अदाणी ग्रुप द्वारा बनाए गए गंगा एक्सप्रेसवे का पीएम मोदी ने किया उद्घाटन
594 किलोमीटर लंबा छह-लेन वाला गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है, जिसमें आठ-लेन तक विस्तार की क्षमता है। यह यात्रा के समय में महत्वपूर्ण कमी, लॉजिस्टिक्स की बचत, रोजगार सृजन, और बाजारों, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक बेहतर पहुंच का वादा करता है, साथ ही औद्योगिक गलियारों और क्षेत्रीय विकास का भी समर्थन करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। यह उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिसे साढ़े तीन साल से कम समय में तैयार किया गया है। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ को पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जोड़ता है।

छह लेन वाला यह एक्सप्रेसवे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इसके शुरू होने से मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा समय करीब 11 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे रह जाएगा, जिससे यात्रियों, व्यापारियों और उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा। यह परियोजना 12 जिलों और 519 गांवों से होकर गुजरती है तथा इससे राज्य के 8 करोड़ से अधिक लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से बाजारों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों तक पहुंच आसान होगी।
गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। सरकारी अनुमान के अनुसार, यह परियोजना हर साल ₹25,000 करोड़ से ₹30,000 करोड़ तक की लॉजिस्टिक्स बचत कर सकती है और राज्य की जीडीपी में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का योगदान दे सकती है।
इसके अलावा, अगले दस वर्षों में करीब 3 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। किसानों, व्यापारियों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है।
रणनीतिक और सुरक्षा सुविधाएं
इस परियोजना की खास विशेषताओं में शाहजहांपुर जिले में विकसित 3.5 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी शामिल है। इससे भारतीय वायुसेना के विमान आपात स्थिति में लैंड कर सकेंगे और रणनीतिक दृष्टि से यह कॉरिडोर और मजबूत होगा।
एक्सप्रेसवे पर सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए एआई-सक्षम कैमरा सिस्टम लगाए गए हैं, जो रियल टाइम निगरानी और एडवांस अलर्ट के जरिए दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करेंगे।
12 जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरता है।
इस मार्ग के किनारे औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जाने की योजना है, जिससे निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह परियोजना पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच विकास असमानता को कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा
गंगा एक्सप्रेसवे से प्रयागराज, वाराणसी और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इससे धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर बनेंगे।
प्रमुख बातें
594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे छह लेन का है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। इससे मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा में करीब पांच घंटे की बचत होगी। ईंधन खपत में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद है। यह परियोजना 8 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाएगी और अगले दस वर्षों में लगभग 3 लाख रोजगार सृजित कर सकती है।
यूपी के विकास की नई पहचान
कम यात्रा समय, बेहतर कनेक्टिविटी, कम ईंधन खर्च और तेज आर्थिक गतिविधियों के साथ गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के भविष्य को नई दिशा देने वाली ऐतिहासिक परियोजना माना जा रहा है।












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