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कर्मचारियों के जेबों की गर्मी बढ़ाकर सुस्त अर्थव्यवस्था में फुर्ती लाएगी सरकार!

बेंगलुरू। केंद्र की मोदी सरकार जल्द ही संसद में एक बिल पेश करने जा रही है, जिसे भारतीय अर्थव्यस्था में छाई सुस्ती में फुर्ती भरने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। संसद में पेश होने वाले बिल का मसौदा संगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों की टेक होम सैलरी, पीएफ अंशदान और ग्रैच्युटी में बढ़ाने को लेकर हैं।

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अगर यह बिल संसद में पास होता है तो पीएफ में प्रस्तावित बदलाव से वेतनभोगियों की टेक होम सैलरी में सीधे-सीधे इजाफा हो जाएगा, जिससे एक साथ करोड़ों कर्मचारियों की आय बढ़ने में उनकी क्रय शक्ति में इजाफा होगा, जिसे सुस्त बाजार में फुर्ती लाने के लिए एक जरूरी टूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

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माना जा रहा है सरकार यह कवायद अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती को दूर करने के लिए कर रही है, क्योंकि वेतनभोगियों की बढ़ी टेक होम सैलरी से उनकी क्रय शक्ति में इजाफा होगा, जिससे अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती को फुर्ती मिलेगी। ऐसा इसलिए संभव है, क्योंकि एक साथ करोड़ों लोगों की क्रय शक्ति में इजाफे से बाजार में रौनक लौटेगी और छुक-छुक कर चल रही अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी।

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श्रम और रोजगार मंत्रालय की तरफ से से पेश किए गए उक्त प्रस्ताव के अंतर्गत कर्मचारी भविष्य निधि में कर्मचारियों के अंशदान में कम हो जाएगी। मसलन, अगर आपकी बेसिक सैलरी 25000 रुपए प्रतिमाह है, तो 12 फीसदी के हिसाब से 3000 रुपए अंशदान की बजाय अब 6 फीसदी (अनुमान) यानी 1500 रुपए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को देना पड़ेगा।

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भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट और संभावित में मंदी के लिए शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आय का लगातार गिरावट है, जिससे तीन सेक्टर्स सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।लोगों की घटती आय को बढ़ाने के लिए सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को जाने वाले अंशदान करने का प्रस्ताव करके एक तीर से तीन निशाने साधे हैं।

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पहला, कर्मचारियों को अब पहले की तुलना में अधिक वेतन हासिल होगा, जिससे उनका आय बढ़ेगा। दूसरा, आय में वृद्धि होगी बचत और क्रय शक्ति में वृद्धि होगी। तीसरा, आय वृद्धि से बचत और उपभोग में प्रोत्साहन मिलेगा, जिसका सीधा लाभ उन सेक्टरों में मिलेगा जिनपर संभावित मंदी का सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है।

क्योंकि आय वृद्धि, क्रय शक्ति, बचत प्रोत्साहन से ऑटो सेक्टर, टेक्सटाइल सेक्टर और रियल एस्टेट इंडस्ट्री को सीधा फायदा होगा। क्योंकि हाथ में खर्च अधिक योग्य पैसे रहने पर आदमी निवेश करने के अधिक विकल्पों की तलाश कर सकता है।

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ऐसा माना जाता है कि आय वृद्धि बचत प्रोत्साहन को जन्म देती है और बचत क्रय शक्ति में इजाफा करती है और कर्मचारी अपनी अतिरिक्त राशि को विभिन्न तरीकों से निवेश अथवा उपभोग में खर्च कर सकते हैं, जो पूरी तरह से लोगों की क्रय शक्ति और बचत प्रोत्साहन से जमा पैसों पर निर्भर होते हैं।

संसद में प्रस्तावित बिल में सरकार ने कर्मचारियों की ग्रैच्युटी में भी बड़े बदलाव के संकेत दिए है। सरकार कर्मचारियों को ग्रैच्युटी का लाभ 5 वर्ष बाद देने के बजाय अब 1 वर्ष बाद ही देने की योजना बनाई है, जिससे कर्मचारियों की लिक्विड मनी में इजाफा होगा। यही नहीं, श्रम मंत्रालय ने एक सोशल सिक्युरिटी कोड विधेयक 2019 भी तैयार किया है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है।

