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भारत-चीन सीमा समझौते पर राज्यसभा में बोले विदेश मंत्री जयशंकर, कहा-'3 सिद्धांतों का हर परिस्थिति में पालन हो'

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को राज्यसभा में भारत-चीन सीमा विवाद पर हालिया घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने 21 अक्टूबर को हुए एक ऐतिहासिक समझौते का उल्लेख किया। जिसने पूर्वी लद्दाख में तनाव कम करने और गश्त गतिविधियों को बहाल करने का मार्ग प्रशस्त किया है। जयशंकर ने सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए संवाद की महत्ता को रेखांकित किया और इसे भारत-चीन संबंधों की स्थिरता के लिए प्राथमिक शर्त बताया।

समझौता, तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

जयशंकर ने कहा कि अक्टूबर में हुए समझौते के बाद भारतीय और चीनी सैनिकों ने टकराव वाले क्षेत्रों से धीरे-धीरे वापसी शुरू कर दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी अप्रिय घटना या झड़प से बचने के लिए यह कदम अनिवार्य था। अब प्राथमिकता वास्तविक नियंत्रण रेखा के सम्मान, यथास्थिति में बदलाव की कोशिश न करने और पूर्व समझौतों के पालन पर है।

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उन्होंने बताया कि हालिया वार्ता के बाद दोनों देशों ने गश्त गतिविधियों को बहाल करने पर सहमति व्यक्त की है। जिससे सीमा क्षेत्रों में सामान्य स्थिति वापस लाने की दिशा में प्रगति हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकातें

जयशंकर ने 23 अक्टूबर को रूस के कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक का हवाला दिया। यह बैठक समझौते के तुरंत बाद हुई थी और दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक थी।

जी-20 और अन्य उच्चस्तरीय वार्ताएं

18 नवंबर को रियो डी जेनेरियो में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच विस्तृत चर्चा हुई। इस वार्ता में सीमा विवाद के निष्पक्ष, न्यायसंगत और परस्पर स्वीकार्य समाधान पर जोर दिया गया।

इसके अलावा जुलाई और सितंबर में भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत और चीन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच वार्ताएं हुई। जयशंकर ने बताया कि इन बैठकों में भारत ने डेमचोक में पारंपरिक चरागाहों और स्थानीय निवासियों के अधिकारों जैसे मुद्दों पर अपनी चिंताएं स्पष्ट रूप से व्यक्त की।

सीमा विवाद का द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव

जयशंकर ने स्वीकार किया कि सीमा पर तनाव ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तनावपूर्ण माहौल में चीन के साथ सामान्य गतिविधियों को जारी रखना चुनौतीपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों की नींव आपसी संवेदनशीलता, आपसी सम्मान और आपसी हितों पर टिकी है। सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना दोनों देशों के संबंध सामान्य नहीं हो सकते।

भारत सरकार का अडिग रुख

जयशंकर ने दोहराया कि भारत सरकार सीमा पर शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालिया समझौते को तनाव कम करने और सैनिकों की वापसी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार हर बातचीत में भारत के हितों, सम्मान और संवेदनशीलता को प्राथमिकता देती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चीन के साथ किसी भी सामान्य रिश्ते के लिए सीमा विवाद का समाधान और स्थिरता अत्यंत आवश्यक है।

भारत-चीन सीमा पर तनाव को कम करने के लिए हालिया समझौता और उच्चस्तरीय वार्ताएं एक सकारात्मक दिशा में कदम हैं। हालांकि जयशंकर ने स्पष्ट किया कि चीन के साथ संबंधों में स्थिरता तब तक संभव नहीं है। जब तक सीमा पर शांति और स्थायित्व कायम नहीं होता।

राज्यसभा में उनका संबोधन भारत के इस दृढ़ रुख को दोहराता है कि सीमा विवाद का समाधान केवल संवाद, आपसी सम्मान और समझौतों के पालन के माध्यम से ही संभव है।

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