धर्म संसद में सनातन बोर्ड के गठन का प्रस्ताव पास, देवकीनंदन ठाकुर ने सोशल मीडिया पर साझा किया प्रारूप, देखिये

Sanatan Board Formation: प्रयागराज के महाकुंभ में सोमवार, 27 जनवरी को सनातन धर्म संसद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस दौरान सनातन बोर्ड के गठन पर विस्तृत चर्चा हुई और अब इसके गठन की रूपरेखा लगभग स्पष्ट हो गई है। आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन हिंदू बोर्ड के प्रारूप को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि इस पर सभी धर्माचार्यों ने अपनी स्वीकृति दे दी है।

सनातनी हिंदू बोर्ड अधिनियम का प्रस्ताव पारित

धर्म संसद में देवकीनंदन ठाकुर ने बताया कि एक प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसके तहत "सनातनी हिंदू बोर्ड अधिनियम 20" के तहत एक केंद्रीकृत बोर्ड स्थापित किया जाएगा। यह बोर्ड भारत के हिंदू मंदिरों, उनकी संपत्तियों, निधियों और सनातन धार्मिक परंपराओं के प्रबंधन, संरक्षण और निगरानी के लिए जिम्मेदार होगा। इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य मंदिरों के संसाधनों का पारदर्शी तरीके से प्रबंधन करना और सनातन धर्म तथा संस्कृति को संरक्षित करना है।

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शंकराचार्यों की देखरेख में होगा सनातन बोर्ड का संचालन

सनातन बोर्ड के तहत चारों जगदगुरु शंकराचार्यों की देखरेख में एक राष्ट्रीय स्तर का केंद्रीय सनातन बोर्ड गठन किया जाएगा। इसके संचालन के लिए एक अध्यक्ष मंडल बनाया जाएगा जिसमें 11 सदस्य होंगे, जिनमें प्रमुख संत, धर्माचार्य, और सनातनी अखाड़ों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा, सहयोगी और सलाहकार मंडल में भी विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े व्यक्ति शामिल होंगे, जैसे कि रिटायर्ड जज, प्रशासनिक अधिकारी, और सामाजिक कार्यकर्ता।

सनातन बोर्ड मंदिरों की संपत्तियों का प्रबंधन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि मंदिर प्रशासन में केवल हिंदू धर्मावलंबियों को कार्य करने की अनुमति हो। इसके माध्यम से प्रसाद वितरण और मंदिरों के प्रवेश नियमों की निगरानी भी की जाएगी। बोर्ड विशेष रूप से तिरुपति बालाजी मंदिर जैसी घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा उपायों को लागू करेगा।

वक्फ बोर्ड की कब्जे से मुक्त कराई जाएगी जमीन

सनातन बोर्ड के अंतर्गत एक विशेष समिति बनाई जाएगी जो मंदिरों की निधियों के प्रबंधन और आवंटन की देखरेख करेगी। निधियों का प्रबंध एक एस्क्रो खाते के माध्यम से किया जाएगा और इसका इस्तेमाल गुरुकुलों, गौशालाओं, छोटे-बड़े मंदिरों, अस्पतालों और आर्थिक रूप से कमजोर सनातनी परिवारों की सहायता में किया जाएगा।

प्रस्तावित सनातन बोर्ड का एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य वक्फ बोर्ड द्वारा कब्जाई गई संपत्तियों को मुक्त करना है। बोर्ड को यदि कोई संपत्ति संदिग्ध या ऐतिहासिक दृष्टि से मंदिर संपत्ति के रूप में मिलती है, तो उसे तुरंत मंदिर संपत्ति घोषित करने का अधिकार होगा।

कौन से मंदिर आएंगे अधिनियम के दायरे में?

इस अधिनियम के तहत केवल वही मंदिर बोर्ड के अधीन आएंगे, जो सरकार के नियंत्रण में हैं। जो निजी मंदिर या संस्थाएं हैं, उन पर यह नियम लागू नहीं होंगे, हालांकि वे स्वेच्छा से बोर्ड के अधीन आने के लिए आवेदन कर सकते हैं। सनातन धर्म संसद का यह प्रस्ताव भारत में सनातन धर्म और संस्कृति की सुरक्षा एवं प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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