Vadodara bridge collapse: गुजरात के वडोदरा में बड़ा पुल हादसा, चलती गाड़ियां पुल से नीचे गिरीं, 10 शव बरामद
Gujarat Vadodara bridge collapse: देश में विकास के नाम पर शिलान्यास तो ज़ोर-शोर से होता है, लेकिन जब बात निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी की आती है, तो सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है। गुजरात के वडोदरा में महिसागर नदी पर बना गंभीरा पुल इसका ताज़ा और शर्मनाक उदाहरण है। जिस पुल पर गाड़ियाँ चल रही थीं, लोग अपने रोज़मर्रा के काम से गुजर रहे थे, वो अचानक बीच में ही टूट गया। कई वाहन नदी में जा गिरे और कुछ खतरनाक तरीके से बीच पुल पर लटक गए मानो विकास भी अब असमंजस में है कि टिके या गिर जाए।
यह वही पुल है जो वडोदरा और आणंद जैसे अहम शहरों को जोड़ता था। लेकिन जैसा देश के कई हिस्सों में होता आया है, यहां भी निर्माण की मजबूती कागज़ पर दिखाई गई और असलियत में कुछ और थी। ठेकेदार की नीयत, अधिकारियों की खामोशी और सिस्टम की नज़रअंदाजी सबने मिलकर इस पुल को दुर्घटना स्थल में बदलने में भूमिका निभाई।

वीडियो आया सामने
गुजरात के वडोदरा में महिसागर नदी पर बने गंभीरा पुल का जो वीडियो सामने आया है, वो किसी हादसे से ज्यादा एक चेतावनी जैसा है एक ट्रक बीच पुल पर फंसा हुआ है, उसके आगे सड़क हवा में गायब हो चुकी है और पीछे पुल में गहरी दरारें उभर आई हैं, मानो सरकार की नीतियों और निगरानी व्यवस्था पर मौन कटाक्ष कर रही हों। जिस वक़्त ये हादसा हुआ, उस समय पुल पर कई वाहन थे कुछ के नदी में गिरने की बात सामने आ रही है। 10 लोगों की मौत की भी खबर है और कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।
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फाइलों पर हस्ताक्षर करने वालों की कब होगी तय जवाबदेही?
बारिश तो हर साल होती है, लेकिन पुल हर साल क्यों टूटते हैं? क्या इनकी उम्र अब मानसून जितनी ही सीमित रह गई है? हादसा हो गया, प्रशासन मौके पर पहुंच गया, जांच के आदेश जारी हो गए और इसी स्क्रिप्ट को हर बार की तरह दोहराया जा रहा है। असल में, जब तक फाइलों पर हस्ताक्षर करने वालों की जवाबदेही तय नहीं होगी, और जब तक निर्माण कार्य कमाई का ज़रिया बना रहेगा, तब तक पुल टूटते रहेंगे और लोग जान गंवाते रहेंगे। यही है आज का 'विकास मॉडल' दिखावे में दमदार, ज़मीन पर लाचार।
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