अपने ही हुए शाही इमाम सैयद बुखारी के खिलाफ
जामा मस्जिद के कार्यक्रम में शाही इमाम सैयद इमाम बुखारी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता न देकर पाक पीएम को बुलाना महंगा पड़ रहा है। इमाम बुखारी के इस फैसले के बाद मुस्लिम समुदाय ने इमाम के खिलाफ आंखे तरेर ली हैं। मुस्लिम समुदाय ने इमाम को अपना प्रतिनिधत्व मानने से इनकार कर दिया है।

गौरतलब है कि इमाम बुखारी का पुत्र शबन बुखारी(19) जो कि एमिटी यूनिवर्सिटी का छात्र है को जामा मस्जिद का अगला नायब शाही इमाम बनने वाले हैं। शबन बुखारी के शाही इमाम की शाही ताजपोशी का कार्यक्रम 22 नवंबर को होना है। जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, राजनाथ सिंह, समेत कई राजनेताओं को बुलाया गया है। वहीं इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भी न्योता भेजा गया है।
बुखारी के विरोध में मुस्लि समुदाय ही नहीं बल्कि उनके भाई भी उतर आये हैं। इमाम बुखारी के भाई यहया बुखारी ने कहा कि मुसलमान समुदाय ने पहले ही उन्हें नकार दिया था। लेकिन फिर से मीडिया की सुर्खियों में आने के लिए उन्होंने यह पैतरा अपनाया है। उन्होंने कहा कि वह मुसलमानों के मसीहा बनना चाहते हैं लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि वह मुसलमानों को बेवकूफ नहीं बना सकते हैं।
यहया बुखारी ने कहा कि लोकसभा चुनाव में इमाम बुखारी ने कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही थी। जिससे यह साबित होता है कि बुखारी राजनैतिक लाभ के लिए मुसलमानों का फायदा उठा रहे हैं। यही नहीं उन्होंने कहा कि अगर शाही इमाम को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इतने ही पसंद है तों उन्हें पाकिस्तान की ताजपोशी के कार्यक्रम में जाना चाहिए।












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