नजरिया: संसद सत्र में चुभते सवाल होते, असर गुजरात चुनाव पर होता
भारतीय जनता पार्टी और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की यह बात सही है कि पहले भी संसद के सत्रों के समय का पुनर्निधारण हुआ है पर आमतौर पर ऐसे पुनर्निर्धारण में अन्य राजनीतिक दलों, खासतौर पर मुख्य विपक्षी दल से भी अनौपचारिक मशविरा होता रहा है.
इस बार ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ. यह एक बड़ा फर्क है. इससे सरकार के कामकाज की शैली का अंदाज लगता है. विपक्षी दल अगर यह सवाल उठा रहे हैं कि गुजरात चुनाव के मद्देनजर सरकार जानबूझकर संसद के शीतकालीन सत्र को टाल रही है तो इसे निराधार नहीं कहा जायेगा. गुजरात चुनाव के अलावा संसद सत्र को टालने का कोई और कारण नहीं.
जीएसटी की फाँस गड़ी, फिर भी 'मोदी जी अच्छे हैं'!
मोदी-शाह की जोड़ी के सामने कहां है विपक्ष?
शीतकालीन सत्र कब?
अपवाद को छोड़, आम परिपाटी को देखें तो नवंबर के तीसरे सप्ताह तक संसद के शीतकालीन सत्र का न केवल एलान अपितु सत्रारंभ भी हो जाता रहा है. लेकिन इस बार अभी तक शीतकालीन सत्र की तारीख का भी एलान नहीं हुआ है. यह निश्चय ही असामान्य परिघटना और प्रक्रिया है.
यह इस बात का संकेत भी है कि हमारे तंत्र में संसद का जनता से 'कनेक्ट' कैसे लगातार कम होता गया है. संसद जैसी प्रतिनिधि संस्था के स्थान पर व्यक्ति और दल महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं.
सत्ताधारी दल के सूत्र बता रहे हैं कि संसद का शीतकालीन सत्र इस बार दिसंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह से शुरू होगा.
पार्टी के शीर्ष रणनीतिकार चाहते हैं कि गुजरात के दूसरे चरण का मतदान पूरा होने के साथ या उसके बाद ही संसद सत्र शुरू होना चाहिए. इसके लिए उनके अपने तर्क हैं.
उनका कहना है कि सिर्फ भाजपा ही नहीं, सभी प्रमुख दलों के लोग इस वक्त गुजरात में सक्रिय हैं. संसद सत्र टालने की ज़रूरत सबकी है और ऐसा पहले भी होता रहा है. सन 2011 में भी ऐसा हो चुका है. सन 2011 को रिपीट करना ही क्यों उचित समझा गया?
कांग्रेस के 'राहुल युग' की शुरूआत होने वाली है!
सवालों से बच रही है सरकार?
सवाल उठता है, गुजरात चुनाव से संसद के शीतकालीन सत्र का क्या किसी तरह का 'कन्फ्लिक्ट' है ?
अनेक उदाहरण हैं, जब किसी राज्य में चुनाव और संसद के सत्र साथ-साथ हुए हैं. संभवतः इस बार सरकार नहीं चाहती थी कि संसद के सत्र में विपक्ष को ऐसे कुछ बड़े और नाज़ुक मसलों को उठाने का मौका मिले, जो गुजरात के चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने वाले साबित हों.
भाजपा को लगता है, भाषण और लटके-झटकों में प्रधानमंत्री मोदी का फिलहाल विपक्ष के पास कोई जवाब नहीं है. पार्टी के पास चुनाव के लिए अपार संसाधन और कारगर रणनीति भी है, लेकिन संसद सत्र में भाषण-शैली और लोकप्रियतावादी लटकों-झटकों से ज्यादा तथ्य और तर्क चलते हैं.
मसलन, ऱाफेल विमानों की महंगी खरीद सौदे पर अगर सवाल उठेंगे तो सरकार को ठोस जवाब देना होगा. सिर्फ इस भाषण से बात नहीं बनेगी कि देश की रक्षा के लिए युद्धक विमानों की ज़रूरत थी, इसलिए सरकार को महंगा सौदा करना पड़ा. सरकार को यह बताना होगा कि मोदी ने इतना मंहगा सौदा क्यों और किस आधार पर किया, जब पिछली यूपीए सरकार महज 54,000 करोड़ में कुल 126 राफ़ेल विमान खरीदने का सौदा कर रही थी और 126 में 108 विमान भारत में ही बनने थे.