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गौरतलब है बिल इसी हफ्ते लोकसभा में पेश किया जाना है। इस बिल में केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कर्मचारियों के पीएफ अंशदान में 2 फीसदी कटौती करने का प्रस्ताव किया है। अभी कर्मचारियों की सीटीसी (कास्ट टू कंपनी) का 12 फीसदी कर्मचारी और उसके नियोक्ता द्वारा पीएफ एकाउंट में जमा किया जाता है।

लेकिन बिल में श्रम मंत्रालय ने कर्मचारी और नियोक्ता पीएफ अंशदान को 12 फीसदी से घटाकर 6 से 10 फीसदी कर दिया है, जिससे कर्मचारियों का मासिक वेतन बढ़ जाएगा। संसद में बिल पास होने के बाद वर्तमान सीटीसी (कॉस्ट टू कंपनी) पर ही कर्मचारियों का मासिक वेतन बढ़ जाएगा।

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प्रस्तावित बिल में बदलाव से कर्मचारियों की टेक होम सैलरी में वृद्धि तो होगी ही, लेकिन अब 10 से अधिक कर्मचारियों वाले नियोक्ता को अपने कर्मचारियों को स्वास्थ्य, पेंशन और अन्य सुविधाएं भी देना होगा। इसके अलावा बिल में यह भी प्रस्ताव किया गया है कि फिक्सड टर्म में काम करने वाले कर्मचारियों को नियोक्ता द्वारा ग्रैच्युटी लाभ दिया जाएगा। अनुमान किया जा रहा है कि सरकार ग्रैच्युटी के लिए निर्धारित समय को एक साल कर सकती है।

दरअसल, वर्तमान समय में ग्रेच्युटी की रकम के लिए किसी भी कर्मचारी को एक कंपनी में 5 साल तक काम करना जरूरी है, लेकिन अब सरकार ने मौजूदा अवधि को घटाकर 1 वर्ष कर सकती है। यानी अगर कोई कर्मचारी एक साल बाद भी अपनी नियोक्ता कंपनी को छोड़ देता है, तो उसे भी ग्रैच्युटी की रकम मिलेगी। कहा जा रहा है कि इसका सबसे ज्यादा फायदा प्राइवेट नौकरी करने वालों को मिलेगा।

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कंपनी के द्वारा कर्मचारियों को दिया जाने वाला अतिरिक्त लाभ ग्रेच्युटी प्रायः कंपनी में पांच साल तक काम करने पर ही मिलता है। यह कर्मचारी की मौत होने जैसी कुछ अन्य स्थिति में भी कंपनी द्वारा दिया जाता है। ग्रैच्युटी के तौर पर कर्मचारियों को मिलने वाली मोटी रकम कर्मचारी के वेतन और उसकी सेवा की अवधि के आधार पर तय की जाती है।

श्रम मंत्रालय ने प्रस्तावित बिल में ईपीएफ एंड एमपी एक्ट 1952 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिस पर आम लोगों की भी राय मांगी गई थी। 22 सितंबर 2019 तक आम जनता से इसको लेकर के सुझाव मांगे गए थे। इस बिल में एक दिलचस्प प्रावधान यह किया गया है कि अब घरों में साफ-सफाई और खाना बनाने का काम करने वाले व ड्राइवरों को भी पीएफ योजना का लाभ मिलेगा।

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श्रम मंत्रालय जल्द ही कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े कानून में बदलाव करने के लिए प्रस्ताव को तैयार कर रहा है। इस कानून में संशोधन के बाद इसको पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। क्योंकि अभी जो व्यवस्था है उसके हिसाब से कंपनियों व सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों को ही पीएफ योजना का लाभ मिलता है।

इसके दायरे में अन्य लोग जैसे कि स्व-रोजगार करने वाले लोग शामिल नहीं होते हैं। इसके अलावा मंत्रालय ने एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन और एंप्लॉयीज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन की मौजूदा स्वायत्तता को बरकरार रखने का भी फैसला किया है, जबकि पहले उसने इन्हें कॉर्पोरेट जैसी शक्ल देने का प्रस्ताव दिया था।

यह भी पढ़ें- आर्थिक मंदी पर बोले रघुराम राजन- गंभीर संकट की ओर बढ़ रही है देश की अर्थव्यवस्था

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