नूंह डीएसपी हत्या: यहां सालों से न अवैध खनन रुका है, ना पुलिस के साथ मुठभेड़ - ग्राउंड रिपोर्ट

सुरेंद्रसिंह बिश्नोई, डंपर, बेकायदेशीर खाण
ANI
सुरेंद्रसिंह बिश्नोई, डंपर, बेकायदेशीर खाण

हरियाणा के तावड़ू में लोगों के बीच एक पुराना वायरल वीडियो फिर से चर्चा में है. दिसंबर साल 2020 के इस वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस वाले कैसे अवैध खनन रोकने की कोशिश कर रहे हैं

यही वीडियो दिखाते हुए, एक स्थानीय पत्रकार कहते हैं, "एक डीएसपी की हत्या बहुत दुखद है, लेकिन सवाल ये है कि क्या इसे रोका जा सकता था, न यहां अवैध ख़नन नई बात है, न ही पुलिस से होने वाली झड़पें. और ये रुक ही नहीं रही हैं, ऐसा क्यों हैं?"

वीडियो में देखा जा सकता है कि अरावली की पहाड़ियों पर कुछ लोग अवैध खनन कर रहे हैं, पहाड़ के नीचे पुलिसकर्मी पहुंचते हैं और उन्हें रुकने के लिए करते हैं.

तभी अचानक ऊपर से पत्थरों से हमला किया जाने लगता है. पुलिसवाले बार-बार उन्हें चेतावनी देते हैं, लेकिन पत्थरों के हमले तेज़ होने लगते हैं. ऊंचाई से पत्थर फेंके जाने के कारण पुलिस के लोग उसका सामना नहीं कर पाते और उन्हें भागना पड़ता है.

हरियाणा पुलिस के ओमबीर सिंह, जिन्होंने ये वीडियो बनाया है, वो उस समय तावड़ू शहर के थाना अध्यक्ष थे. बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, "पहाड़ों पर जब भी ऐसे समय पर पुलिस पहुंचती है, उनपर हमला होता है. आमतौर पर पत्थर मारकर ही हमला किया जाता है."

तावडू और आसपास के लोगों के लिए अवैध खनन करने वालों और पुलिस के बीच होने झड़पें नई नहीं हैं. लोगों का दावा है कि सड़कों पर अवैध पत्थर से भरे डंपर देखे जा सकते हैं.

तावड़ू बायपास के पास रहने वाले योगेश बताते हैं, "मैंने कई बार इसी सड़क पर अवैध पत्थर से भरे ट्रेक देखे हैं, ये हमारी लिए बहुत आम बात है, कई बार पुलिस की गाड़ियों को उनका पीछा करते भी देखा है."

पास ही बिजली के तारों को दिखाते हुए वो कहते हैं, "कुछ दिनों पहले ही पुलिस एक डंपर का पीछा कर रही थी, उसने यहीं पर अपनी ट्रॉली पलट दी और सारे पत्थर गिरा दिए, आप देख सकते हैं, वहाँ तारों को भी काफ़ी नुकसान हुआ."

आमतौर पर पीछा किए जाने पर ये डंपर ट्ऱ़ॉली पलट देते हैं, उसमें रखे सारे पत्थर सड़क पर गिर जाते हैं, और पुलिस आगे नहीं बढ़ पाती और ड्राइवर भागने में कामयाब हो जाता है.

मंगलवार को पास एक गांव के पास तावडू के पुलिस उपाधीक्षक यानी डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई पर डंपर चढ़ाकर उनकी हत्या कर दी गई है. उनकी लाश जिस जगह मिली वहाँ भी ऐसे ही पत्थर गिरा दिए गए थे.

कैसे चल रहा है अवैध खनन का कारोबार

डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई की हत्या जिस जगह हुई वहाँ पहुंचना आसान नहीं है. पचगांव में जहां पर सड़कें ख़त्म हो जाती हैं, वहां से क़रीब बीस मिनट तक पहाड़ी इलाकों की कच्ची सड़कों से होते हम वहां पहुंच पाए.

आसपास के लोगों ने बताया कि इन जगहों पर खनन की वारदातें आम हैं. कुछ जगहों पर हमें पत्थर गिरे हुए भी दिखे. वहीं मौजूद एक गांववाले ने कहा, "ये मज़बूत पहाड़ हैं. इनमें से ऐसे पत्थर तभी निकलते हैं, जब आप इन्हें ड्रिल करें, यानी साफ़ है कि यहां पर खनन हो रहा है."

