग' को लेकर स्कंद पुराण की क्यों हो रही है चर्चा ? जानिए

वाराणसी, 19 मई: ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में अदालत का अगला रुख क्या रहता है, यह कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ही पता चलेगा। लेकिन, मस्जिद में वजूखाने से मिले 'शिवलिंग' को लेकर शास्त्र-पुराणों की चर्चा गंभीरता के साथ शुरू हो चुकी है। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने बताया है कि यह खोज स्कंद पुराण में जो सदियों पहले वर्णन किया गया था, उसकी पूरी तरह से पुष्टि है। आरएसएस ने भी ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा है कि सच को कितना भी छिपा लिया जाए, उसे कब तक छिपाए रखा जा सकता है। इन दलीलों के बीच काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास में भी मस्जिद में खोजे गए शिवलिंग की पूजा-अर्चना को लेकर मंथन शुरू हो चुका है। आइए जानते हैं कि इस 'शिवलिंग' के बारे में स्कंद पुराण में कहां जिक्र किया गया है ?

काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने की 'शिवलिंग' सौंपने की है मांग

काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने की 'शिवलिंग' सौंपने की है मांग

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट और वाराणसी सिविल कोर्ट में चल रही सुनवाई में अभी काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट पार्टी नहीं है। लेकिन, ऐसा नहीं है कि ट्रस्ट मस्जिद परिसर में मिले 'शिवलिंग' को लेकर निश्चिंत बैठा है। सुप्रीम कोर्ट इसपर शुक्रवार को आगे की सुनवाई करने वाला है और तबतक के लिए वाराणसी कोर्ट से भी सुनवाई रोकने को कहा है। हो सकता है कि इन न्यायालयों का रुख देखने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास भी कोई कानूनी कदम उठाने विचार कर सकता है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष नागेंद्र पांडे बुधवार को ही कह चुके हैं, 'यदि बाबा विश्वेश्वर की प्रतिमा मिली है, तब यह वजूखाना कैसे हो सकता है.....हम मांग करते हैं कि जबतक फैसला आता है, शिवलिंग को काशी विश्वनाथ न्यास को सौंप दिया जाए।'

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    'शिवलिंग' की पूजा की मांग को लेकर कोर्ट जाने पर विचार

    'शिवलिंग' की पूजा की मांग को लेकर कोर्ट जाने पर विचार

    ट्रस्ट के सदस्यों के बीच इस मसले पर मंथन भी शुरू है। ईटी के मुताबिक उससे बातचीत में ट्रस्ट के बाकी सदस्यों को भी विश्वास है कि वह शिवलिंग है और इसलिए वह वहां तक पहुंचने का अधिकार चाहते हैं, ताकि हर दिन होने वाले धार्मिक अनुष्ठान, जैसे कि भोग, पूजा, श्रृंगार आदि किया जा सके, जो कि एक शिवलिंग के लिए धार्मिक रीति है। लेकिन, उन्हें यह पता है कि इसपर अभी कोर्ट ही कोई फैसला ले सकता है। इसलिए, अभी तो ये सुप्रीम कोर्ट और वाराणसी सिविल कोर्ट के आदेशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन इस संबंध में जल्द ही न्यासियों की एक बैठक भी बुलाई जा सकती है, जिसमें यह चर्चा होगी कि 'शिवलिंग' की पूजा की मांग को लेकर कोर्ट में जाया जाए या नहीं।

    'भोग, आरती और पूजा के नहीं छोड़ा जा सकता'

    'भोग, आरती और पूजा के नहीं छोड़ा जा सकता'

    तथ्य ये है कि मंगलवार को वाराणसी के डीएम को दिए अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने भी ज्ञानवापी मस्जिद में मिले 'शिवलिंग' की सुरक्षा का आदेश दिया है, जिससे काशी विश्वनाथ मंदिर ट्र्स्ट के लोगों का विश्वास और भी मजबूत हुआ है। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के ट्रस्टी ब्रज भूषण ओझा ने मस्जिद से मिले 'शिवलिंग' की पूजा की मांग को लेकर कोर्ट जाने के बारे में कहा है, 'जिस चीज की खोज की गई है, पुराणों में उसका पहले से ही उल्लेख है और अब जब इसे खोज लिया गया है तो प्रतिमा को बिना भोग, आरती और पूजा के नहीं छोड़ा जाना चाहिए। सच तो ये है कि भगवान शिव की देखभाल के प्रबंध की जिम्मेदारी ट्रस्ट की है। '

    'शिवलिंग' को लेकर स्कंद पुराण की क्यों हो रही है चर्चा ?

    'शिवलिंग' को लेकर स्कंद पुराण की क्यों हो रही है चर्चा ?

    ओझा ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर से मिले 'शिवलिंग' के शास्त्र-पुराणों में जिक्र होने को लेकर एक बहुत बड़ी जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि स्कंद पुराण में जिस बात का उल्लेख है, उसकी इस खोज से पुष्टि हो गई है। उन्होंने कहा है कि स्कंद पुराण के काशी खंड के 97वें अध्याय के 220 श्लोक में इसका वर्णन है और वजूखाने में हुई खोज ने उसपर मुहर लगा दी है। मतलब, इस मामले में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास अपने पास पौराणिक और धार्मिक साक्ष्य होने का हवाला दे रहा है। उन्होंने सलाह दी है कि वजूखाने वाली जगह पर अलग से एक दरवाजा खोला जा सकता है, जिससे कि धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो सके। उनके मुताबिक यह दरवाजा मस्जिद की एंट्री से अलग होगा। एक और ट्रस्टी चंद्रमौली उपाध्याय ने भी कहा है कि ट्रस्ट अदालत में जाने का फैसला करने से पहले दोनों कोर्ट के आदेशों की प्रतीक्षा करेगा। हालांकि, ओझा ने साफ कर दिया है, 'लेकिन, हम लोग कुछ भी गैर-कानूनी या कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना नहीं करेंगे। हम जल्द ही ट्रस्ट की एक बैठक बुलाएंगे ताकि आगे की स्थिति पर चर्चा की जा सके।'

    'ऐतिहासिक तथ्यों को सामने आने देना चाहिए'

    'ऐतिहासिक तथ्यों को सामने आने देना चाहिए'

    स्कंद पुराण वाली लाइन पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक ने भी कहा है कि तथ्यों को सामने आने देना चाहिए और सच्चाई को बहुत दिनों तक छिपा के नहीं रखा जा सकता है। आरएसएस के पब्लिसिटी इंचार्ज सुनील आंबेकर ने नई दिल्ली में पत्रकारों के एक सम्मान समारोह में कहा, 'कुछ तथ्य हैं जो खुलकर सामने आ रहे हैं। मेरा विश्वास है कि तथ्यों को सामने आने देना चाहिए। किसी भी तरह से सच सामने आने का रास्ता खोज ही लेता है। आप इसे कितने दिनों तक छिपा सकते हैं? मेरा मानना है कि ऐतिहासिक तथ्यों को समाज के सामने सही दृष्टिकोण के साथ रखा जाना चाहिए।' इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान भी मौजूद थे और उन्होंने कहा कि जब उन्हें इस बात का पता चला तो वे 'भावुक' हो गए। उनके मुताबिक, 'जब यह सब सामने आया मैं वाराणसी में था। मैं भावुक हो गया। मैं तब और भी अभिभूत हो गया, जब एक पत्रकार ने मुझसे कहा कि नंदी शिव के लिए सदियों से प्रतीक्षा कर रहे थे। मेरी आंखें भर आईं।'

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