सर्दियों में बंद कमरे में सोना जानलेवा हो सकता है

Posted By: BBC Hindi
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ब्लोअर, रूम हीटर, कोयला, लकड़ी, सर्दी, दम घुटना
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सारा काम निपटाकर जब वो कैटरिंग वैन में सोने गए तो अपने साथ तंदूर भी लेते गए. वैन का दरवाज़ा शायद यही सोचकर बंद किया होगा कि अंदर गर्माहट बनी रहे और वो चैन से सो सकें लेकिन...

पुलिस के अनुसार, अगली सुबह जब वैन का दरवाज़ा खोला गया तो दम घुटने से 6 लोगों की मौत हो चुकी थी.

दिल्ली के कैंट इलाक़े की इस दुर्घटना जैसे कई मामले पहले भी आ चुके हैं.

सर्दियों में ज़्यादातर घरों, दुकानों में गर्माहट के लिए ब्लोअर, हीटर या कोयले का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन क्या ये सुरक्षित तरीके हैं?

क्या कहते हैं डॉक्टर ?

आईएमए के डॉक्टर के के अग्रवाल का कहना है कि सबसे ज़रूरी है वेंटिलेशन. जहां वेटिंलेशन नहीं है, वहां ख़तरा है.

अगर आप गर्माहट के लिए कोयला जला रहे हैं या फिर लकड़ी, तो इससे निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस दम घोंट सकती है. ख़ासतौर पर तब जब वेंटिलेशन का कोई प्रबंध नहीं है.

ब्लोअर, रूम हीटर, कोयला, लकड़ी, सर्दी, दम घुटना
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यहां तक कि अगर आप किसी कार में भी सिर्फ़ इंजन चलाकर बैठ जाएं तो भी दम घुट सकता है.

डॉक्टर अग्रवाल के अनुसार, ये बात मायने नहीं रखती कि कौन-सा साधन कम नुकसानदेह और कौन ज़्यादा. बात सिर्फ़ इतनी है कि जिस जगह आप इन साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं वहां वेंटिलेशन की व्यवस्था है या नहीं.

त्वचा विशेषज्ञ डॉक्टर अमित लुथरा के अनुसार, बहुत देर तक ब्लोअर, हीटर या फिर आग के सामने बैठने से ड्राईनेस की प्रॉब्लम हो सकती है. ख़ासतौर पर बुजुर्गों को.

इसके अलावा डैंड्रफ़ की परेशानी भी हो सकती है या बढ़ सकती है. बहुत देर तक इन उपकरणों के संपर्क में रहने से त्वचा की कुदरती नमी प्रभावित होती है.

कार्बन मोनो ऑक्साइड कैसे डालती है असर?

डॉक्टर संचयन रॉय के अनुसार, कार्बन मोनोऑक्साइड एक ज़हरीली गैस है. ऐसी किसी जगह पर जहां कोयला या लकड़ी जल रही हो और वेंटिलेशन का कोई माध्यम न हो तो सांस लेने के दौरान हम कार्बन मोनोऑक्साइड और ऑक्सीजन दोनों अंदर लेते हैं.

कार्बन मोनोऑक्साइड हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन में बदल जाता है.

दरअसल, खून में मौजूद आरबीसी, ऑक्सीजन की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड से पहले जुड़ती है. अगर आप किसी ऐसी जगह पर हैं जहां ऑक्सीजन की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड बहुत अधिक है तो धीरे-धीरे खून में ऑक्सीजन की जगह कार्बन मोनोऑक्साइड आ जाती है.

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इससे शरीर के कई अहम अंगों को ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है. इससे हाईपोक्सिया की स्थिति बन जाती है जिससे ऊतक (टिशू) नष्ट होने लगते हैं और मौत की आशंका बढ़ जाती है.

क्या होते हैं शुरुआती लक्षण:

यह जानना बहुत ज़रूरी है कि आप जिस माहौल में सांस ले रहे हैं वहां की हवा कहीं ज़हरीली तो नहीं. अगर आप किसी ऐसी जगह हैं जहां कार्बन मोनोऑक्साइड का प्रतिशत अधिक है तो सिर दर्द, चक्कर आना, उल्टी महसूस होना जैसे लक्षण नज़र आएंगे.

इसके अलावा सांस लेने में तक़लीफ आंखों में जलन की भी शिकायत हो सकती है.

क्या हैं बचाव के उपाय:

अगर आप इनमें से किसी भी साधन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वेंटिलेशन का ख़ास ख्याल रखें. बंद कमरे में कोयला या लकड़ी जलाने से परहेज़ करें. अगर आप हीटर या फिर ब्लोअर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो भी सावधानी रखें. बहुत अधिक इस्तेमाल ख़तरनाक हो सकता है.

डॉक्टर के के अग्रवाल का कहना है कि संभव है कि वैन का दरवाज़ा खुला होता तो तंदूर रखकर सो रहे लोगों की जान बच सकती थी.

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English summary
Gold in the closed room in winter can be deadly
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