कौन हैं नृपेंद्र मिश्रा? बन सकते हैं राम मंदिर के CEO? PM मोदी के हैं सबसे भरोसेमंद अफसर,परिवार में कौन-कौन?
Nripendra Misra (Ram Mandir Trust): अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रस्ट की कमान किसे मिलेगी। अब 11 जुलाई को होने वाली प्रस्तावित बैठक पर सबकी नजर है, क्योंकि इसी बैठक में ट्रस्ट के नए ढांचे, संचालन व्यवस्था और नए पदाधिकारियों को लेकर फैसला हो सकता है। इन्हीं चर्चाओं के बीच सबसे ज्यादा जिस नाम की चर्चा है, वह है पूर्व IAS अधिकारी और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राम मंदिर के बेहतर मैनेजमेंट और संचालन के लिए नृपेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का नया महासचिव या चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) बनाया जा सकता है।
प्रशासनिक अनुभव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लंबे समय तक काम करने का रिकॉर्ड और राम मंदिर परियोजना से जुड़ी उनकी भूमिका उन्हें सबसे मजबूत दावेदारों में खड़ा करती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी और भरोसेमंद नौकरशाहों में गिने जाने वाले नृपेंद्र मिश्रा आखिर कौन हैं, क्यों पीएम उन पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं, और उनके परिवार में कौन-कौन है? आइए जानते हैं।

Who is Nripendra Misra: कौन हैं नृपेंद्र मिश्रा?
- नृपेंद्र मिश्रा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1967 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी रहे हैं। उनका जन्म 8 मार्च 1945 को हुआ। नृपेंद्र मिश्रा देवरिया के कसली गांव के मूल निवासी हैं। ये ब्राह्मण जाति के हैं।
- सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार, दोनों जगह कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। नृपेंद्र मिश्रा ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद उन्होंने दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित हावर्ड यूनिवर्सिटी के जॉन एफ. कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट से एमपीए (MPA) की डिग्री भी हासिल की।
- नृपेंद्र मिश्रा भारत सरकार के टेलीकॉम सेक्रेटरी, फर्टिलाइजर सेक्रेटरी और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के चेयरमैन जैसे बेहद अहम पदों पर रह चुके हैं। प्रशासनिक सेवा से रिटायर होने के बाद भी उनकी भूमिका खत्म नहीं हुई। साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री का प्रधान सचिव बनाया गया। उस दौरान उन्हें देश के सबसे प्रभावशाली नौकरशाहों में गिना जाता था।
- बाद में 2020 में उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया। राम मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया में उनकी भूमिका बेहद अहम रही है। साल 2021 में उन्हें देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण भी दिया गया।

आखिर पीएम मोदी को नृपेंद्र मिश्रा पर इतना भरोसा क्यों है?
साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने दिल्ली की ब्यूरोक्रेसी को संभालने के लिए नृपेंद्र मिश्रा पर भरोसा जताया। उन्हें प्रधानमंत्री का प्रिंसिपल सेक्रेटरी (प्रधान सचिव) नियुक्त किया गया और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला।
कानून बदलकर दी गई जिम्मेदारी: नृपेंद्र मिश्रा को पीएमओ (PMO) में लाने के लिए मोदी सरकार को बाकायदा कानून (TRAI Act) में बदलाव करना पड़ा था, क्योंकि पहले के नियम के मुताबिक ट्राई का कोई भी पूर्व चेयरमैन रिटायरमेंट के बाद सरकारी पद नहीं ले सकता था। यह दिखाता है कि पीएम मोदी को उनकी कितनी जरूरत थी।
उन्हें भारत के इतिहास के सबसे ताकतवर नौकरशाहों में से एक माना जाता है। साल 2019 में दोबारा सरकार बनने पर भी उन्हें इस पद पर बनाए रखा गया, हालांकि बाद में उन्होंने खुद इस पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सरकार ने उन्हें नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (NMML) का अध्यक्ष बनाया और फिर राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन के रूप में अयोध्या की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी।

राम मंदिर परियोजना में क्या रही भूमिका?
फरवरी 2020 में नृपेंद्र मिश्रा को राम मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया। मंदिर निर्माण की तकनीकी निगरानी, निर्माण एजेंसियों के साथ समन्वय और समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने में उनकी बड़ी भूमिका रही। इसी अनुभव की वजह से अब यह चर्चा भी है कि अगर ट्रस्ट प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करना चाहता है तो उन्हें महासचिव या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जैसी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
नृपेंद्र मिश्रा का परिवार, क्या करते हैं बेटा और बेटी? (Nripendra Misra Family Details: Son and Daughters)
नृपेंद्र मिश्रा का परिवार सिर्फ प्रशासनिक तौर पर ही नहीं, बल्कि राजनीति, कॉर्पोरेट और मीडिया जगत में भी बहुत बड़ा मुकाम रखता है। उनकी पत्नी कुसुम मिश्र एक हाउस वाइफ हैं, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती (पहले बहराइच) की रहने वाली हैं और हमेशा लाइमलाइट से दूर रहती हैं। उनके तीन बच्चे हैं, जो अपने-अपने फील्ड के बड़े नाम हैं।
बेटा साकेत मिश्रा: पूर्व IPS, बैंकर और राजनेता (Who is Saket Misra)
नृपेंद्र मिश्रा के बेटे साकेत मिश्रा का जन्म 1971 में लखनऊ में हुआ था। साकेत ने दिल्ली के मशहूर सेंट स्टीफंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन की और फिर IIM कलकत्ता से मैनेजमेंट (MBA) की पढ़ाई की। वे 1994 में IPS के लिए चुने गए थे, लेकिन उन्होंने पुलिस सेवा की जगह इनवेस्टमेंट बैंकिंग को चुना। उन्होंने डॉयचे बैंक और रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड जैसी ग्लोबल कंपनियों में एशिया-पैसिफिक स्तर के बड़े पदों को संभाला।
इसके बाद वे भारत लौटे और समाज सेवा में जुट गए। वे फिलहाल उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मनोनीत सदस्य (MLC) हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें पूर्वांचल विकास बोर्ड का सलाहकार भी बनाया था। साकेत ने 2024 का लोकसभा चुनाव श्रावस्ती सीट से बीजेपी के टिकट पर लड़ा था, लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए। वे 'आभार ट्रस्ट' भी चलाते हैं, जो शहीद पुलिसकर्मियों के बच्चों की मदद करता है।

