BSP के पूर्व सांसद की लखनऊ में 50 करोड़ की अवैध बिल्डिंग ध्वस्त, जेसीबी ड्राईवर पर ही गिरा मलबा
लखनऊ, 05 जून। पूर्व बसपा सांसद दाऊद अहमद की लखनऊ में निर्माणाधीन 5 मंजिला भवन जिसकी निर्माण लागत तकरीबन 50 करोड़ रुपए है को जिला प्रशासन ने रविवार को ध्वस्त कर दिया है। इस भवन का निर्माण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अनापत्ति प्रमाण पत्र के बगैर हो रहा था, जिसके बाद पूर्व सांसद दाऊद अहमद और सिम्मी बानों के इस भवन को रविवार की सुबह गिरा दिया गया। भवन को ध्वस्त करने की कार्रवाई रविवार की सुबह 5.30 बजे शुरू हुई और दोपहर डेढ़ बजे तक चली। लेकिन इस दौरान भवन निर्माण को गिराने में लगा जेसीबी चालक शोएब घायल हो गया।
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जेसीबी चालक का चल रहा इलाज
दरअसल जब इस बिल्डिंग को गिराने के काम में जेसीबी का इस्तेमाल भी किया गया था। इसी दौरान जेसीबी चालक शोएब ने जैसे ही बिल्डिंग की पिलर को गिराया तो बिल्डिंग का मलब जेसीबी पर गिर गया, जिसमे जेसीबी और चालक दोनों दब गए। हादसे के बाद मौके पर पुलिस अधिकारियों, अभियंताओं ने शोएब को मलबे से बाहर निकाला। शोएब को हादसे में काफी चोट आ गई और उसे केजीएमसी में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। हालांकि ट्रामा सेंटर के प्रभारी का कहना है कि शोएब की कोई हड्डी नहीं टूटी है और फिलहाल वह ठीक है।
शनिवार को ही कर ली गई थी तैयारी
जिला प्रशासन की ओर से दाऊद अहमद की बिल्डिंग को गिराने की तैयारी शनिवार देर तक पूरी कर ली गई थी। एएसआई की ओर से पत्र मिलने के बाद प्रशासन ने बिल्डिंग को गिराने का फैसला कर लिया था। बिल्डिंग को ध्वस्त करने के दौरान मौके पर एडीएम अमर पाल सिंह, एलडीए के सचिव पवन कुमार सहित कई आला अधिकारी और पुलिस अधिकारी मौजूद थे। यही नहीं आस-पास के धाने की पुलिस को भी बड़ी संख्या में यहां बुला लिया गया था।
2017 में शुरू हुआ था निर्माण
बता दें कि इश बिल्डिंग का निर्माण वजीरगंज स्थित नबीउल्लाह रोड़ पर 2017 में बनना शुरू हुआ था। एएसआई का कहना है कि यह बिल्डिंग रेजिडेंसी से तकरीबन 123 मीटर की दूरी पर है, जबकि नियमानुसार स्मारक से 200 मीटर की दूरी के भीतर कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। अगर 200 मीटर के भीतर निर्माण कार्य करना है तो उसके लिए एनओसी की जरूरत होती है।
15 दिन के भीतर निर्माण को गिराने का आदेश
नियमों के उल्लंघन के चलते पूर्व सांसद और लखीमपुर से विधायक रह चुके दाऊद अहमद ने एएसआई और एलडीए के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने 3 जुलाई को आदेश दिया था कि 15 दिन के भीतर अवैध निर्माण को हटाया जाए। जिसके बाद लखनऊ के डीएम और एलडीजी के उपाध्यक्ष अभिषेक प्रकाश की अगुवाई में अवैध निर्माण को गिरा दिया गया। वहीं इस मामले पर दाऊद अहमद का कहना है कि मुझे कोर्ट पर भरोसा है, आगे भी मैं कोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगा, लिहाजा इस मसले पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता हूं।












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