जीडीपी आंकड़ों के एक तीर से विपक्ष के कई हमलों का जवाब देगी सरकार

जीडीपी आंकड़ों के एक तीर से विपक्ष के कई हमलों का जवाब देगी सरकार

नई दिल्ली। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 8.2 प्रतिशत रहा है। यह पिछले 2 सालों में सबसे ज्यादा विकास दर है। शुक्रवार को जारी जीडीपी के आंकड़ों के मुताबिक, मैन्यूफैक्चरिंग और फार्म सेक्टर में अच्छी प्रगति हुई है। बीते कुछ दिनों से मोदी सरकार अर्थव्यवस्था के मामलों में विपक्ष के तीखे हमले झेल रही है। खासतौर से नोटबंदी पर आरबीआई की रिपोर्ट, पेट्रोल डीजल के दामों और रुपए में गिरावट को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है।

नई दिल्ली। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 8.2 प्रतिशत बढ़ा है। यह पिछले 2 सालों में सबसे ऊंची विकास दर है। शुक्रवार को जारी जीडीपी के आंकड़ों के मुताबिक, मैन्यूफैक्चरिंग और फार्म सेक्टर में अच्छ प्रगति हुई है। बीते कुछ दिनों से मोदी सरकार अर्थव्यवस्था के मामलों में विपक्ष के तीखे हमले झेल रही है। खासतौर से नोटबंदी पर आरबीआई की रिपोर्ट, पेट्रोल डीजल के दामों और रुपए में गिरावट को लेकर। जीडीपी ग्रोथ रेट के बेहतर आंकड़ों से जमीन पर चीजें कितनी बदलेंगी ये अलग बहस हो सकती है लेकिन फिलहाल कई बड़े मुद्दों पर बचाव के लिए सरकार के लोगों और भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं को बड़ा सहारा मिल गया है। वो विपक्ष के हमलों का अब आंकड़ों के सहारे जवाब दे सकते हैं। विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक इसी साल भारत ने 2.6 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी के साथ फ्रांस को पछाड़कर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल किया है। इसके बाद अब जीडीपी रिपोर्ट के जरिए सरकार देश के सामने ये बात रखेगी कि आर्थिक मोर्चे पर सब ठीक है और देश विकास की राह पर है। खास बात ये है कि चीन ने दूसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ दर्ज की है। चीन में जनवरी से दिसंबर का वित्तीय कैलेंडर लागू है। ऐसे में भारत चीन की जीडीपी बेहतर है। कई नेता चीन की विकास दर से भारत की तुलना करते रहे हैं। ऐसे में सरकार बताएगी कि कैसे वो चीन से भी बेहतर जा रहे हैं। एक बड़ा मुद्दा सरकार के सामने किसानों की समस्या का भी रहा है। किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होने की बात कही जा रही है लेकिन रिपोर्ट कहती है कि कृषि की ग्रोथ 3 फीसदी से बढ़कर 5.3 फीसदी हो गई है। ऐसे में इस मोर्चे पर बचाव के लिए अब सरकार के पास आंकड़े हैं। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया है कि नोटबंदी के जरिए चलन से बाहर किए गए 15.42 लाख करोड़ रुपये में से 99.3 प्रतिशत से ज्यादा बैंक के पास वापस आ गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर नोटबंदी की क्यों गई जिसने आर्थिक स्तर पर देश को कमजोर करने का काम किया। वहीं पेट्रोल की और डीजल की कीमतें बीते कई दिनों से लगातार बढ़ रही हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर हैं तो डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 71 रुपये/डॉलर के स्तर को भी छू चुका है। इन मुद्दों पर केंद्र सरकार पर विपक्ष लगातार हमलावर है।

जीडीपी ग्रोथ रेट के बेहतर आंकड़ों से जमीन पर चीजें कितनी बदलेंगी ये अलग बहस हो सकती है लेकिन फिलहाल कई बड़े मुद्दों पर बचाव के लिए सरकार के लोगों और भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं को बड़ा सहारा मिल गया है। वो विपक्ष के हमलों का अब आंकड़ों के सहारे जवाब दे सकते हैं।

विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक इसी साल भारत ने 2.6 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी के साथ फ्रांस को पछाड़कर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल किया है। इसके बाद अब जीडीपी रिपोर्ट के जरिए सरकार देश के सामने ये बात रखेगी कि आर्थिक मोर्चे पर सब ठीक है और देश विकास की राह पर है।

खास बात ये है कि चीन ने दूसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ दर्ज की है। चीन में जनवरी से दिसंबर का वित्तीय कैलेंडर लागू है। ऐसे में भारत चीन की जीडीपी बेहतर है। कई नेता चीन की विकास दर से भारत की तुलना करते रहे हैं। ऐसे में सरकार बताएगी कि कैसे वो चीन से भी बेहतर जा रहे हैं।

एक बड़ा मुद्दा सरकार के सामने किसानों की समस्या का भी रहा है। किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होने की बात कही जा रही है लेकिन रिपोर्ट कहती है कि कृषि की ग्रोथ 3 फीसदी से बढ़कर 5.3 फीसदी हो गई है। ऐसे में इस मोर्चे पर बचाव के लिए अब सरकार के पास आंकड़े हैं। वहीं इन आंकड़ों के सहारे सरकार जनता को पेट्रोल-डीजल और दूसरे मुद्दों पर भी विश्वास दिलाने की भी कोशिश करेगी कि चीजें जल्दी ही ठीक हो जाएंगी।

बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया है कि नोटबंदी के जरिए चलन से बाहर किए गए 15.42 लाख करोड़ रुपये में से 99.3 प्रतिशत से ज्यादा बैंक के पास वापस आ गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर नोटबंदी की क्यों गई और इसका फायदा क्या रहा। वहीं पेट्रोल की और डीजल की कीमतें बीते कई दिनों से लगातार बढ़ रही हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर हैं तो डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 71 रुपये/डॉलर के स्तर को भी छू चुका है। इन मुद्दों पर केंद्र सरकार पर विपक्ष लगातार हमलावर है।

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