Glass Bridge: SpaDeX मिशन बाद एक और New Year गिफ्ट, भारत के पहले ग्लास ब्रिज का उद्घाटन
Glass Bridge: नववर्ष 2025 की पूर्व संध्या से पहले समुद्र के ऊपर कन्याकुमारी में बने भारत का ग्लास ब्रिज देश को समर्पित कर दिया गया। यह ब्रिज वास्तुकला ओर अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना है, जिसे विवेकानन्द रॉक मेमोरियल और तिरुवल्लुवर प्रतिमा के बीच बना है। ब्रिज का निर्माण तमिलनाडु सरकार ने कराया, जिसका उद्घाटन सीएम एमके स्टालिन ने नए वर्ष की शुरुआत से ठीक पहले मंगलवार को किया।
कन्याकुमारी में ग्लास ब्रिज का निर्माण कन्नियाकुमारी में पर्यटन को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। समुद्र में बना यह ब्रिज दो ऐतिहासिक स्मारकों को जोड़कर तमिलनाडु की विरासत और अधिक समृद्ध बनाता है। प्रोजेक्ट तमिलनाडु सरकार की 37 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के तहत निर्मित किया गया। सोमवार को इसका (Glass Bridge) उद्घाटन सोमवार शाम को किया गया।

भारत के पहले ग्लास ब्रिज का उद्घाटन किया। समुद्र में बना यह ब्रिज दो ऐतिहासिक स्मारकों को जोड़कर तमिलनाडु की विरासत और अधिक समृद्ध बनाता है। ब्रिज का लोकार्पण तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने किया। इस मौके पर डीएमके सांसद कनिमोझी और डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन समेत अन्य कई राजनीतिक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समुद्र में बना यह ब्रिज दो ऐतिहासिक स्मारकों को जोड़कर तमिलनाडु की विरासत और अधिक समृद्ध बनाता है। ब्रिज का लोकार्पण तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने किया। इस मौके पर डीएमके सांसद कनिमोझी और डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन समेत अन्य कई राजनीतिक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
तिरुवल्लुवर प्रतिमा की 25वीं वर्षगांठ, नववर्ष पर गिफ्ट
इस पुल का उद्घाटन तिरुवल्लुवर प्रतिमा की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर किया गया। इस प्रतिमा को साल 2000 में पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने स्थापित किया था। समु्द्र पर बना यह पुल देश का पहला कांच का पुल है। जिसकी लंबाई 77 मीटर और 10 चौड़ाई मीटर है। ग्लास ब्रिज से विवेकानंद स्मारक और तिरुवल्लुवर प्रतिमा के देखने के साथ सूर्योदय और सूर्यास्त का भी दर्शन एक ही पुल से किया किया जा सकेगा।
SpaDeX Mission: ISRO का नए साल से पहले बड़ा धमाका
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को साल 2024 में एक और बड़ी सफलता हाथ लगी। 30 दिसंबर को इसरो ने अपने नए मिशन 'स्पेडेक्स' को सफलता पूर्वक लॉन्च कर दिया। स्पेडेक्स मिशन को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारतीय समयानुसार रात करीब दस बजे लांच किया गया। गौरतलब है स्पैडेक्स का अर्थ होता है 'स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट' यानी अंतरिक्ष में यानों को 'डॉक' और 'अनडॉक' करना। दरअसल, इस मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष यानों को 'डॉक' और 'अनडॉक' करने के लिए तकनीकी का विकास करना है।












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