गुजरात हाईकोर्ट को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की मिली धमकी, जांच में जुटी पुलिस, कोर्ट परिसर सील
Gujarat High Court: गुजरात हाईकोर्ट को सोमवार को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली है। हाईकोर्ट को मेल के जरिए बम की धमकी मिलने से दहशत फैल गई और पूरे न्यायालय परिसर में सुरक्षा घेराबंदी कर दी गई है। गुजरात हाईकोर्ट के आधिकारिक ईमेल पते पर गुमनाम व्यक्ति द्वारा भेजे गए इस मैसेज के बाद पुलिस, बम निरोधक दस्तों और स्निफर डॉग ने तलाशी शुरू कर दी है।
बम से उड़ाने की धमकी भरा मेल मिलते ही गुजरात हाईकोर्ट की गतिविधियां और कामकाज अस्थायी रूप से बाधित हो गया है, सभी कोर्ट के सभी गेट सील कर दिए गए हैं। जोन 1 के प्रभारी पुलिस उपायुक्त सफीन हसन ने ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिलने की पुष्टि की है।

मेल भेजने वाले की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस उपायुक्त ने सफीन हसन ने बताया "उच्च न्यायालय के ईमेल पर बम की धमकी मिली है, जिसकी जांच की जा रही है।" उन्होंने आगे बताया, "उच्च न्यायालय के गेट फिलहाल बंद हैं, और पुलिस गहन जांच कर रही है। उन्होंने बताया भेजने वाले की पहचान अभी तक अज्ञात है, और ईमेल के स्रोत का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।
कोर्ट के चप्पे-चप्पे की जा रही तलाश
पुलिस ने बताया कि बम निरोधक और निस्तारण दल (BDDT), अग्निशमन और बचाव इकाइयों के साथ, मिनटों के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गया। गेट नंबर 5, जो आमतौर पर न्यायालय कर्मचारियों द्वारा उपयोग किया जाता है, को सबसे पहले सील कर दिया गया। पुलिस कर्मियों ने व्यवस्थित रूप से सभी आने वाले वाहनों की जांच शुरू कर दी और प्रशिक्षित स्निफर कुत्तों के जरिए कोर्ट के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली गई।
बम की धमकी से फैली दहशत
गुजरात हाईकोर्ट में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बम से उड़ाने की धमकी मिलते ही कोर्ट के सभी एंट्री गेट बंद कर दिए गए और कोर्ट की सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। कोर्ट के कर्मचारी ने बताया "हमने पुलिस अधिकारियों को हर जगह भागते हुए देखा, और फिर डॉग स्क्वाड ने कारों की जांच शुरू कर दी थी। ये सब देखकर लोग दहशत में आ गए थे।
पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी धमकियां
यह घटना गुजरात में हाल ही में मिली कई बम धमकियों के बाद हुई है, जिनमें से कई झूठी निकलीं। ऐसे ही आज की धमकी भी झूठी होने की संभावना के बावजूद, अधिकारी कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। जांच में शामिल पुलिस अधिकारी ने कहा "हम मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और उच्च न्यायालय में मौजूद सभी लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।"












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