वाराणसी पहुंचे जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वॉल्टर, शाम को गंगा आरती में करेंगे शिरकत
भारत और जर्मनी के संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक और पहल के तहत जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर वाराणसी पहुंच गए हैं। यहां वाराणसी के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों ने एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया।
वाराणसी। भारत और जर्मनी के संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक और पहल के तहत जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर वाराणसी पहुंच गए हैं। यहां वाराणसी के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों ने एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया। वाराणसी उतरने के बाद जर्मन राष्ट्रपति अब सारनाथ के लिए रवाना हो गए हैं। जर्मनी के राष्ट्रपति को सड़क मार्ग से सारनाथ जाएंगे, फिर काशी हिंदू विश्वविद्यालय और फिर यहां से अस्सी घाट जाएंगे। शाम को राष्ट्रपति वॉल्टर दशाश्वमेध घाट पर होने वाली नियमित गंगा आरती में हिस्सा लेंगे। आरती के बाद राष्ट्रपति सड़क मार्ग से ही बाबतपुर एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे और फिर यहां से दिल्ली चले के लिए रवाना हो जाएंगे।

राष्ट्रपति ने किए भगवान बुद्ध के किए दर्शन
जर्मनी के राष्ट्रपति के स्वागत के लिए देश के कोने-कोने से लोग और संस्कृति की झलक दिखाने के लिए कलाकारों का जुटान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हुआ है। जर्मनी के राष्ट्रपति को वाराणसी में सात घंटे रहना है और हर जगह पर उन्हें सड़क मार्ग से ही जाना है। इसलिए जिन रास्तों से जर्मनी के राष्ट्रपति को गुजारना है उन रास्तों पर सड़क के दोनों छोर पर हाथों में भारत और जर्मनी के झंडे के अलावा 10,000 से ज्यादा स्कूली बच्चे उनके स्वागत के लिए मौजूद रहेंगे। इसके अलावा सड़क पर लोग और संस्कृति की झलक दिखाने के लिए यूपी, बंगाल, बिहार, राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित कई अन्य जगहों से कलाकार जुटे हैं और ये कलाकार अपने राज्य की कला और संस्कृति के पेश करेंगे। महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया के वाराणसी के सेकेट्री भंते मेदानकर ने बताया कि जर्मनी के राष्ट्रपति ने भगवान बुद्ध के दर्शन के दौरान अपना देश सुचारू रूप से चलाने के लिए भगवान के अस्थियों का दर्शन करके आशीर्वाद मांगा हैं। यहाँ के धर्म के अनुसार सभी भंते(पुजारी) मिलकर सभी देशों की शांति के लिए पूजा करते हैं। जर्मन राष्ट्रपति वॉल्टर को सोसायटी की ओर से भगवान बुद्ध की एक प्रतिमा तोहफे में दी गई है।












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