जीत के बावजूद बीजेपी को सौराष्ट्र और कच्छ में लगा बड़ा झटका
जरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने सौराष्ट्र में पार्टी के प्रदर्शन पर कहा है कि इस इलाकों में बीजेपी को किसानों की समस्याएं दूर करने की जरूरत है।
नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी को भले ही जीत मिल गई हो लेकिन गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। इन इलाकों में बीजेपी का प्रदर्शन 2012 के मुकाबले खराब दिख रहा है। सौराष्ट्र-कच्छ के इलाके में बीजेपी को 25 सीटें मिलती दिख रही हैं, वहीं कांग्रेस यहां 29 सीटें जीत सकती है। पिछले चुनाव में इस इलाके से बीजेपी को 35, कांग्रेस को 16 और अन्य दलों को मिलाकर 3 सीटें हासिल हुईं थीं। बाद में जीते हुए 2 और उम्मीदवार बीजेपी में शामिल हो गए थे। इन इलाकों में बीजेपी के खराब प्रदर्शन पर पूर्व सीएम आनंदी बेन पटेल में चिंता जाहिर की है।

आनंदीबेन पटेल ने चिंता जाहिर की
गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने सौराष्ट्र में पार्टी के प्रदर्शन पर कहा है कि इस इलाकों में बीजेपी को किसानों की समस्याएं दूर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस इलाके के बारे में पार्टी को ठोस रणनीति बनानी होगी और नतीजों पर मंथन करना होगा। किसान बाहुल्य यह इलाका हर साल सूखे की मार झेलता है। किसानों को मनाने के लिए बीजेपी ने सौराष्ट्र के सूखा प्रभावित जिलों की नहरों में सरदार सरोवर बांध से पानी छोड़ा गया और किसानों को मनाने की पूरी कोशिश भी की थी।

मोदी के पीएम बनने के बाद बीजेपी की पकड़ कमजोर हुई
2014 में नरेंद्र मोदी के गुजरात के सीएम से देश के पीएम बन जाने के बाद से पाटीदारों पर बीजेपी की पकड़ कमजोर हुई है। ऐसा माना जा रहा है कि हार्दिक पटेल के नेतृत्व में शुरू हुए पटेल आंदोलन ने बीजेपी की पकड़ को कमजोर कर दिया है। इसी का नतीजा रहा कि 2015 में हुए जिला पंचायत चुनाव में सौराष्ट्र की 11 में से 8 पर कांग्रेस विजयी रही, इसका नतीजा ये हुआ कि आंदोलन को ठीक तरह से संभाल न पाने की वजह से आनंदीबेन को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी और विजय रूपाणी को सीएम बनाया गया।

सौराष्ट्र ने सत्ता का स्वाद चखाया
बीजेपी सौराष्ट्र पर मजबूती के जरिए ही पिछले बीस साल से सत्ता पर काबिज है। सौराष्ट्र में बीजेपी की साख बनाने और उसे मजबूत करने में केशुभाई पटेल की अहम भूमिका रही है। इसी का नतीजा था कि बीजेपी ने कांग्रेस सरकार की जीत का सिलसिला खत्म कर राज्य में पहली बार 1995 में अपनी सरकार बनाई। 1995 में सौराष्ट्र की 54 में से 44 सीटें बीजेपी ने जीती और केशुभाई पटेल पहली बार मुख्यमंत्री बने थे।
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