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अंबाला में Water Salute के साथ होगा राफेल का ग्रैंड वेलकम, जानिए क्‍यों है यह परंपरा

अंबाला। इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) पिछले दो दशकों से किसी विदेशी फाइटर जेट का इंतजार कर रही थी। आज उसका यह इंतजार अंबाला में राफेल की लैंडिंग के साथ खत्‍म हो जाएगा। पांच राफेल का पहला बैच अंबाला में लैंड करेगा और इसके साथ ही फ्रेंच जेट राफेल आईएएफ से जुड़ जाएगा। अंबाला में राफेल के ग्रैंड वेलकम की तैयारी चल रही है। आईएएफ सूत्रों की तरफ से बताया गया है कि राफेल को अंबाला में लैंडिंग के बाद वॉटर कैनन सैल्‍यूट दिया जाएगा।

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    क्या होता है वॉटर सैल्‍यूट

    क्या होता है वॉटर सैल्‍यूट

    सैल्‍यूट किसी भी मिलिट्री एयरक्राफ्ट और एयरलाइन सर्विस को एयरपोर्ट पर लैंड करने पर सम्‍मान स्‍वरूप वॉटर कैनन सैल्‍यूट दिया जाता है। इस सैल्‍यूट में आमतौर पर आग बुझाने वाली दो गाड़‍ियां एयरक्राफ्ट पर पानी की बौछार करते हैं। किसी भी नए एयरक्राफ्ट की लैंडिंग और इसके टेकऑफ के समय वॉटर कैनन सैल्‍यूट दिया जाता है। इस परंपरा का मकसद एयरक्राफ्ट का आभार जताना भी है। वॉटर सैल्‍यूट में जो भी व्‍हीकल्‍स होते हैं वो सभी सम संख्‍या जैसे 2, 4,6 या 8 होते हैं। वॉटर सैल्‍यूट का प्रयोग किसी जमाने में किसी सीनियर पायलट या एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के रिटायरमेंट या उसकी फ्लाइंग के पहले या आखिरी दिन पर दिया जाता था।

    कब हुई इस परंपरा की शुरुआत

    कब हुई इस परंपरा की शुरुआत

    वॉटर सैल्‍युट की शुरुआत कब हुई इस बारे में तो कहना मुश्किल है लेकिन माना जाता है कि इसकी शुरुआत 30 वर्ष पहले सन् 1990 में हुई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक एयरक्राफ्ट के अलावा शिप्‍स को भी इसी तरह से सैल्‍यूट दिया जाता है। 1990 में अमेरिका की डेल्‍टा एयरलाइंस के पायलट जब रिटायर हो रहे थे जो साल्‍ट लेक सिटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ से इस तरह से ही उनका सम्‍मान किया गया था। इस दौरान पानी की मदद से धनुष के आकार की आकृति बनाई गई थी और पायलट उसके ही नीचे से गुजरे थे। साल 2016 में जब अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने राष्‍ट्रपति चुनाव जीता था तो ला गौर्डिया एयरपोर्ट से उनके पहले डिर्पाचर पर उन्‍हें वॉटर सैल्‍यूट दिया गया था।

    कड़ी सुरक्षा में होगी राफेल की लैंडिंग

    कड़ी सुरक्षा में होगी राफेल की लैंडिंग

    आईएएफ के सूत्रों के मुताबिक राफेल जेट दोपहर करीब दो बजे अंबाला में लैंड कर सकते हैं। राफेल की लैंडिंग से पहले अंबाला में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और पूरे शहर में धारा 144 लगा दी गई है। आईएएफ ने फोटो और वीडियो लेने पर पाबंदी लगा दी है। फ्रांस के साथ सन् 2015 में 36 राफेल की डील भारत ने साइन की थी। भारत के राफेल खरीदने के बाद अब कुछ और देशों ने भी फ्रांस से इसकी मांग की है। अभी तक भारत के अलावा इजिप्‍ट और कतर की वायुसेनाएं इसका प्रयोग कर रही हैं। सोमवार को राफेल फ्रांस के मेरीनेक से भारत के लिए रवाना हुए थे। राफेल की भारत तक उड़ान के दौरान एक स्‍टॉप यूनाइटेड अरब एमीरेट्स (यूएई) का अल दाफ्रा एयरबेस था। अबू धाबी के करीब यह एयरबेस अमेरिकी सेनाओं का अहम बेस है और यहां से फ्रांस की सेनाएं भी ऑपरेट करती हैं।

    एक मिनट में 60,000 फीट की ऊंचाई

    एक मिनट में 60,000 फीट की ऊंचाई

    राफेल एक बार में करीब 26 टन (26 हजार किलोग्राम) वजन के साथ उड़ान भरने में सक्षम है। यह जेट 3,700 किलोमीटर के दायरे में कहीं भी हमला कर सकता है। इसके अलावा यह 36,000 से 60,000 फीट की अधिकतम ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है और यहां तक महज एक मिनट में पहुंच सकता है। एक बार टैंक फुल होने के बाद यह लगातार 10 घंटे तक हवा में रह सकता है। राफेल को हवा से जमीन और हवा से हवा में दोनों में हमला करने में प्रयोग किया जा सकता है। राफेल पर लगी गन एक मिनट में 125 फायर कर सकती है। यह हर मौसम में लंबी दूरी के खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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