गड़बड़ ही गड़बड़ ललित कला अकादमी में, सरकार देखेगी कामकाज
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) गड़बड़ी और निकम्मेपन का पर्याय बन गई ललित कला अकादमी के कामकाज को अब केन्द्र सरकार का संस्कृति विभाग देखेगा। जानकारों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से संस्कृति मंत्रालय को ललित कला अकादमी में कथित प्रशासकीय एवं वित्तीय अनियमितताओं के बारे में शिकायतें मिलती रही थीं।

आपस में भिड़ते अफसर
कुछ खास मुकदमों के कारण वर्ष 2013 से ललित कला अकादमी की सामान्य परिषद एवं कार्यकारी बोर्ड भी कार्यरत नहीं हैं। यही नहीं, ललित कला अकादमी के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी यानी सचिव फिलहाल निलंबित हैं और अकादमी के अध्यक्ष ने उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिये हैं। ललित कला अकादमी की गिनती भी मंत्रालय के स्वायत्तता प्राप्त संगठनों में होती रही है।
प्रबंधन अपने हाथ
जानकारी के अनुसार,ललित कला अकादमी के मुश्किलों से घिरे प्रशासन और अकादमी के गतिशील एवं पारदर्शी कामकाज में आम जनता के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने बीती 1 अप्रैल से अकादमी का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के लिए संस्कृति मंत्रालय के जरिये अकादमी की कार्य शर्तों के संबंधित प्रावधानों का इस्तेमाल किया है।
फिलहाल संस्कृति मंत्रालय में अपर सचिव श्री के.के. मित्तल को ललित कला अकादमी का प्रशासक नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। वे आईएएस अफसर हैं। वरिष्ठ कथाकार प्रताप सहगल ने कहा कि सरकार ने यह बहुत उत्तम काम किया है। ललित कला अकादमी अपने काम से भटक गई थी। यहां के अफसर कोई काम करके राजी नहीं थे।












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