गुजरात चुनाव में अमित शाह का वो चक्रव्यूह, जिससे नहीं निकल पाए राहुल गांधी
गुजरात चुनाव में नोटबंदी, जीएसटी और पाटीदार आंदोलन जैसे बड़े मुद्दों के हावी रहने के बावजूद यह अमित शाह की रणनीति थी, जिसके आगे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नहीं टिक पाए।
नई दिल्ली। गुजरात के चुनाव परिणाम आने के साथ ही भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया है। गुजरात, दिल्ली समेत कई दूसरे राज्यों में भी भाजपा कार्यालयों के बाहर आतिशबाजी करके मिठाइयां बांटी जा रही हैं। इस चुनाव से पहले भाजपा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात चुनाव में जीत हासिल करती रही थी, लेकिन इस बार चुनाव की पूरी जिम्मेदारी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के कंधों पर थी। गुजरात चुनाव में नोटबंदी, जीएसटी और पाटीदार आंदोलन जैसे बड़े मुद्दों के हावी रहने के बावजूद यह अमित शाह की रणनीति थी, जिसके आगे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नहीं टिक पाए और भाजपा का परचम गुजरात में फिर से लहर गया। आप भी पढ़िए, गुजरात चुनाव में कैसी रही अमित शाह की रणनीति।

31 रैलियां और 6500 किमी से ज्यादा यात्रा
गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने खुद जमकर मेहनत की और कार्यकर्ताओं को हर हाल में जीत हासिल करने का संदेश दिया। कार्यकर्ताओं में जोश भरने और प्रदेश के माहौल को भाजपा के पक्ष में करने के लिए शाह ने 31 चुनावी रैलियां और कुल 6665 किमी की यात्रा की। रैलियों के मामले में अमित शाह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से भी आगे निकल गए। राहुल गांधी ने गुजरात चुनाव में 30 रैलिया की। वहीं अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केवल 3 रैली पीछे रहे। पीएम मोदी ने 34 रैलियां की।

मजबूत बूथ मैनेजमेंट
सियासत के दिग्गज इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि बूथ मैनेजमेंट के मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का कोई जवाब नहीं है। गुजरात में रहते हुए अमित शाह ने बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं की एक बेहद मजबूत टीम तैयार की है। जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं तक पहुंच और निजी तौर पर उनसे जुड़े रहने के कारण अमित शाह ने गुजरात चुनाव का रुख पलट दिया। चुनाव में रैलियों और प्रचार से अलग इस टीम का सबसे अहम रोल रहा। पन्ना प्रभारियों के जरिए अपने वोटर्स को बूथ तक पहुंचाने का काम अमित शाह ने बखूबी किया।

दूसरे राज्यों की जीत को गुजरात में भुनाया
गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान दूसरे राज्यों के चुनावों में मिली जीत को सामने रखकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने माहौल को पार्टी के पक्ष में किया। यूपी के निकाय चुनाव में भाजपा की जीत को शाह ने गुजरात की चुनावी रैलियों में जमकर भुनाया। गुजरात की रैलियों में अमेठी में हुई कांग्रेस की हार का जिक्र कर शाह ने खुले तौर पर कहा कि कांग्रेस का अपना किला ढह रहा है। अमित शाह अपने रैलियों में लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि देश में हर जगह कांग्रेस सिमट रही है। इस तरह का आक्रामक प्रचार शाह की रणनीति का अहम हिस्सा रहा।

नाराज वर्ग की नाराजगी दूर की
नोटबंदी और जीएसटी से व्यापारी वर्ग की नाराजगी की खबरों को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गंभीरता से लिया। अमित शाह के निर्देश पर गुजरात प्रदेश अध्यक्ष जीतू वाधानी ने सूरत के हीरा और टेक्सटाइल व्यापारियों के साथ बैठक की। बैठक में यह आश्वासन दिया गया कि 18 दिसंबर को जो जीएसटी काउंसिल की बैठक होनी है, उसमें इन व्यापारियों की तमाम परेशानियों का हल निकाल लिया जाएगा। इसका सकारात्मक परिणाम भी भाजपा को चुनावों में मिला।












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