GST में खत्म होंगे 12%-28% वाले स्लैब, वित्त मंत्रियों के समूह की मंजूरी, आम लोगों को क्या फायदा?
GST Slab Changes 2025: भारत में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी हो चुकी है। केंद्रीय सरकार और राज्यों के वित्त मंत्रियों के समूह (GoM) ने जीएसटी स्लैब को सरल बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मौजूदा चार स्लैब अब केवल दो स्लैब 5% और 18% में बदल दिए जाएंगे। यह कदम टैक्स सिस्टम को आसान, पारदर्शी और कॉम्प्लायंस को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
बैठक में बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में यूपी, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और केरल के मंत्री भी मौजूद थे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नया सिस्टम आम जनता, किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए लाभकारी होगा। इसके अलावा हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी में छूट देने का प्रस्ताव भी रखा गया।

स्लैब में कटौती - विस्तार से समझें
GST (Goods and Services Tax) के मौजूदा सिस्टम में चार टैक्स स्लैब थे - 5%, 12%, 18% और 28%। लेकिन वित्त मंत्रियों के समूह (GoM) की हालिया बैठक में यह तय किया गया कि अब केवल दो स्लैब रहेंगे - 5% और 18%।
पहले की व्यवस्था
- 5%: जरूरी वस्तुएं जैसे अनाज, दूध, दालें, दवाइयां आदि।
- 12%: मिड कैटेगरी की चीजें।
- 18%: आम सेवाएं और सामान।
- 28%: लक्ज़री और सिन गुड्स (शराब, तंबाकू, जुआ आदि)।
नई व्यवस्था
5% स्लैब: अब भी जरूरी सामान और सेवाओं पर लागू होगा। इसमें 12% स्लैब के कई आइटम शामिल कर दिए जाएंगे।
18% स्लैब: आम कैटेगरी के सामान और सेवाओं पर लागू होगा। इसमें 28% स्लैब वाले लगभग 90% 90% सामान शामिल होंगे।
1. 5% स्लैब (कम टैक्स वाला स्लैब)
इस स्लैब में जरूरी वस्तुएँ और आम सेवाएँ शामिल हैं। उद्देश्य यह है कि रोजमर्रा के सामान पर टैक्स कम हो और आम आदमी की जेब पर बोझ न पड़े। उदाहरण:
- खाद्य सामग्री (दाल, आटा, चावल, चीनी)
- दूध और डेयरी उत्पाद
- दवाएँ और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी उत्पाद
- बुनियादी सेवाएँ जैसे ट्रेन टिकट, बस किराया
इस स्लैब में पहले 12% वाले लगभग 99% सामान को शिफ्ट किया जाएगा, जिससे ये वस्तुएं पहले से सस्ती होंगी।
2. 18% स्लैब (मध्यम टैक्स वाला स्लैब)
इस स्लैब में आम कैटेगरी के सामान और सेवाएँ आती हैं, जो जरूरी लेकिन विलासिता की श्रेणी में नहीं आते।
उदाहरण
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप
- फैशन और कपड़े
- होटल और रेस्तरां की सेवाएं
28% वाले लगभग 90% सामान को इस स्लैब में शिफ्ट किया जाएगा
3. 40% स्लैब (विशेष टैक्स स्लैब - सिन गुड्स)
इस स्लैब में उन वस्तुओं और सेवाओं को रखा गया है जिनका सेवन स्वास्थ्य या सामाजिक दृष्टि से हानिकारक माना जाता है। उदाहरण:
- शराब और तंबाकू
- ड्रग्स और जुआ संबंधित सेवाएं
- सॉफ्ट ड्रिंक, फास्ट फूड और कॉफी
- शुगर और पोर्नोग्राफी संबंधित सामग्री
इस स्लैब का उद्देश्य इन वस्तुओं की खपत कम करना और लोगों को स्वास्थ्य व सामाजिक नुकसान से बचाना है।
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सस्ते होने वाले सामान
- जो चीजें पहले 12% स्लैब में थीं, उनमें से लगभग 99% को अब 5% स्लैब में शिफ्ट किया जाएगा।
- उदाहरण: दाल, आटा, चावल, दूध, डेयरी प्रोडक्ट्स, कुछ आवश्यक दवाएं
- इसका मतलब है कि रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएँ पहले से काफी सस्ती हो जाएंगी।
- जो चीजें पहले 28% स्लैब में थीं, उनमें से लगभग 90% को 18% स्लैब में ले जाया जाएगा।
- उदाहरण: मोबाइल फोन, कपड़े, होटल सेवाएं
- इसका सीधा असर: आम आदमी की जेब पर टैक्स कम लगेगा, सामान थोड़ा सस्ता होगा।
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महंगे होने वाले सामान
- सिन गुड्स (40% स्लैब): शराब, तंबाकू, ड्रग्स, जुआ, फास्ट फूड, शुगर, कॉफी, पोर्नोग्राफी आदि।
- इन पर टैक्स अब 40% रखा गया है, जिससे खपत कम करने का प्रयास है।
- सामान्य तौर पर ये सामान महंगे रहेंगे या और महंगे हो सकते हैं।












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