दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस के लिए क्यों जरूरी हैं शीला दीक्षित? जानिए
नई दिल्ली। दिल्ली की सक्रिय राजनीति में शिला दीक्षित की एक बार फिर वापसी हो सकती है। कांग्रेस के भीतर इस बात पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो शीला दीक्षित की दिल्ली की राजनीति में वापसी पर सहमति लगभग बन चुकी है, बस कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है। बता दें कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद शीला दीक्षित यहां की सक्रिय राजनीति से दूर हो गई हैं।

मौका मिला तो जिम्मेदारी लेने के तैयारा है शीला
सूत्रों की माने तो शीला दीक्षित दोबार से दिल्ली की सक्रिय राजनीति में उतरने के लिए हामी भी भर दिया है। पिछले कुछ महीनों ने उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने उन्हें अपनी पार्टी का मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाया था। लेकिन जब सपा के साथ गठबंधन हो गया तो उन्होंने सीएम की दावेदारी वापस ले ली थी। हालांकि दिल्ली में वापसी के बारे में शीला ने पार्टी के शीर्ष नेताओं को भरोसा दिया है कि अगर उनको मौका दिया जाता है तो वो जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं।

इस वजह से शीला आ सकती हैं वापस
दरअसल दिल्ली की सक्रिया राजनीति में शीला दीक्षित को लाने के पीछे एक सर्वे हैं। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने अक्टूबर महीने में पार्टी की स्थिति और नेताओं के बारे में आम जनता की राय जानने के लिए पूरे देश में एक सर्वे किया था। जिसमें दिल्ली के सीएम पद के लिए सबसे लोकप्रीय उम्मीदवार के बारे में भी सवाल किया गया था। इसमें पहले नंबर पर शीला दीक्षित थीं। जबकि दिल्ली के मौदूदा सीएम अरविंद केजरीवार दूसरे नंबर पर थे। तीसरे नंबर पर मनीष सिसोदिया और चौथे नंबर पर अजय माकन रहे। सूत्रों के अनुसार इसी सर्वे के बाद कांग्रेस शीला को एक बार फिर से दिल्ली की राजनीति में उतारने पर विचार कर रही है।

गठबंधन के हिसाब से भी सटीक
सूत्रों की माने तो कांग्रेस दिल्ली के लिए पहले से ही ऐसा चेहरा तलाश रही है जो सभी को मंजूर हो। लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर सहमति की संभावना तलाशने से पहले ही कांग्रेस के नेताओं ने जिस तरह से बयानबाजी की है उससे केंद्रीय नेतृत्य नाराज है। इसके साथ-साथ केजरीवाल ने जिस तरह स शीला दीक्षित के इलाज का खर्च उठाने की घोषणा की उससे भी दोनों के बीज दूरियां कम हुई हैं। बता दें कि दिल्ली की 7 लोकसभा सीट पर अभी बीजेपी का कब्जा है।












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