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पूर्व CEC टीएन शेषन ने ऐसा क्या किया, जिससे बदल गई देश की चुनावी राजनीति ? जानिए

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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के काम करने के तरीकों को लेकर उनकी काफी सराहना की है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि ऐसे सीईसी कभी-कभार ही मिलते हैं। सुप्रीम कोर्ट की बातों में काफी दम है। अपने कार्यकाल में टीएन शेषन ने खुद को देश की जनता का मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया था और शायद पहली बार ऐसा महसूस हुआ था कि संविधान में चुनाव आयोग पूरी तरह से एक स्वतंत्र निकाय है, जिसपर सरकार का कोई जोर नहीं चल सकता। आइए जानते हैं कि टीएन शेषन ने अपने कार्यकाल में वह कौन से चुनाव सुधार किए थे, जिसका मुरीद आज सुप्रीम कोर्ट भी नजर आ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट को याद आए टीएन शेषन

सुप्रीम कोर्ट को याद आए टीएन शेषन

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि संविधान ने मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों के 'नाजुक कंधों' पर बहुत अधिक शक्तियां निहित की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ऐसे व्यक्ति को होना चाहिए जो खुद को प्रभावित ना होने दे या यह ऐसा व्यक्ति हो जो पूरी तरह से गैर-राजनीति हो। सर्वोच्च अदालत ने यह भी आइडिया दिया है कि 'तटस्थता' की स्थिति बनाए रखने के लिए सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को भी शामिल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस केएम जोसेफ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इसके साथ ही पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त दिवंगत टीएन शेषन का भी जिक्र कर दिया और कहा कि टीएन शेषन जैसे मजबूत चरित्र वाले कभी-कभार ही होते हैं। कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट का इस बात पर जोर था कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया ऐसी हो, ताकि 'सर्वश्रेष्ठ' ही सीईसी बने।

बेस्ट व्यक्ति हो सीईसी- सुप्रीम कोर्ट

बेस्ट व्यक्ति हो सीईसी- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'सीईसी कई रह चुके हैं और टीएन शेषन कभी-कभार ही होते हैं। हम नहीं चाहते कि इसे कोई प्रभावित करने की कोशिश करे। तीन व्यक्तियों के नाजुक कंधों पर बहुत अधिक शक्तियां निहित की गई हैं। सीईसी के पद के लिए हमें सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को खोजना है। सवाल है कि सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को हम कैसे खोजें और सर्वेश्रेष्ठ व्यक्ति को कैसे नियुक्त करें।' इस बेंच में जस्टिस जोसेफ के अलावा जस्टिस अजय रस्तोगी, जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस ह्रषिकेश रॉय और जस्टिस सीटी रविकुमार भी शामिल थे। अगर सामान्य आदमी के तौर पर समझें तो सुप्रीम कोर्ट का कहना इस मायने में पूरी तरह से लाजिमी है कि टीएन शेषन के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद से ही चुनाव आयोग सरकार से पूरी तरह से अलग एक स्वतंत्र निकाय के रूप में अपनी जिम्मेदारियां पूरी करता हुआ प्रतीत होने लगा है।

टीएन शेषन कौन थे ?

टीएन शेषन कौन थे ?

दिवंगत टीएन शेषन या तिरुनेल्लई नारायण अय्यर शेषन भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त थे। देश के 10वें सीईसी के तौर पर उनकी नियुक्ति 12 दिसंबर, 1990 को हुई थी और उनका कार्यकाल 11 दिसंबर, 1996 यानि पूरे पांच के लिए था। उनका जन्म 15 दिसंबर, 1932 को केरल के पलक्कड़ जिले के कालकाडु में हुआ था। वह 1955 बैच के तमिलनाडु कैडर के आईएएस अधिकारी थे। 27 मार्च, 1989 से 23 दिसंबर, 1989 तक वह भारत सरकार के कैबिनेट सचिव रहे, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा का सर्वोच्च पद माना जाता है।

