द्रौपदी को हारने वाले ‘गजेन्द्र’ चौहान से सब नाराज क्यों
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) गजेंद्र चौहान को इतनी गालियाँ तो तब भी नहीं मिलीं जब वो महाभारत में युधिष्ठिर बन द्यूतक्रीड़ा में द्रौपदी को हार बैठे थे। और झूठ बोलो अपने गुरु द्रोणाचार्य से कि "अश्वस्थामा मार गया। "ये पब्लिक है सब जानती है कि अश्वस्थामा नर था या हाथी "और लगाओ अपनी पत्नी को दांव पर। अब किया है तो भुगतना भी पडेगा।

विरोधी कौन
हालांकि एक राय ये भी है कि दरअसल गजेन्द्र को गालियां देने वाले आम लोग नहीं हैं, बल्कि गुस्से में 'लाल' हुए लोग हैं जो गजेंद्र को नहीं, बल्कि उनके बहाने 'भगवा' को गाली दे रहे हैं।
बंद करो एफटीटीआई को
कुछ जानकार कह रहे हैं कि एफटीटीआई, पुणे को बंद करके गरीबों, एससी, एसटी वर्ग के लिए मोबाइल रिपेयरिंग इंस्टीट्यूट खुलना चाहिए। देश का ज्यादा भला होगा। अभिनेता और निर्देशक अब पुणे से नहीं, एकता कपूर के सीरियलों से आ रहे हैं या अनुराग कश्यप जैसे आत्म-पढ़ित और आत्म-प्रेरित आ रहे हैं।
पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से पिछले दस सालों में पढ़े-लिखे कोई दस उल्लेखनीय निर्देशकों या अभिनेत्रियों या अभिनेताओँ के नाम कोई बता सकता है क्या। बता दें कि अब रिषी कपूर ने भी गजेन्द्र चौहान से कहा है कि वे उक्त संस्थान में जाने के अपने इरादे को टाल दें।
इससे पहले अन्य कलाकारों के अलावा अनुपम खेर ने भी चौहान की नियुक्ति की निंदा की। ये बात समझ से परे है कि जिस शख्स की पत्नी किरण खेर भाजपा की सांसद है, वह ही गजेन्द्र चौहान की नियुक्ति का विरोध कर रहा है। तो माना जा सकता है कि अब गजेन्द्र चौहान को लेकर भाजपा के भीतर भी कलह है। चौहान को कुछ लोग उक्त संस्थान के शिखर पर देखना नहीं चाहते।












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