Gig Workers: साल में 90 दिन काम किया तो मिलेगा फायदा!गिग वर्कर्स के लिए सरकार का प्लान समझिए, क्या है नियम?
Gig Workers 90-day work: भारत में तेजी से बढ़ रहे गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए केंद्र सरकार एक अहम बदलाव की तैयारी में है। अगर आप डिलीवरी बॉय हैं, कैब ड्राइवर हैं या किसी ऐप आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए काम करते हैं, तो यह खबर सीधे आपके भविष्य से जुड़ी है। सरकार ने ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनके तहत साल में तय न्यूनतम दिनों तक काम करने पर ही सोशल सिक्योरिटी के लाभ मिलेंगे। सवाल यही है कि ये 90 दिन वाला नियम क्या है और इसका असर किस पर पड़ेगा।
गिग वर्कर्स के लिए क्या नया प्रस्ताव लाई सरकार (Gig Workers Social Security)
केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने 30 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिन्हें लेकर आम लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। इन नियमों के मुताबिक, किसी एक एग्रीगेटर यानी प्लेटफॉर्म के साथ वित्त वर्ष में कम से कम 90 दिन काम करने वाले गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ही केंद्र सरकार की सोशल सिक्योरिटी योजनाओं के पात्र होंगे।

अगर कोई वर्कर एक से ज्यादा एग्रीगेटर के साथ काम करता है, तो उसके लिए यह सीमा 120 दिन रखी गई है। यानी अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को कुल मिलाकर ज्यादा दिन सक्रिय रहना होगा।
'काम का दिन' कैसे गिना जाएगा (90 days work rule)
ड्राफ्ट नियमों में यह भी साफ किया गया है कि किसी दिन को काम का दिन कब माना जाएगा। नियम कहता है कि अगर किसी गिग या प्लेटफॉर्म वर्कर ने किसी एग्रीगेटर के लिए एक दिन में थोड़ा भी काम किया और उससे कोई भी कमाई हुई, तो वह पूरा दिन काम का दिन माना जाएगा। कमाई कितनी हुई, यह मायने नहीं रखता। बस इतना जरूरी है कि उस दिन प्लेटफॉर्म से जुड़े काम से आय हुई हो।
एक दिन में तीन प्लेटफॉर्म पर काम, तो गिनती कैसे होगी
सरकार ने इस बिंदु पर भी स्थिति साफ कर दी है। अगर कोई गिग वर्कर एक ही दिन में तीन अलग-अलग एग्रीगेटर के लिए काम करता है, तो उसे तीन दिन की एंगेजमेंट माना जाएगा। यानी हर प्लेटफॉर्म के लिए काम का दिन अलग-अलग गिना जाएगा। यह प्रावधान उन वर्कर्स के लिए राहत वाला माना जा रहा है, जो एक से ज्यादा ऐप या कंपनी के जरिए रोजाना काम करते हैं।
कौन-कौन आएगा नियमों के दायरे में?
ड्राफ्ट के अनुसार, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर सिर्फ वही नहीं होंगे जो सीधे किसी एग्रीगेटर से जुड़े हों। इसमें वे लोग भी शामिल होंगे जो किसी सहयोगी कंपनी, होल्डिंग कंपनी, सब्सिडियरी, एलएलपी या किसी थर्ड पार्टी के जरिए प्लेटफॉर्म के लिए काम कर रहे हैं। यानी काम का तरीका चाहे जो हो, अगर आप प्लेटफॉर्म इकोनॉमी का हिस्सा हैं, तो ये नियम आप पर लागू हो सकते हैं।
हड़ताल से ठीक पहले क्यों आया नोटिफिकेशन
दिलचस्प बात यह है कि यह नोटिफिकेशन नए साल की पूर्व संध्या पर होने वाली गिग वर्कर्स की हड़ताल से ठीक एक दिन पहले जारी किया गया। हड़ताल में वर्कर्स बेहतर भुगतान और काम की शर्तों में सुधार की मांग कर रहे थे। ऐसे में सरकार का यह कदम काफी मायने रखता है और माना जा रहा है कि इससे गिग सेक्टर में चल रही बहस और तेज होगी।
रजिस्ट्रेशन और डिजिटल आईडी होगी अनिवार्य
ड्राफ्ट नियमों में असंगठित क्षेत्र के सभी पात्र वर्कर्स के लिए केंद्र सरकार के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बताया गया है। रजिस्ट्रेशन के बाद हर वर्कर को एक डिजिटल पहचान पत्र मिलेगा, जिसमें उसकी फोटो और अन्य जरूरी जानकारियां होंगी। श्रम मंत्रालय पहले ही ई-श्रम पोर्टल के जरिए यह प्रक्रिया शुरू कर चुका है, जो असंगठित कामगारों का राष्ट्रीय डेटाबेस है।
जानकारी अपडेट नहीं की तो लाभ से बाहर हो सकते हैं
नियमों में यह भी चेतावनी दी गई है कि रजिस्टर्ड वर्कर्स को समय-समय पर अपनी जानकारी अपडेट करनी होगी। इसमें पता, काम का प्रकार, मोबाइल नंबर, स्किल और अन्य विवरण शामिल हैं।
अगर कोई वर्कर अपनी जानकारी अपडेट नहीं करता, तो उसे सोशल सिक्योरिटी योजनाओं के लिए अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है।
कुल मिलाकर गिग वर्कर्स के लिए क्या मायने
सरकार का यह प्रस्ताव एक तरफ गिग वर्कर्स को पहचान और सुरक्षा देने की दिशा में कदम माना जा रहा है, तो दूसरी तरफ न्यूनतम दिनों की शर्त कई लोगों के लिए चुनौती भी बन सकती है। अब सबकी नजर इस पर है कि पब्लिक कमेंट के बाद इन नियमों में क्या बदलाव होते हैं और अंतिम रूप में यह योजना कैसी दिखाई देती है। एक बात तय है, 90 दिन का यह नियम गिग इकॉनमी की तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है।












Click it and Unblock the Notifications