UCC लागू करना अनुच्छेद-370 निरस्त करने जितना आसान नहीं: गुलाम नबी आजाद
यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर गैर बीजेपी दलों के अलग-अलग मत सामने आए हैं। इसी बीच गुलाम नबी आजाद ने केंद्र सरकार को आगाह किया है कि इसे लागू करने का ख्याल मन में न लाएं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री व डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने शनिवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) मसले पर केंद्र सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि इसे लागू करने का ख्याल केंद्र सरकार जहन से निकाल दे। यूसीसी को लागू करने का सवाल ही नहीं उठता है। यह अनुच्छेद-370 को निरस्त करने जितना आसान नहीं है।
गुलाम नबी आजाद ने आगे यह भी कहा कि अगर यूसीसी लागू हो गया तो सिर्फ मुसलमान ही नहीं, बल्कि सिख, ईसाई, आदिवासी, जैन और पारसी किसी के लिए भी अच्छा नहीं होगा। किसी भी धर्म को नाराज करना सरकार के लिए भी अच्छा नहीं होगा। इसका असर सभी धर्मों पर पड़ेगा।

क्या है यूसीसी?
दरअसल, यूनिफॉर्म सिविल कोड, भारत में रहने वाले सभी नागरिकों पर एक समान होने वाला कानून लागू होगा। इसके तहत एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि इसका अर्थ है एक देश एक नियम।
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर अलग-अलग मत
यूसीसी पर सभी राजनीतिक दलों के अलग-अलग मत अब तक सामने आए हैं। आम आदमी पार्टी(आप) में मतभेद देखने को मिला है। दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने समर्थन दिया है। वहीं, पंजाब में भगवंत मान खिलाफ रहे। वहीं, बसपा सुप्रीमों मायावती ने भी कहा है कि इसका विरोध नहीं है। लेकिन, बीजेपी का तरीका गलत है। उधर, कांग्रेस ने कहा कि सबकी सहमति जरूरी है।












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