वॉर मेमोरियल बन नहीं पा रहा और हो गया एक और स्मारक का ऐलान
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला,ऋचा बाजपेई) अभी राजधानी में विभिन्न युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में बनने वाले शहीद स्मारक के निर्माण में तमाम अवरोध आ रहे है।

उधर आज गृह राज्य मंत्री श्री किरण रिजिजू ने पोर्ट ब्लेयर में कहा कि केंद्र सरकार, नई दिल्ली में स्वतंत्रता संग्राम शहीदों के एक स्मारक का निर्माण करने की तैयारी कर रही है और सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी राजधानियों में भी ऐसे ही स्मारक बनाने के लिए पत्र भेज रही है।
100 करोड़ रुपए का बजट
हालांकि राजधानी में शहीद स्मारक का निर्माण करने की सरकार घोषणा कर चुकी है और उसके लिए बजट में 100 करोड़ रुपए भी रखे हैं, पर उसके निर्माण में तमाम अवरोध आ रहे हैं।
जिस इंडिया गेट के पास प्रिंसिस पार्क में शहीद स्मारक का निर्माण करने का फैसला हुआ है, वहां पर काफी संख्या में लोग सपिरवार रहते हैं।
उन्हें वहां से हटाना और उन्हें फिर बसाना कोई आसान काम नहीं है। रक्षा मामलों के जानकार पुष्परंजन कहते हैं कि हमारे करके नेता सोचते हैं कि घोषणा करके काम हो गया । उनके पास कोई नीति या कार्यक्रम को लागू करने का कोई प्लान नहीं होता।
क्या कहते हैं रक्षा अधिकारी
दिल्ली के जिस प्रिंसेस पार्क में वॉर मेमोरियल बनाने की बात सरकार कर रही है वहां पर करीब 300 परिवार रहते हैं। यह सभी परिवार आज से नहीं बल्कि पिछले 50 वर्षों से यहां पर हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर वॉर मेमोरियल बनता है तो फिर यह परिवार कहां जाएंगे।
जहां तक यहां रहने वाले लोगों की बात है तो उनका कहना है कि वह इस जगह को खाली कर देंगे लेकिन तभी जब सरकार उन्हें बुनियादी सुविधाओं से लैस अच्छे घर मुहैया कराएगी।
इस बारे में जब हमने भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल प्रकाश दुबे की राय जानने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि इतना तो तय है कि अगर सरकार ने वॉर मेमोरियल का ऐलान किया है तो फिर उसके पास जरूर
कोई न कोई योजना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने जरूर कोई न कोई योजना तैयार की होगी जिसके तहत यहां के परिवारों को कहीं और बसाया जाएगा। थोड़ा इंतजार करना होगा।
लेकिन साथ ही वह इस बात से भी इंकार नहीं करते हैं कि वॉर मेमोरियल तभी अस्तित्व में आना चाहिए जब सारे लोग संतुष्ट हों। किसी को नाखुश करके यह कदम नहीं उठाना चाहिए।
एक और स्मारक
इसबीच, किरण रिजिजू ने पोर्ट ब्लेयर में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्मारक निर्माण पर जोर देते हुए पहले ही एक पत्र संस्कृति मंत्रालय को भेजा है।
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की राजधानी में प्रसिद्ध स्वतंत्रता सैनानियों की नव गठित समिति की पहली बैठक को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सैनानियों के कल्याण के लिए केंद्र हर संभव कदम उठाएगा।
सरकार, आपात स्थिति में केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के साथ असंबद्ध अस्पतालों सहित निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे स्वतंत्रता सैनानियों का चिकित्सा खर्च अदा करने के लिए सहमत है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि खर्च की अदायगी सीजीएचएस की दरों के अनुरूप की जाएगी और इलाज के पूरे खर्च की अदायगी की मांग की स्थिति में सीजीएचएस तकनीकी स्थायी समिति द्वारा जांच कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष वयोवृद्ध स्वतंत्रता सैनानियों और उनकी पारिवारिक पेंशन में पहली बार महंगाई राहत को बढ़ाया गया है।
पहले से ही है एक विश्राम गृह
गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव और प्रसिद्ध स्वतंत्रता सैनानियों की समिति के सदस्य सचिव श्री के के पाठक ने कहा कि दिल्ली में वयोवृद्ध सैनानियों के लिए रास्ते में ठहरने के लिए विश्राम गृह का निर्माण किया गया है, जहां पर वे 15 दिन तक नि:शुल्क ठहर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्राम गृह में मरम्मत कराई जा रही है और आधुनिक सुविधाओं के साजो-सामान लगाए जा रहे हैं।
रेलवे को स्वतंत्रता सैनानियों को सबसे नीचे की बर्थ देने में प्राथमिकता देने को कहा गया है और 7वां वेतन आयोग उनके मासिक मानदेय और पारिवारिक पेंशन बढ़ाने की मांग पर विचार करेगा।
वयोवृद्ध सैनानियों की समिति में पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़़, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब और आंध्र प्रदेश से 8 प्रतिनिधि शामिल हैं।
समिति का कार्यकाल 2 वर्ष का है और बारी बारी से सभी राज्यों को इसमें प्रतिनिधित्व का अवसर दिया जाएगा। आमतौर पर समिति की बैठक वर्ष में दो बार होती है।












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