Gujarat Election 2022: नये-नये बयानों से माहौल बना रहे केजरीवाल

Gujarat Assembly elections 2022: अरविंद केजरीवाल आदर्शवाद और शुचिता की स्थापना के लिए राजनीति में आये थे। लेकिन अब सत्ता की जरूरत ने उन्हें राजनीति की हर तिकड़म में माहिर बना दिया है। चुनाव के समय वे ऐसे-ऐसे आरोप लगाते हैं कि सुनने वाले हैरत में पड़ जाते हैं। क्या इस देश में कोई राजनीतिक दल किसी अन्य दल को चुनाव नहीं लड़ने के लिए प्रलोभन दे सकता है? आज तक तो यही देखा जाता रहा है कि कोई मजबूत दल वोट काटने के लिए किसी कमजोर दल या उम्मीदवार को मैदान में उतार देता है। लेकिन केजरीवाल ने एक नया शोशा छोड़ा है। उनका आरोप है कि भाजपा ने उन्हें गुजरात में चुनाव नहीं लड़ने के एवज में आप के उस मंत्री को छोड़ देने का प्रलोभन दिया था जो जेल में बंद है। तो क्या केजरीवाल के गुजरात में चुनाव लड़ने से भाजपा सचमुच इतना डर गयी कि उसने जेल में बंद सत्येन्द्र जैन को छोड़ने की पेशकश कर दी ? ये कितनी हास्यास्पद बात है ? केजरीवाल सरकार के मंत्री सत्येन्द्र जैन मनी लॉन्ड्रिंग केस में सलाखों के अंदर हैं। जब कोर्ट उन्हें बेल देने से इंकार कर चुकी है तो कोई सरकार कैसे आनन-फानन में रिहाई कर सकती है। और फिर केजरीवाल अब ये बात क्यों कह रहे हैं ? उन्होंने उम्मीदवारों की पहली सूची तो अगस्त में ही जारी कर दी थी। तब ये बात क्यों नहीं बतायी ?

Gujarat Election 2022

भला भाजपा की कांग्रेस से क्या सेटिंग हो सकती है?

अरविंद केजरीवाल भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी रहे हैं। आइआइटी से पासआउट हैं। बिना किसी अनुभव के राजनीति में आये। लेकिन उनका रूपांतरण जबर्दस्त रहा। अब वे मंझे हुए नेता बन चुके हैं। राजनीति के हर दांव-पेंच सीख गये हैं। चुनावी माहौल कैसे बनाना है, वे बखूबी जानते हैं। इसलिए वे गुजरात में वे नये-नये आरोपों के साथ चुनाव मैदान में हैं। गुजरात के चुनाव प्रचार में आरोप-प्रत्यारोप चरम पर है। कई आरोप तो बिल्कुल अविश्वसनीय लगते हैं। जैसे केजरीवाल ने भाजपा से सवाल किया है, बताइए आपकी कांग्रेस क्या सेटिंग है ? जो पार्टी पिछले 20 साल से लगातार सत्ता में है वह भला कांग्रेस से क्यों सेटिंग करेगी ? कांग्रेस तो खुद सत्ता की तलबगार है, वह क्यों भाजपा से गुप्त समझौतै करेगी ? अरविंद केजरीवाल इन बातों से जनता का ध्यान भटकाना चाहते हैं ताकि उन्हें भी इस राज्य में कुछ जगह मिल जाए।

जहाज में रुपया भर कर लाए हैं केजरीवाल -कांग्रेस

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने गुजरात में आप को भाजपा की बी टीम करार दिया है। उनका कहना है, अरविंद केजरावाल गुजरात चुनाव में जो मुद्दे उठा रहे हैं उससे पता चल रहा है कि भाजपा और उनमें कोई अंतर नहीं है। भाजपा ने कांग्रेस को नुकासान पहुंचाने के लिए केजरीवाल को मैदान में उतारा है। जिस पार्टी का राज्य में ठीक से संगठन भी खड़ा न हो उसके एक सौ से अधिक उम्मीदवार खड़ा होने का क्या मतलब है ? जाहिर है कांग्रेस का वोट काटने के लिए ही केजरीवाल चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने आप पर कई और गंभीर आरोप लगाये हैं। उसका कहना है कि आप के प्रत्याशियों की सूची भाजपा के ऑफिस से फाइनल हो रही है। कांग्रेस ने यह कह कर चौंका दिया है कि केजरीवाल चार्टेड प्लेन से रुपये ला कर गुजरात चुनाव को प्रभावित करना चाहते हैं। आप में पद को लेकर लोभ और लड़ाई है। राजकोट के पूर्व विधायक इंद्रनील राजगुरू आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव थे। उन्हें उम्मीद थी कि केजरीवाल उन्हें गुजरात चुनाव में सीएम चेहरा बनाएंगे। लेकिन जब इशुदान लढ़वी को आप ने सीएम उम्मीदवार घोषित कर दिया तो राजगुरु ने पार्टी छोड़ दी। वे कांग्रेस के नेता थे और अपने पुराने दल में वापस आ गये। राजगुरू ने ही अरविंद केजरीवाल पर हवाई जहाज के से रुपये लाने का आरोप लगाया है।

गुजरात में किसी तीसरे दल के लिए कोई जगह नहीं -भाजपा

आरोप लगाने में अरविंद केजरीवाल कांग्रेस से भी दो कदम आगे हैं। कांग्रेस ने भी गुजरात में 27 साल राज किया है। पिछली बार 77 सीट जीत कर वह सत्ता के बिल्कुल करीब पहुंच गयी थी। फिलहाल वह 66 विधायकों के साथ एक मजबूत विपक्षी दल है। अब ऐसे दल के लिए केजरीवाल कह रहे हैं कि उसे 2022 के चुनाव में पांच सीट भी नहीं मिलेगी। सामान्य तौर पर ये मुमकिन नहीं दिखता। केजरीवाल कांग्रेस के मनोबल को गिराने के लिए केवल माइंड गेम खेल रहे हैं। इस बार गुजरात चुनाव में भाजपा को कांग्रेस के अलावा आप से भी चुनौती मिल रही है। हालांकि भाजपा के नेता आप को 'सीरियस प्लेयर’ नहीं मान रहे। शनिवार को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, मेरा मानना है कि गुजरात में कभी भी किसी तीसरे दल के लिए कोई स्थान नहीं रहा है। इस बार भी भाजपा और कांग्रेस के बीच ही लड़ाई होगी। गुजरात में चिमनभाई पटेल, शंकर सिंह बाघेला और केशुभाई पटेल जैसै दिग्गज नेताओं ने नया दल बना कर चुनाव लड़ा था। उनका क्या नतीजा हुआ, ये सब लोग जानते हैं। 2017 में भी आम आदिमी पार्टी ने गुजरात में 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था और सभी सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गयी थी। हर दल के अपने-अपने तर्क हैं। अब जनता जनार्दन ही तय करेगी कि किसके दावे में कितना दम है।

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