गांववालों ने बताया कि आसपास के गांव के कई लोग इससे जुड़े हुए, कुछ के पास मशीनें और डंपर हैं, कुछ हाथ से ही खनन करते हैं, तो कुछ लोग दूसरों के लिए मज़दूरी करते हैं.

एक पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, "आसपास के गांव के लोग, जिनके पास कोई मशीन नहीं है, वो अपने हाथों से खुदाई करते हैं. इनकी संख्या बहुत है, ड्रिलिंग मशीनों के पुलिस की नज़र में आने का ख़तरा भी होता है."

पत्थर निकाल लेने के बाद इन्हें डंपर में लोड किया जाता है और क्रशर में भेज दिया जाता है. ये डंपर अक्सर कच्चे रास्तों से रात में निकलतें हैं ताकि पुलिस की नज़र से बचा जा सके. कई बार पुलिस वाले इन्हें स्पॉट करने के बावजूद कुछ नहीं कर पाते.

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, "इनको रोकना आसान नहीं है, अगर ये किसी व्यस्त सड़क से गुज़र रहे हैं, और हमने पीछा करने की या रोकने की कोशिश की, तो वो पत्थर गिराने या भागने की कोशिश कर सकते हैं. ये बड़ी गाड़ियाँ होती हैं, अगर किसी आम आदमी की गाड़ी पर पत्थर गिर जाए, या वो उनकी चपेट में आ जाए, तो जान का ख़तरा है, इसलिए इनका पीछा अक्सर सुनसान इलाकों में ही किया जाता है."

हमें अरावली के इलाकों में कई क्रशर दिखे. लोगों ने बताया कि इनमें से कई बंद पड़े हैं, कुछ को काम करने की इजाज़त है लेकिन वो बस वैध तरीके से निकाले गए पत्थर को क्रश कर सकते हैं.

लेकिन इस इलाके को जानने वाले कई लोग कहते हैं बंद पड़े क्रशर भी कई बार रात में चालू हो जाते हैं, पुलिस लगातार जांच अभियान चलाती है, लेकिन उससे बचना मुश्किल नहीं है.

पास के ही गांव के सईद (बदला हुआ नाम) बताते हैं, "सात से आठ मिनट में एक क्रशर पूरे डंपर के पत्थर को क्रश कर देता है. आप कितनी भी चौकसी लगा लें, इनपर लगाम नहीं लग सकता."

पुलिस के लोगों बताया कि अक्सर कोई मुखबिर मौजूद होता है जो कि पुलिस के आने की सूचना नीचे से ही दे देता है.

गांव के कई लोग ये भी कहते हैं कई गांववालों की रोज़ी-रोटी खनन पर ही निर्भर है.

सईद कहते हैं, "ये घटना बहुत दुखद है, एक आदमी ने ग़लती की और इसका ख़मियाजा गांव के कई दूसरे लोगों को भुगतना पड़ेगा. देखने में ये जितना बड़ा धंधा लगता है, यहां आसपास के लोगों के लिए ये उतना नहीं है, कई मज़दूर लगते हैं, एक डंपर से बहुत मुश्किल के उन्हें 1500 रूपये का मुनाफ़ा होता हैं. पैसा वो कमाते हैं जो इनका ठेका लेते हैं और बाज़ार में गिट्टी बेचते हैं."

कुछ लोगों ने हमें बताया गया कि छह टायर वाली एक ट्रॉली करीब 15 हज़ार से 17 हज़ार रूपये में बिकती है. कई छोटे व्यापारियों के अलावा कुछ बड़े लोग भी इस धंधे में सक्रिय बताए जाते हैं.

हरियाणा के नेता विपक्ष भूपेंदर सिंग हुड्डा माफ़ियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा, "माफ़िया इस स्तर पर बिना किसी डर के काम कर रहे हैं, इसका मतलब साफ है कि उन्हें संरक्षण मिला हुआ है."

इस घटना के बाद जब हम पचगांव पहुंचे तो पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी थी. पुलिस के डर से कई लोग गांव छोड़कर भाग चुके थे.

इसपर बात करते हुए हरियाणा पुलिस के प्रवक्ता कृष्ण कुमार ने बीबीसी से कहा, "जो लोग अवैध ख़नन में शामिल है, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा, लेकिन जो निर्दोष हैं उन्हें डरने की ज़रूरत नहीं है."

डंपरों से भरे पड़े हैं थाने

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक नूह में साल 2022-23 में इस साल 23 एफ़आईआर दर्ज की गई है. सरकारी डेटा के अनुसार इस दौरान 68 गाड़ियां सीज़ की गई हैं और 4,28,400 रुपये जुर्माने के तौर पर वसूले गए हैं.

