क्या कोविडशील्ड की डोज का अंतर कम होने वाला है? कोविड पैनल चीफ ने दिया जवाब
सरकारी सूत्रों ने बताया कि कोविशील्ड के लिए 84 दिनों की खुराक के अंतर की समीक्षा की जा रही है और इसे कम किया जा सकता है।
नई दिल्ली, 26 अगस्त। मीडिया रिपोर्ट्स में सरकारी सूत्रों ने बताया कि कोविशील्ड के लिए 84 दिनों की खुराक के अंतर की समीक्षा की जा रही है और इसे कम किया जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि कोविशील्ड की दो खुराक के बीच अंतर को कम करने पर विचार किया जा रहा है और एनटीजीआई (प्रतिरक्षण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह) में इस पर आगे चर्चा की जाएगी।
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वहीं, इसके जवाब में प्रतिरक्षण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) के प्रमुख डॉ. अरोरा ने कहा कि, 'टीके की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए प्रोग्रामेटिक डेटा संग्रह प्रक्रियाएं जारी हैं। एनटीएजीआई नियमित आधार पर वैक्सीन प्रभावशीलता डेटा की समीक्षा कर रहा है। वर्तमान में, कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पूतनिक वी के लिए खुराक अंतराल में बदलाव का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।'
बता दें कि कि जनवरी में कोविशील्ड और एस्ट्राजेनेका के लिए डोज के बीच का अंतर 4 से 6 सप्ताह का था, जिसे बाद में बढ़ाकर 6 से 8 सप्ताह कर दिया गया। मई में ब्रिटेन के से प्राप्त हुए साक्ष्यों के आधार पर इस अंतर को बढ़ाकर 12-16 सप्ताह कर दिया गया। हालांकि कोवैक्सिन के लिए डोज के बीच अंतर में कोई बदलाव नहीं किया गया। जब कोरोना की दूसरी लहर चरम पर थी तो सरकार के इस फैसले पर सवाल उठे, कई लोग इसे टीकों की भारी कमी से भी जोड़ रहे थे। इस विवाद को उस समय अधिक बल मिला जब एनटीजीआई के कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि सरकार का निर्णय एकमत नहीं था और उन्होंने डोज के अंतर को दोगुना करने का विरोध किया था। लेकिन सरकार ने ऐसे आरोपों को खारिज कर दिया। वहीं पैनल के प्रमुख एनके अरोड़ा ने कहा कि सरकार का निर्णय अध्ययनों पर आधारित था कि जितना लंबा अंतराल होगा उतनी ही अधिक एंटीबॉडी बनेंगी और इससे कोरोना से ज्यादा सुरक्षा मिलेगी।
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हालांकि इस महीने की शुरुआत में डॉ. अरोरा ने कहा कि 45 या इससे अधिक उम्र के लोगों के लिए खुराक के अंतर को कम किया जा सकता है। दुनिया भर में अब कई अध्ययनों से पता चलता है कि कोविशील्ड के पहले शॉट की क्षमता उतनी अधिक नहीं हो सकती जितनी पहले माना जाता था। इसका मतलब है कि कोरोना से बेहतर सुरक्षा के लिए कोविशील्ड की दूसरी खुराक को जल्द दिया जाना चाहिए। एक तरफ जहां भारत में डोज के अंतर को बढ़ाया गया वहीं, यूके जैसे देशों में कोरोना से निपटने के लिए इसके अंतर को कम कर दिया गया।












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