योग विज्ञान संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह का भव्य शुभारंभ: 5 दशकों की समर्पित यात्रा का गौरवशाली उत्सव शुरू

बेंगलुरु: योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले एस-व्यासा योग विश्वविद्यालय के योग विज्ञान संस्थान प्राशांति कुटीरम ने अपनी स्वर्ण जयंती वर्षगांठ का भव्य शुभारंभ किया। पिछले 50 वर्षों से यह संस्थान योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति के क्षेत्र में कार्यरत है। इस विशेष समारोह में देश के प्रतिष्ठित योगाचार्य, विद्वान, चिकित्सक और योग प्रेमी उपस्थित रहे।

समारोह में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप जाधव, एस-व्यासा सोसायटी के अध्यक्ष एच.आर. नागेंद्र गुरुजी, एस-व्यासा विवि. के प्रो. चांसलर वी.आर. रामकृष्णा, वाइस चांसलर मंजुनाथ शर्मा जी, डॉ. रामचंद्र भट्ट, राघवेंद्र राव जी, रजिस्ट्रार शिवशंकर साईं जी और डॉ. आर. नागरत्ना जैसे गणमान्य अतिथि शामिल हुए।

Yoga Science Institute

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन और मंत्रोच्चार से हुई जो संस्थान की आध्यात्मिक परंपरा और भारतीय संस्कृति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संस्थान के प्रमुख योगाचार्यों ने प्राशांति कुटीरम की पिछली पांच दशकों की यात्रा, उपलब्धियों और आगामी योजनाओं पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर सुश्रुत आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के फैकल्टी और छात्रों को उनके अभियान के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि आयुष राज्य मंत्री प्रताप जाधव ने अपने संबोधन में एस-व्यासा योग विश्वविद्यालय और इसके संस्थापक एच.आर. नागेंद्र गुरुजी के योगदान की सराहना करते हुए कहा, "नासा से व्यासा, मेकैनिकल इंजीनियरिंग से मानव इंजीनियरिंग तक की यात्रा करने वाले पद्मश्री डॉ. नागेंद्र गुरुजी की कहानी प्रेरणादायक है। 1975 में अमेरिका से लौटने के बाद उन्होंने योग को सामाजिक रूप से प्रासंगिक विज्ञान बनाने के लिए इस संस्थान की नींव रखी। आज यह संस्थान आयुष, एकीकृत चिकित्सा और निवारक स्वास्थ्य देखभाल में एक अग्रणी केंद्र बन गया है।"

उन्होंने आयुष मंत्रालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि "हमने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में पाँच उपलब्धियां दर्ज करवाई हैं, जो भारत की आयुष पद्धति की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को विश्व की हेल्थ और वेलनेस राजधानी बनाने का हमारा संकल्प जारी रहेगा।"

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योग और प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व पर जोर

इस अवसर पर विभिन्न योग विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने योग और प्राकृतिक चिकित्सा की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति का साधन है। संस्थान के वरिष्ठ योगाचार्यों ने कहा कि "योग केवल शरीर की कसरत नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा है। प्राशांति कुटीरम ने आधी सदी तक इस परंपरा को जीवंत रखा है और भविष्य में इसे और अधिक व्यापक स्तर पर ले जाने का संकल्प लिया है।"

योग विज्ञान में संस्थान की ऐतिहासिक उपलब्धियां

मंत्री जी ने अपने संबोधन में यह भी कहा, "यह गौरव का विषय है कि एस-व्यासा विश्वविद्यालय का योग और प्राकृतिक चिकित्सा विद्यालय अब तक 500 से अधिक बीएनवाई डॉक्टरों को प्रशिक्षित कर चुका है, जो समाज की सेवा कर रहे हैं। 1985 में इस संस्थान ने ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में ब्रोंकियल अस्थमा के लिए योग पर पहला शोध पत्र प्रकाशित किया था। आज इसके पास 1000 से अधिक शोध प्रकाशन हैं, जो विश्व योग अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।"

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन

मंत्री जी ने इस समारोह में योग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन करते हुए कहा, "मुझे गर्व है कि मैं इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बन रहा हूँ। एस-व्यासा संस्थान पिछले पांच दशकों से योग अनुसंधान, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में अनवरत योगदान दे रहा है।"

संस्थान के संस्थापक एच.आर. नागेंद्र गुरुजी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आयुष पद्धति को आगे बढ़ाने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा: "आज जब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने अद्भुत प्रगति की है, ऐसे समय में स्वस्थ तन और मन के लिए योग और आयुर्वेद का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। हमारा संकल्प है कि 'हेल्थ फॉर ऑल' के लक्ष्य को प्राप्त करने में योग अपनी महती भूमिका निभाएगा।"

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समारोह के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. चांसलर वी.आर. रामकृष्णा ने किया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रताप जाधव की उपस्थिति को संस्थान के लिए गौरवशाली बताया और कहा कि यह दिन संस्थान के सभी पदाधिकारियों, शिक्षकों और छात्रों के लिए गर्व का अवसर है। हम सभी अपने गुरुओं और मंत्री जी के मार्गदर्शन में उन्नति के पथ पर अग्रसर रहेंगे।

स्वर्ण जयंती वर्ष में होंगे विशेष आयोजन

संस्थान ने घोषणा की कि इस स्वर्ण जयंती वर्ष के तहत पूरे वर्षभर कई योग कार्यशालाओं, सेमिनारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इनका उद्देश्य योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर प्रचारित करना और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ना है।

योग विज्ञान संस्थान प्राशांति कुटीरम, ने 50 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी कर ली है और इस अवसर पर स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया गया। यह संस्थान योग, प्राकृतिक चिकित्सा और आध्यात्मिक उत्थान के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भविष्य में भी यह अपनी शिक्षाओं और शोध कार्यों से पूरी दुनिया को लाभान्वित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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