'भारतीय वायुसेना के लिए नाकाफ़ी है 36 रफ़ाल विमान'
मुद्दों से लैस है विपक्ष
कांग्रेस ने बार-बार आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने 36 राफ़ेल विमानों को 56,000 करोड़ में खरीदने का सौदा कर देश को नुकसान पहुंचाया है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी खुलेआम कह चुके हैं, 'इस सौदे में गड़बड़झाला है. सरकार साफ-साफ बताए कि उसने इतना महंगा सौदा क्यों किया?'
यह बात साफ है कि संसद के शीतकालीन सत्र में यह मुद्दा प्रमुखता से उठता और कांग्रेस को इस मुद्दे पर वामपंथियों, तृणमूल कांग्रेस और कुछ अन्य क्षेत्रीय दलों का भी समर्थन मिलता. इससे भाजपा और मोदी सरकार की भ्रष्टाचार के मामले में पूरी तरह 'शुद्ध और पवित्र' होने की दावेदारी पर गंभीर प्रश्न उठते. आज की तारीख में किसी के पास भी इस सौदे में कथित भ्रष्टाचार के सबूत नहीं हैं. पर सवाल तो बराबर उठ रहे हैं.
ऐसे में सरकार को अपने आपको पाक-साफ बताने में सारे तथ्य सामने रखने पड़ते. गुजरात के चुनाव में भाजपा और मोदी सरकार के लिए यह मसला बड़ा सिरदर्द साबित होता!
कुछ इसी तरह यह सवाल भी बार-बार उठता कि मोदी सरकार अगर भ्रष्टाचार-मुक्त सरकार है तो पनामा पेपर्स और पैराडाइज़ सहित बैंक-एनपीए के मामले में आज तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
पनामा और पैराडाइज़ में कई बड़े कॉरपोरेट घरानों के अलावा भाजपा के कुछ नेताओं, उनके परिजनों और खास समर्थकों के भी नाम आए हैं.
इस संदर्भ में यह भी सवाल उठता कि जिस लोकपाल के गठन के लिए कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार के ख़िलाफ़ इतना आंदोलन हुआ और पर्दे के पीछे से भाजपा उसे हवा दे रही थी, वह लोकपाल मोदी सरकार के इन साढ़े तीन सालों में आज तक क्यों नहीं बना?
पैराडाइज पेपर्स: बीजेपी मंत्री और सांसद का नाम
पैराडाइज़ पेपर्स: जो बातें अभी तक आपको पता हैं
संसद में उठते मुद्दे, गांधीनगर में सुनाई देती गूंज
विपक्ष नोटबंदी-जीएसटी से बेहाल आम लोगों, बाज़ार-व्यापार और रोज़गार के मसले को पूरी शिद्दत से उठाने की कोशिश में था. अब भी उठेंगे पर शायद गुजरात के चुनाव के बाद!
गुजरात में नोटबंदी और जीएसटी के चलते सत्ताधारी दल के सामने पहले के मुकाबले कुछ मुश्किलें ज़्यादा हैं. सूरत सहित राज्य के कई स्थानों पर व्यापारी वर्ग जीएसटी के खिलाफ सड़कों पर आया था. संसद में इन सवालों के उठने का ज़मीनी स्तर पर कुछ न कुछ असर पड़ना लाजिमी था.
मौजूदा सत्ता-संरचना के दो शिखर-पुरुषों से सम्बद्ध 'दो युवराजों' पर उठे सवाल भी संसद सत्र में उठाए जाने की विपक्ष की तैयारी रही है. एक वक्त भाजपा ने रॉबर्ट वाड्रा को लेकर तत्कालीन यूपीए सरकार को जमकर घेरा था!
इस बार कांग्रेस भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पुत्र जय शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के पुत्र शौर्य डोभाल के मामलों को उठाने से भला क्यों चूकती!
चूंकि यह दोनों मामले दो बड़े ओहदेदारों के परिजनों के हैं और इनमें एक का सम्बन्ध सीधे गुजरात से है, इसलिए संसद में इसके उठने की अनुगूंज गांधीनगर में भी सुनाई पड़ती.
'मोदी सरकार राजनीतिक कीमत चुकाएगी'
मोदी ने राहुल गांधी पर 'शहज़ादा' कहकर तंज़ कसा था, राहुल ने किसे कहा 'शाह-ज़ादा'?
