अब मुस्लिम-सिख सर्किट विकसित होगा ताकि पर्यटक आयें
नई दिल्ली( विवेक शुक्ला) अब बौद्ध सर्किट की तर्ज पर सरकार मुस्लिम तथा सिख सर्किट को विकसित करने जा रही है। इसका मकसद इन धर्मों से जुड़े धार्मिक स्थानों पर तीर्थयात्रियों और दूसरे पयर्टकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होगा।
इसके अलावा इधर रेल-सड़क मार्गों को सुगम और बेहतर बनाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इधर पहुंच सके। कोशिश रहेगी इधर सब जगह जाने के लिए अलग से रेल भी शुरू कर दी जाए।
टुरिज्म मिनिस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि मुस्लिम सर्किट में राजधानी के निजामउद्दीन औलिया-अजमेर शरीफ से लेकर जम्मू-कश्मीर के चरारे- शरीफ को रखा गया है। कहने की जरूरत नहीं है कि ये सभी बेहद खासमखास तीर्थस्थल हैं। इनमें हर रोज हजारों लोग पहुंचते हैं। इनमें आम से लेकर खास सभी होते हैं।
उधर, सिख सर्किट में पटना साहिब,हरमिंदर साहिब,हेमकुंड साहिब और नांदेड़ साहिब गुरुद्वारे को रखा गया है। ये सभी गुरुद्वारे एतिहासिक होने के साथ-साथ सिखों की आस्था से जुड़े हैं। राजधानी के गांधीनगर गुरुद्वारे के प्रमुख के.एस.गुजराल ने कहा कि सरकार का यह कदम बेहद अहम है। इसके चलते सिखों को इनमें एक साथ दर्शन करने का मौका मिल जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि सरकार कृष्ण सर्किट को भी विकसित करना चाहती है। इसमें मधुरा तथा वृंदावन क्षेत्र का पर्याप्त विकास करना शामिल है। अब इसमें दवारका तथा कुरुक्षेत्र को भी शामिल किया जा रहा है।
बता दें कि कुछ साल पहले सरकार ने बौद्ध सर्किट को विकसित किया था। इसके चलते इसमें तीर्थ यात्रियों की संख्या खासी बढ़ गई। इस सर्किट में बोधगया, राजगीर, नालंदा, सारनाथ, कुशीनगर, लुंबिनी, श्रावस्ती और आगरा शामिल हैं।
जानकारों का कहना है कि सरकार की चाहत है कि इसी क्रम में आने वाले कुछ और भी सर्किट शामिल किए जाएं। इनमें एक गांधी सर्किट हो सकता है। इसमें उन जगहों को शामिल किया जा सकता है जो बापू के जीवन से जुड़े रहे।













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