गुजरात में 45 दलितों ने किया धर्मांतरण, तो भाजपा पर भड़की AAP,क्या बोली जानिए
गुजरात में 11 दिसंबर को 45 दलितों के बौद्ध बनने पर आम आदमी पार्टी आपे से बाहर हो चुकी है। वह बीजेपी पर इस मामले में दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगा रही है। कुछ दिन पहले दिल्ली में इसी मुद्दे पर एक मंत्री की कुर्सी चली गई

गुजरात में चुनाव खत्म होने के बाद भी आम आदमी पार्टी की राजनीतिक सक्रियता कम नहीं हुई है। अब उसने 45 दलितों के धर्म परिवर्तन को लेकर बीजेपी और वहां की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। उसका कहना कि दिल्ली में जब ऐसा हुआ था तो आम आदमी पार्टी सरकार को बदनाम करने की कोशिश की गई। लेकिन, गुजरात में धर्म परिवर्तन होने पर भारतीय जनता पार्टी चुप हो जाती है। बता दें कि गुजरात में धर्म-परिवर्तन के लिए पहले से ही एक कानून बना हुआ है, जिसका पालन करना अनिवार्य है। जबकि, आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में इस कानून का भी उल्लंघन होने दिया गया है। आम आदमी पार्टी ने तो एक भाजपा नेता की मौजूदगी में धर्मांतरण होने का आरोप लगाया है।

45 दलितों के धर्म बदलने पर भड़की AAP
गुजरात में बीजेपी की नई सरकार बनने के बाद अनुसूचित जाति के 45 लोगों के बौद्ध धर्म अपनाने को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। दि न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक धर्म बदलने की यह घटना गुजरात के माहिसागर, खेड़ा और पंचमहल जिलों के लोगों के साथ हुई है। आरोप है कि कथित तौर पर 11 दिसंबर को हुआ यह धर्मांतरण बिना जिला प्रशासन की इजाजत के हुआ है। अब आम आदमी पार्टी ने इसी बहाने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी का दावा है कि यह धर्मांतरण कार्यक्रम बीजेपी के एक नेता की मौजूदगी में हुआ है। आम आदमी पार्टी की दलील है कि दिल्ली में भी तत्कालीन मंत्री राजेंद्र पाल गौतम की मौजूदगी में इसी तरह 22 लोगों ने शपथ लिया था। पार्टी बीजेपी से पूछ रही है कि वह गुजरात में दिल्ली की तरह बवाल क्यों नहीं काट रही है।

बीजेपी के हिंदुत्व के दो चेहरे- AAP
रिपोर्ट के मुताबिक आम आदमी प्रवक्ता योगेश जदवाणी ने कहा, 'गुजरात चुनाव के समय, बीजेपी नेताओं ने आप नेता राजेंद्र (गौतम) को बदनाम करने के लिए एक योजना बनाई और आप को हिंदू-विरोधी पार्टी और खुद को हिंदू पार्टी दिखाने की कोशिश की। 5 अक्टूबर (दिल्ली) के धर्मांतरण कार्यक्रम में उनके और बाकियों के द्वारा हिंदू देवी और देवताओ को त्यागने पर बीजेपी ने सवाल उठाया था। अब जब चुनाव खत्म हो गया है, बीजेपी नेताओं का वह हिंदू खो गया है और उसी तरह के धर्मांतरण कार्यक्रम में उपस्थित हो रहे हैं, यह बीजेपी के हिंदुत्व का दोहरा चेहरा है।'

बौद्ध और जैन धर्म के लिए अनुमति आवश्यक नहीं- प्रशासन
वैसे वीएचपी का कहना है कि वह बौद्ध धर्म में धर्मांतरण का विरोध नहीं करती है। वैसे दावा किया जा रहा है कि जो धर्मांतरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था, वह गुजरात फ्रीडम रिलीजन ऐक्ट, 2003 के नियमों के तहत बिना अनुमति के किया गया है। इस कानून के मुताबिक कोई व्यक्ति अपने जन्म वाला धर्म छोड़ना चाहता है और दूसरा धर्म अपनाना चाहता है, तो उसे जिला मैजिस्ट्रेट या कलेक्टर से पूर्व अनुमति लेनी होगी। लेकिन, माहिसागर के जिलाधिकारी भवीन पांड्या ने अखबार से कहा कि 'भारतीय कानून के मुताबिक बौद्ध या जैन के लिए ऐसी किसी भी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। फिर भी उनके पुजारी ने हमें सूचित किया था, मुझे धर्मांतरण की अनुमति का आवेदन मिला था, जो कि अंडर प्रॉसेस है।'

'आत्म-सम्मान के साथ रहने के लिए धर्म-परिवर्तन'
वहीं 44 और लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपनाने वाले भानू चौहान ने कहा, '11 दिसंबर, 2022 को मेरे अलावा 44 और लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया था। हम 45 अनुसूचित जाति के लोगों ने इसलिए बौद्ध धर्म अपनाया है, क्योंकि हम हिंदू होने के बावजूद हम हिंदू समाज में आत्म-सम्मान के साथ नहीं रह सकते, इसी कारण हम लोगों ने धर्मांतरण किया है।'

हमने नियमों के तहत धर्म बदला- बौद्ध बनने वाले
उन्होंने कानून के खिलाफ जाकर धर्म बदलने के आरोपों पर कहा, 'जो लोग भी हिंदू धर्म छोड़ना चाहते थे, नियमों के तहत एक महीने पहले जिला कलेक्टर के पास आवेदन दिया था। जिला कलेक्टर को आवेदन दायर करने के 30 दिनों के भीतर उसे मंजूर करना होता है, यदि नहीं मंजूर किया जाता है तो इसे मंजूर मान लिया जाता है और इसलिए हमें लगा कि हमें बौद्ध धर्म अपनाने की अनुमति मिल चुकी है।'(तस्वीरें- सांकेतिक)












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