55 साल में पहली बार हुआ बैंकों का इतना बुरा हाल, जमा हुए केवल 114 लाख करोड़ रुपए

नवंबर 2016 में नोटबंदी किए जाने के बाद तकरीबन 86 फीसदी डिपोजिट बैंकों में पहुंची थी

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद से ही बैंकिंग सेक्टर की परेशानियां कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। मार्च 2018 को खत्म हुए वित्त वर्ष में बैंक में लोगों ने 6.7 फीसदी की दर से पैसे जमा किए। यह 1963 के बाद सबसे कम है। भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में बैंक का ग्रोथ रेट 6.7 फीसदी रहा।

नोटबंदी का उल्टा असर बैंकों पर पड़ता दिख रहा है

नोटबंदी का उल्टा असर बैंकों पर पड़ता दिख रहा है

नवंबर 2016 में नोटबंदी किए जाने के बाद तकरीबन 86 फीसदी डिपोजिट बैंकों में पहुंची थी। इससे बैंकों के पास काफी बड़ी मात्रा में डिपोजिट जमा हुआ था, लेकिन अब नोटबंदी का उल्टा असर बैंकों पर पड़ता दिख रहा है.। रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के बाद जो पैसा बैंकिंग सिस्टम में आया था, वह अब निकल चुका है। पिछले कुछ समय से लोग बैंक की बजाय म्युचुअल फंड और अन्य निवेश के विकल्पों में ज्यादा निवेश कर रहे हैं। इस वजह से भी लोगों का रुझान एफडी में कम हुआ है।

केवल 114 लाख करोड़ रुपये जमा हुए

केवल 114 लाख करोड़ रुपये जमा हुए

2017-18 में बैंकों में केवल 114 लाख करोड़ रुपये जमा हुए। लेकिन इसी दौरान म्यूचुअल फंड में 21.36 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए। इसके अलावा लोगों ने इन्श्योरेंस कंपनियों से भी करीब 193 लाख करोड़ रुपये की पॉलिसी को खरीदा।

इस वजह से घटा रूझान

इस वजह से घटा रूझान

आरबीआई के मुताबिक नोटबंदी के बाद बैंक में एफडी खाता खुलवाने वालों की संख्या में काफी इजाफा देखा गया था। लेकिन पिछले वित्त वर्ष में हुए बैंकिंग घोटालों के बाद से लोगों का बैंकों से विश्वास उठने लगा और उन्होंने एफडी से पैसे को म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश कर दिया। एफडी कम होने से बैंक अब अपनी ब्याज दरों में भी इजाफा कर सकते हैं, जिसके बाद बैंकों से लोन लेना और महंगा हो सकता है।

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