अफसोस गांधी परिवार में मोदी की टक्कर का कोई नहीं

ऐसे में यहां पर सवाल यह भी उठता है कि कांग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार अघोषित तौर पर राहुल गांधी ही हैं तो वह बहस के लिए क्यों नहीं आ रहे है। इसका मतलब यही है कि राहुल गांधी की सहायता से कांग्रेस सत्ता में बने रहने का सपना देख रही है पर नरेंद्र मोदी की टक्कर का इस समय गांधी परिवार में कोई नहीं है। इसलिए कपिल सिब्बल आगे आ रहे हैं, यह भी ध्यान देने योग्य है कि अन्ना हजारे के आंदोलन के समय राहुल गांधी राजनीतिक परिदृश्य से ही गायब हो गये थे, उनकी जगह कांग्रेस के अन्य नेताओं ने ली थी और अब मोदी से बहस करने के लिए भी गांधी परिवार से अलग किसी अन्य सदस्य को सामने आना पड़ रहा है।
कपिल सिब्बल पेशे से वकील हैं और विद्वान हैं, मोदी जो राजनेता हैं न कि विद्वान क्या सिब्बल की चुनौती स्वीकारेंगे? यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन अब कांग्रेस ने भी एक बात समझ ली है कि मोदी के नाम पर चुप रहकर जनता के बीच अपनी पहुंच नहीं बनाई जा सकती है। इसलिए पार्टी मोदी के खिलाफ खुलकर बोल रही है।
इसके अलावा सरदार पटेल की कांग्रेस द्वारा उपेक्षा के आरोप पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने डीएवीपी के आंकड़े देकर यह साबित करने की कोशिश की है कि कांग्रेस ने हमेशा ही सरदार वल्लभभाई पटेल को महत्व दिया है। कांग्रेस पर इस बात के आरोप भी लगाये जाते हैं कि ज्यादातर सरकारी योजनाओं के नाम गांधी परिवार के सदस्यों पर ही होते हैं, जबकि लाल बहादुर शास्त्री जैसे प्रधानमंत्री कांग्रेस में ही थे लेकिन उन्हें अनदेखा किया गया।












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