टीएन शेषन के चुनाव सुधार

टीएन शेषन के चुनाव सुधार

भारत में अबतक जितने भी मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, उसमें टीएन शेषन एकमात्र ऐसे हैं जिनके आने के बाद से चुनाव आयोग के काम करने का पूरा ढर्रा (कम से कम जनता की नजर में) ही बदल गया है। सीईसी के तौर पर शेषन अपने ऐतिसाहिक चुनाव सुधारों के लिए जाने जाते हैं और उनकी वजह से चुनाव आयोग की गरिमा और प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। क्योंकि, 1950 में अपनी स्थापना के बाद से लेकर टीएन शेषन के पदभार ग्रहण करने से पहले तक भारत का चुनाव आयोग एक तरह से चुनाव पर्यवेक्षक के रोल में ही नजर आता था। वह ऐसा समय था, जब मतदाताओं को रिश्वत देना एक सामान्य व्यवस्था बना दी गई थी, लेकिन शेषन ने चुनाव आयोग का वह अधिकार सुनिश्चित करवाया, जो इसे संविधान में दिया गया था।

टीएन शेषन के चलते बदल गई देश की चुनावी राजनीति

टीएन शेषन के चलते बदल गई देश की चुनावी राजनीति

टीएन शेषन ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को संचालित करने के लिए चुनावों के दौरान 150 ऐसी कुप्रथाओं की सूची जारी की, जिसपर चुनाव आयोग की ओर से रोक लगा दी गई। इसमें चुनावों के दौरान शराब का वितरण, वोटरों को रिश्वत देना, दीवारों पर लिखना, चुनाव प्रचार के दौरान अनावश्यक शोर और लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल के अलावा भाषण में धर्म का इस्तेमाल आदि। शेषन ने ही वोटर आईडी कार्ड की व्यवस्था शुरू करवाई जो कि उस समय असंभव लग रहा था। कुछ राजनीतिक दल तो इसका खुलकर विरोध भी करने पर उतारू थे। यही नहीं, चुनावों से पहले आदर्श आचार संहिता नियमित रूप से और सख्ती के साथ लागू होने शुरू हो गए और चुनाव खर्चों की सीमाएं तय की जाने लगीं। उनसे पहले इस सब पर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की मनमानी कायम थी।

जब कांग्रेस सरकार से हुए शेषन के मतभेद

जब कांग्रेस सरकार से हुए शेषन के मतभेद

टीएन शेषन ने जिस तरह से तत्कालीन केंद्र सरकार के हितों को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ संविधान और चुनाव नियमों का पालन सुनिश्चित करवाना शुरू किया, उसके चलते सरकार के साथ उनका मतभेद शुरू हो गया। शेषन पर लगाम लगाने के लिए 1993 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने आर्टिकल 342 (2)[3] के तहत एक अध्यादेश के जरिए सीईसी के अतिरिक्त दो चुनाव आयुक्तों एमएस गिल और जीवीजी कृष्णमूर्ति की नियुक्ति कर दी। शेषन ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी और एक या अधिक चुनाव आयुक्त की व्यवस्था को संवैधानिक करार दिया। यही व्यवस्था आज भी चल रही है।

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राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ चुके थे टीएन शेषन

राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ चुके थे टीएन शेषन

भारत में चुनाव सुधारों को अपने दम पर स्थापित करने की वजह से टीएन शेषन देश में लोकप्रिय तो हो ही चुके थे, उनकी अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि भी कायम हो चुकी थी। देश की चुनाव प्रणाली को स्वच्छ बनाने के लिए 1996 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार दिया गया। 1997 में टीएन शेषन ने केआर नारायणमूर्ति के खिलाफ राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा था। 10 नवंबर, 2019 को 86 साल की अवस्था में चेन्नई में उनका निधन हो गया।

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English summary
Former Chief Election Commissioner TN Seshan is known for electoral reforms in the country. Voter ID system and cleanliness in the election process are some of his indelible contributions
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