इस राज्य में पहली बार मस्जिद में आयोजित अपनी शादी में पहुंची दुल्हन भी, टूटी पुरानी प्रथा
कोझिकोड, 05 अगस्त : देश में साक्षरता के मामले अव्वल राज्य केरल से एक दिल खुश कर देने वाली खबर आई है। केरल में ऐसी शादी हुई जिसमें पहली बार मज्जिद में आयोजित अपनी शादी में दुल्हें के साथ दुल्हन पहुंची। इस शादी की जमकर चर्चा हो रही है।

मज्जिद में आयोजित शादी में केवल दुल्हा ही मौजूद रहता था
बता दें मस्जिद में शादी होना अब सामान्य बात हो चुकी है लेकिन अभी तक मज्जिद में आयोजित शादी में केवल दुल्हा ही मौजूद रहता था लेकिन पुरानी परंपराओं को तोड़ते हुए इस शादी में दुल्हन भी अपनी शादी में मज्जिद पहुंची थी।

शुरू किया नया ट्रेंड
दुल्हें दुल्हन के पिता और दोनों परिवारों के अन्य पुरुषों के साथ एक मुस्लिम दुल्हन की मौजूदगी ने समुदाय में एक नया ट्रेंड स्थापित कर दिया है। आमतौर पर मुस्लिम शादियों में दुल्हनें शादी समारोह में शामिल नहीं होती हैं क्योंकि यह दूल्हे और दुल्हन के पुरुष ही मौजूद रहते हैं।

पिता ने की ये ख्वाहिश
ये नई पहल करने वाले केरल के परकदावु के रहने वाले केएस उमर ने अपनी बेटी की शादी में की। उन्होंने अलग तरह से सोचने का फैसला किया। उमर ने कहा हमारे दोनों परिवार चाहते थे कि मेरी बेटी बहाजा हमारे साथ मस्जिद में अपनी शादी देखें। बहाजा के पिता ने कहा यह उचित समय है कि हम ऐसी प्रथाओं को त्याग दें जिनका इस्लाम में कोई स्थान नहीं है। मेरी बेटी सहित दुल्हनों को अपनी शादी देखने का अधिकार है।

मस्जिद के परिसर में आयोजित किया गया था ये समारोह
पिता उमर ने कहा एक बार जब यह विचार आया, तो हमने महल समिति से संपर्क किया और इस पर चर्चा करने के बाद, उन्होंने हमारी गुजारिश स्वीकार कर ली और हमें अलग तरह से सोचने पर बधाई दी। ये शादी का समारोह मस्जिद के अंदर नहीं बल्कि मस्जिद के परिसर में आयोजित किया गया था। पिता ने खुशी जाहिर करते हुए कहा बहाजा की शादी हमारे इलाके में पहला अनोखा समारोह बन गया। जहां दुल्हन मस्जिद के अंदर समारोह को देखने पहुंची।

महल के सचिव ईजे नियास ने इसलिए दी परमीशन
महल के सचिव ईजे नियास ने कहा जब परिवार ने ऐसा अनुरोध किया तो महल समिति के सदस्यों के बीच कोई मतभेद नहीं था। भविष्य में भी, हमें मस्जिद के अंदर दुल्हन के लिए जगह बनाने में खुशी होगी शादी समारोह, अगर परिवार चाहता है।

इससे पहले भी हुआ ये प्रयास लेकिन हंगामा मच गया था
वहीं सुधारवादी मुस्लिम विद्वान सी एच मुस्तफा मौलवी, जिन्होंने एक साल पहले मालाबार में इस तरह की शादियां शुरू की थीं। उन्हें इस वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मौलवी ने कहा, "जब मैंने दुल्हन और परिवार की अन्य महिलाओं की मौजूदगी में शादी की तो हंगामा मच गया।" एक उपदेशक ने विवाह को व्यभिचार बताया और अन्य ने अपना विरोध व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। उपदेशक ने बाद में टिप्पणी के लिए माफी मांगी, जब परिवार ने उन्हें कानूनी कार्रवाई की धमकी दी थी। मुस्तफा मौलवी ने कहा कि जो बदलाव आए हैं, वे इस तरह की प्रथाओं के खिलाफ समुदाय में लड़कियों के सामने आने के कारण आए हैं। लेकिन, मुझे नहीं लगता कि बहुमत की मानसिकता में कोई बदलाव आया है।












Click it and Unblock the Notifications