'कांग्रेस ने बेशर्मी की थी, बीजेपी उस हद को भी पार कर गई'
मौत पर सवाल
सबसे ताज़ा-तरीन मामला है-सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में सीबीआई अदालत में सुनवाई कर रहे जज बृजगोपाल लोया की रहस्यमय ढंग से मौत का मामला.
दिसम्बर, 2014 में जज साहब की नागपुर के एक साधारण से अस्पताल में मौत हो गई थी. उस वक्त उनके परिवार का कोई भी सदस्य वहां नहीं था. इस वाकये की गुत्थियों पर पहली दफ़ा जज के परिजनों ने कुछ नए तथ्य सामने लाए थे, जिससे पता चलता है कि उनकी मौत स्वाभाविक नहीं थी और उनकी किन्हीं लोगों द्वारा हत्या कराई गई थी.
एक अंग्रेजी पत्रिका की वेबसाइट ने दो दिन पहले पूरे विस्तार से इस ख़बर को प्रकाशित किया. पहले से लंबित बड़े मुद्दों के साथ संसद सत्र में यह भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर सकता था.
सोहराबुद्दीन-तुलसीराम एनकाउंटर के अनसुलझे सवाल
जनता के मन में क्या है?
इसके अलावा पद्मावती विवाद, सीबीआई में निजी पंसद के चुनिंदा अफसरों की नियुक्ति का मामला, किसानों की बेहाली और सरकार की वादाख़िलाफ़ी का मामला, छत्तीसगढ़ में पत्रकार गिरफ्तारी कांड, गोरक्षकों का बढ़ता आतंक, कश्मीर के बिगड़ते हालात, यूपी में एनकाउंटर के नाम पर निर्दोषों की हत्या और विभिन्न जिलों में सरकार के आलोचकों, राजनीतिक विरोधियों या सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वालों की गिरफ्तारियां सहित विभिन्न राज्यों के ढेर सारे मसले उठते.
संभवतः इन्हीं कारणों से सत्ताधारी दल और सत्ता के शीर्ष रणनीतिकारों ने संसद के शीतकालीन सत्र को कुछ समय के लिए टालने और अति-संक्षिप्त रखने का मन बनाया. पता नहीं जनता के मन मे क्या चल रहा है!
गुजरात में सिर्फ़ भाजपा राज देखनेवाले युवा किसके साथ
मूडीज़ रेटिंग से गुजरात में कितना फ़ायदा मिलेगा?
व्यापारियों का जीएसटी पर ग़ुस्सा, चुनाव पर चुप्पी
-
Irani Nepo Kids: अमेरिका में मौज कर रहे ईरानी नेताओं-कमांडरों के बच्चे, जनता को गजब मूर्ख बनाया, देखें लिस्ट -
Gold Rate Today: सोना सस्ता या अभी और गिरेगा? Tanishq से लेकर Kalyan, Malabar तक क्या है गहनों का भाव? -
Iran Espionage Israel: दूसरों की जासूसी करने वाले इजरायल के लीक हुए सीक्रेट, Iron Dome का सैनिक निकला जासूस -
Mamta Kulkarni: क्या साध्वी बनने का नाटक कर रही थीं ममता कुलकर्णी? अब गोवा में कर रहीं ऐसा काम, लोग हुए हैरान -
कौन थे कैप्टन राकेश रंजन? होर्मुज में 18 दिनों से फंसा था शिप, अब हुई मौत, परिवार की हो रही है ऐसी हालत -
Mojtaba Khamenei: जिंदा है मोजतबा खामेनेई! मौत के दावों के बीच ईरान ने जारी किया सीक्रेट VIDEO -
कौन है हाई प्रोफाइल ज्योतिषी? आस्था के नाम पर करता था दरिंदगी, सीक्रेट कैमरे, 58 महिलाओं संग मिले Video -
Uttar Pradesh Silver Rate Today: ईद पर चांदी बुरी तरह UP में लुढकी? Lucknow समेत 8 शहरों का ताजा भाव क्या? -
US-Iran War: ‘पिछले हालात नहीं दोहराएंगे’, ईरान के विदेश मंत्री ने Ceasefire पर बढ़ाई Trump की टेंशन? -
iran Vs Israel War: ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला, अमेरिका-इजराइल की भीषण बमबारी से दहला नतांज -
Hyderabad Bengaluru Bullet Train: 626 किमी के प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, DPR पर बड़ा अपडेट आया -
Hyderabad Gold Silver Rate Today: ईद के मौके पर सोना-चांदी ने किया हैरान, जानें कहां पहुंचा भाव?












Click it and Unblock the Notifications