बड़ी बेटी पूर्वा मिश्र: मीडिया और HR की बड़ी हस्ती (who is Purva Misra)
नृपेंद्र मिश्रा की बड़ी बेटी पूर्वा मिश्र कॉर्पोरेट और मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। उन्होंने भी सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई की और XLRI जमशेदपुर से गोल्ड मेडल के साथ MBA की डिग्री ली। पूर्वा के पास 25 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है। वे मेकमायट्रिप, मैक्स हेल्थकेयर जैसी बड़ी कंपनियों में रहने के बाद करीब 11 साल तक इंडिया टुडे ग्रुप की सीएचआरओ (CHRO) और इंडिया टुडे मीडिया इंस्टीट्यूट की सीओओ (COO) रहीं। हाल ही में 3 सितंबर 2024 को उन्हें NDTV Group का चीफ पीपुल ऑफिसर (CPO) नियुक्त किया गया है। पूर्वा के पति श्यामल मिश्र भी 1996 बैच के हरियाणा कैडर के सीनियर IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने IIT कानपुर और हावर्ड से पढ़ाई की है।
छोटी बेटी प्राची मिश्र: सिविल सर्वेंट (who Is Prachi Misra)
उनकी छोटी बेटी प्राची मिश्र भी देश की सेवा में हैं। वे इंडियन ऑडिट्स एंड अकाउंट्स सर्विस (IA&AS) की अधिकारी हैं। प्राची बेहद निजी जिंदगी जीना पसंद करती हैं और मीडिया से दूर रहती हैं। उनके पति सुप्रीम कोर्ट में एक जाने-माने वकील हैं।
अब जानिए राम मंदिर ट्रस्ट में आखिर क्या बदलने वाला है?
राम मंदिर ट्रस्ट ने 27 जून को आधिकारिक तौर पर बताया कि महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने 26 जून को अपने पद छोड़ दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक अब ट्रस्ट के कामकाज को नए तरीके से व्यवस्थित करने की तैयारी चल रही है। सरकार की ओर से ट्रस्ट के संचालन का नया ब्लूप्रिंट भी रखा जा सकता है, जिस पर 11 जुलाई की बैठक में चर्चा होने की संभावना है। चर्चा यह भी है कि इसी बैठक में नए महासचिव और दूसरे पदाधिकारियों के नामों पर अंतिम फैसला हो सकता है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक महासचिव पद के लिए तीन नामों पर चर्चा चल रही है। सबसे पहला नाम नृपेंद्र मिश्रा, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि और ट्रस्टी कृष्णमोहन। संघ और विश्व हिंदू परिषद की कोशिश यह भी बताई जा रही है कि ट्रस्ट के संचालन में संगठन की भूमिका पहले की तरह बनी रहे। यही वजह है कि अंतिम नाम पर अभी सहमति बनने की प्रक्रिया जारी है।
हालांकि महासचिव पद के लिए नृपेंद्र मिश्रा के नाम पर ट्रस्ट के कुछ सदस्यों के बीच पूरी तरह सहमति नहीं बन पा रही है, क्योंकि संघ चाहता है कि इस पद पर उनका ही कोई पूर्णकालिक कार्यकर्ता बैठे। लेकिन नृपेंद्र मिश्रा के बेमिसाल प्रशासनिक तजुर्बे को देखते हुए उन्हें मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नई और बेहद पावरफुल भूमिका दी जा सकती है। अब देखना होगा कि 11 जुलाई की बैठक के बाद अयोध्या की इस नई व्यवस्था का बॉस कौन बनता है।
FAQs
नृपेंद्र मिश्रा कौन हैं?
वे 1967 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव रह चुके हैं। फिलहाल वे राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं।
क्या नृपेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव बन गए हैं?
नहीं। अभी तक उनकी नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। उनका नाम संभावित दावेदारों में शामिल है।
नृपेंद्र मिश्रा के परिवार में कौन-कौन हैं?
पत्नी कुसुम मिश्रा, बेटे साकेत मिश्रा, बड़ी बेटी पूर्वा मिश्रा और छोटी बेटी प्राची मिश्रा।
11 जुलाई की बैठक क्यों अहम है?
इसी बैठक में ट्रस्ट के नए प्रशासनिक ढांचे और नए पदाधिकारियों पर फैसला होने की संभावना है।














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