हम तावड़ू के सदर और शहर थाने में पहुंचे तो कई डंपर वहां खड़े दिखे. इनमें से कुछ पिछले कुछ महीनों में पकड़े गए थे, तो कुछ काफ़ी समय से वहीं खड़े थे.

साल 2021-22 में नूह में 239 एफ़आईआर दर्ज किए गए थे. वहीं के एक स्थानीय पत्रकार ने हमें बताया कि पिछले कुछ समय से लगातार खनन के मामले सामने आ रहे थे, पुलिस कई मामलों में कार्रवाई भी कर रही थी, लेकिन रोकने में कामयाब नहीं हो पा रही थी.

लोकल मीडिया में लगातार छप रहीं थी ख़बरे

अखबारों के लोकल पन्नों पर और लोकल मीडिया में ख़नन से जुड़ी ख़बरें लगातार छप रही थीं, कुछ ख़बरों में पुलिस पर सवाल भी उठाए गए थे.

13 मई 2022 को अख़बार दैनिक जागरण में एक तस्वीर छपी जिसमें दावा किया गया है उस ट्रक में अवैध पत्थर थे जिसे सुबह सोहना रोड से बिना रोक टोक ग़ुज़रता देखा गया. इसी रिपोर्ट में नूंह के पुलिस अक्षीक्षक वरुण सिंघला का बयान भी छपा है जिसमें उन्होंने कहा है कि "कई नाकों पर लगाए गए एसपीओ और पुलिसकर्मियों को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं."

इसके अलावा 20 मार्च 2022 को मौके की तस्वीर के साथ प्रकाशित एक ख़बर में बताया गया कि अवैध ख़नन के दौरान पहाड़ का एक हिस्सा ढह गया और इसमें एक डंपर और ज़मीन खोदने की मशीन दब गई.

इसके तीन दिन बाद, 23 मार्च को एक और ख़बर छपी जिसके मुताबिक पुलिस एक डंपर का पीछा कर रही थी, जिसका चालक सड़क पर पत्थर गिराकर भागने में कामयाब रहा.

स्थानीय अख़बारों की इन ख़बरों में पुलिस और नाकों पर तैनात लोगों पर सवाल उठाए गए थे. सभी ख़बरों मे पुलिस के उच्च अधिकारियों के बयान भी शामिल रहे हैं जिनमें वो कड़े कदम उठाने और इस दिशा निरंतर काम करने की बात कर रहे हैं.

https://www.youtube.com/watch?v=qfakO49P7Hk

क्या पुलिस से चूक हुई

स्थानीय पत्रकार बताते हैं कि पुलिस और खनन करने वालों का आमना सामना होता रहा है और उन्हें ख़तरे का अंदाज़ा था, और ये भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या डीएसपी सुरेंद्र सिंह का बिना सुरक्षा के वहाँ जाना सही था?

हमने इस मुद्दे पर नूह से एसपी वरुण सिंघला से बात करने की कोशिश की लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया.

पुलिस
ANI
पुलिस

हरियाणा पुलिस के प्रवक्ता ने हमसे बात करते हुए कहा कि चेकिंग के दौरान सभी नियमों का पालन किया गया था.

उन्होंने कहा, "ये एक रूटीन चेंकिग थी, दिन में चेकिंग होती है, नाका पर चेंकिग होती है, उसमें ड्यूटी निर्धारित होती है, ऐसे दिन में चेकिंग हो रही थी. उन्हें सूचना मिली की वहां अवैध खनन हो रहा है, कितनी मात्रा में इसकी जानकारी नहीं थी, तो वहां वो निकल लिए, जब वो वहां पहुंचे तो पुलिस की गाड़ी देख डंपर ड्राइवर ने भगाना शुरू कर दिया. वो रोड ऊंचाई पर थी, थोड़ी दूर जा कर उन्होंने रोक लिया. डीएसपी को लगा कि वो पुलिस को देखकर रुक गए, इसलिए वो अपनी जीप से बाहर आए. लेकिन वो रुके थे जैक उठाकर पत्थर गिराने के लिए. उन्होनें पत्थर गिराए इस दौरान उनको कुचल दिया."

अरावली पर्वत श्रृखला हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों से ग़ुज़रती हैं और कई तरह के जानवरों और पक्षियों का घर हैं.

साल 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में खनन पर रोक लगा दी थी लेकिन अवैध खनन के मामले लगातार सामने आते रहते हैं.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हाल में ही हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नूंह, गुरुग्राम और फरीदाबाद प्रशासन को निर्देश दिया अवैध खनन रोकने के लिए एक संयुक्त समिति का आदेश दिया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+