Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Andhra Pradesh: ONGC प्लांट में Gas Leak कैसे हुआ? आग से कांपा आंध्र प्रदेश, हजारों लोगों को छोड़ना पड़ा घर

ONGC Gas Leak: आंध्र प्रदेश के एक शांत ग्रामीण इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब ओएनजीसी से जुड़े एक गैस कुएं में अचानक रिसाव के बाद भीषण धमाका हो गया। आसमान में उठती आग की लपटें, काले धुएं का गुबार और दहशत में इधर-उधर भागते लोग। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो ने इस हादसे की भयावहता को साफ दिखा दिया। गनीमत रही कि अब तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन पूरे इलाके में डर का माहौल बना हुआ है।

यह घटना आंध्र प्रदेश के डॉ बीआर अंबेडकर कोनसीमा जिले में स्थित मोरी गांव की है। यहां दीप इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा संचालित मोरी-5 नाम के गैस कुएं में अचानक गैस लीक हुआ। यह कुआं ओएनजीसी से जुड़ी परियोजना का हिस्सा बताया जा रहा है।

Gas Leak ONGC

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तकनीकी गड़बड़ी के चलते गैस का दबाव असंतुलित हुआ और रिसाव के बाद आग भड़क उठी। कुछ ही पलों में आग ने विकराल रूप ले लिया और तेज धमाके की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी।

ONGC ने प्रेस रिलीज जारी कर क्या कहा?

ONGC की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि आंध्र प्रदेश के मोरी फील्ड में स्थित वेल मोरी#5 पर वर्कओवर ऑपरेशन के दौरान गैस रिसाव की घटना हुई। इस बारे में 5 जनवरी 2026 को पीईसी ऑपरेटर दीप इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने ONGC को जानकारी दी। कंपनी के अनुसार यह कुआं एक दूरस्थ इलाके में स्थित है, जहां लगभग 500 से 600 मीटर के दायरे में कोई मानव बस्ती मौजूद नहीं है।

ONGC ने साफ किया है कि इस घटना में किसी के घायल होने या जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। एहतियात के तौर पर प्रभावित क्षेत्र को पूरी तरह से घेराबंदी कर सुरक्षित कर दिया गया है और कूलिंग ऑपरेशन शुरू कर दिए गए हैं।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ONGC ने अपनी क्राइसिस मैनेजमेंट टीमें (CMT और RCMT) मौके पर तैनात कर दी हैं। कुएं को नियंत्रित करने और जरूरत पड़ने पर कैपिंग के लिए तैयारियां चल रही हैं। साथ ही अंतरराष्ट्रीय वेल-कंट्रोल विशेषज्ञों से भी समन्वय किया गया है। वरिष्ठ अधिकारी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और नरसापुरम समेत आसपास के इलाकों से अतिरिक्त उपकरण मंगाए जा रहे हैं।

आग और धमाके से मची अफरा-तफरी

धमाके के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग की ऊंची लपटों और काले धुएं से आसपास के गांवों में दहशत फैल गई। लोग अपने घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित जगहों की ओर भागते नजर आए। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कर्मचारी और स्थानीय लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने राहत की सांस तब ली, जब यह साफ हुआ कि किसी की जान नहीं गई और न ही किसी के घायल होने की खबर है।

बड़े पैमाने पर इलाका खाली कराया गया

हादसे के बाद प्रशासन ने एहतियातन सख्त कदम उठाए। गैस रिसाव के खतरे को देखते हुए आसपास के इलाकों को खाली कराना शुरू कर दिया गया। कई परिवारों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। बिजली सप्लाई को तुरंत बंद कर दिया गया, ताकि किसी तरह की चिंगारी से हालात और खराब न हों। इसके साथ ही इलाके में रसोई गैस के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई, जिससे किसी दूसरे हादसे की आशंका न रहे।

ONGC के अधिकारी मौके पर पहुंचे

घटना की सूचना मिलते ही राजाहमुंद्री से ओएनजीसी के वरिष्ठ अधिकारी मोरी गांव पहुंच गए। फायर सेफ्टी और तकनीकी टीमों ने मोर्चा संभाल लिया। आग पर काबू पाने और गैस रिसाव को नियंत्रित करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि हालात पर नजर रखी जा रही है और स्थिति को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के बाद ही लोगों को लौटने की अनुमति दी जाएगी।

पाइपलाइन को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

इस धमाके के बाद ओएनजीसी की पाइपलाइन के प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई। माना जा रहा है कि अगर गैस पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा होता, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। इसी वजह से प्रशासन और कंपनी दोनों अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। पूरे क्षेत्र को सील कर जांच की जा रही है कि रिसाव किस वजह से हुआ और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

कृष्णा गोदावरी बेसिन में ONGC की बड़ी मौजूदगी

ओएनजीसी की आंध्र प्रदेश में मजबूत पकड़ है। कंपनी कृष्णा गोदावरी डेल्टा बेसिन, पूर्व गोदावरी जिला और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर काम करती है। राजाहमुंद्री ऑनशोर एसेट और ईस्टर्न ऑफशोर एसेट के जरिए प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का उत्पादन किया जाता है। बंगाल की खाड़ी में स्थित ऑफशोर रिग्स और पूर्व गोदावरी के ऑनशोर क्षेत्रों से हाइड्रोकार्बन निकाला जाता है।

गैस और तेल कैसे पहुंचता है प्रोसेसिंग प्लांट तक?

ऑफशोर प्लेटफार्मों से निकाले गए हाइड्रोकार्बन को सब-सी और ऑनशोर पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए प्रोसेसिंग यूनिट्स तक पहुंचाया जाता है। पुदुचेरी के यानम जिले और आंध्र प्रदेश के मल्लावरम जैसे केंद्रों में गैस का प्रसंस्करण होता है। इसके बाद गैस को राष्ट्रीय ट्रांसमिशन नेटवर्क में भेजा जाता है, जबकि कच्चे तेल को रिफाइनिंग के लिए अन्य स्थानों पर रवाना किया जाता है। झतीपाका जैसे इलाकों में फैला फील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर इस पूरे सिस्टम की रीढ़ माना जाता है।

इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर गैस लीक की असली वजह क्या थी। तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या सिस्टम में कोई बड़ी खामी, इसकी जांच जारी है। प्रशासन और ओएनजीसी दोनों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी। फिलहाल लोगों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है और हालात को पूरी तरह सामान्य होने में अभी वक्त लग सकता है।

इस घटना ने एक बार फिर बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या कदम उठाए जाते हैं और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या सबक लिया जाता है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+