2024 में वोट और नोट दोनों मांगेगी कांग्रेस! जानिए क्या है CPM वाला फंडा ?
नई दिल्ली, 27 मई: कांग्रेस केंद्र में 8 वर्षों से सत्ता से दूर है। इस समय सिर्फ राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ही उसकी अपनी सरकारें बची रह गई हैं। महाराष्ट्र, झारखंड और तमिलनाडु जैसे राज्यों में वह सरकार की जूनियर पार्टनर है। कहा जा रहा है कि ऐसी स्थिति में पार्टी की आमदनी बहुत ही ज्यादा कम हो चुकी है। ऊपर से अहमद पटेल जैसे फंड मैनेजर अब इस दुनिया में नहीं हैं। लिहाजा पार्टी दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए फंड जुटाने की नई तरकीब तलाश रही है। फिलहाल उसे इसके लिए केरल में लेफ्ट की ओर से अपनाया जाने वाला फंडे का आइडिया अच्छा लग रहा है। इसके जरिए वह लोगों से घर-घर जाकर पार्टी के लिए पैसों का जुगाड़ करना चाहती है।

2024 में कांग्रेस वोट और नोट दोनों मांगेगी!
कहा जा रहा है कि 2024 के चुनाव से पहले कांग्रेस इस समय भयंकर फंड संकट से जूझ रही है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस वित्तीय संकट का सामना करने के लिए पार्टी लेफ्ट के केरल मॉडल को अपनाने की सोच रही है। वहां सत्ताधारी दल पार्टी फंड का ज्यादातर पैसा घर-घर से जुटाती है और इसके बदले वह चंदे की पर्ची बांटती है। कांग्रेस को यह विचार केरल प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रमेश चेन्निथला ने सुझाया है और हाल ही में राजस्थान के उदयपुर में संपन्न हुए चिंतन शिविर में इस पर चर्चा भी की गई है। कांग्रेस पार्टी के सूत्रों का कहना है, 'इसपर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। कुछ चीजें हैं, जैसे कि इस किस तरह से लागू किया जा सकता है, फंड मैनेजमेंट कैसे हो और पारदर्शिता आदि। टास्क फोर्स 2024 की बैठकों में इसपर बातचीत की जाएगी।'

क्या है कांग्रेस के खजाने का हाल ?
आधिकारिक तौर पर कांग्रेस ने चुनाव आयोग को जो ऑडिट रिपोर्ट सौंपी है, उसके मुताबिक कांग्रेस पार्टी की आमदनी में भारी गिरावट बताई गई है। इसके अनुसार वित्त वर्ष 2021 में कांग्रेस की आय में 58% की कमी आई है। मतलब, 2020 में पार्टी को 682.2 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी, जबकि बीते वित्त वर्ष में यह घटकर सिर्फ 285.7 करोड़ रुपये रह गई है। वहीं, 2019 के वित्त वर्ष में पार्टी की आय 918 करोड़ रुपये रही थी। हालांकि, आय घटने वाला साल कोरोना महामारी की चपेट में भी आया था और इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस में क्यों पैदा हुआ फंड संकट ?
कहा जा रहा है कि कांग्रेस पर इस तरह का वित्तीय संकट सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव और पार्टी के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल के निधन की वजह से आई है। क्योंकि, उनके बारे में कहा जाता है कि वह कॉर्पोरेट और दूसरे संपर्कों के जरिए पार्टी का खजाना खाली नहीं होने देते थे। पार्टी में फंड के जुगाड़ की जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष कमलनाथ के भी हाथों में भी रही है, लेकिन मोदी सरकार की सख्ती की वजह से इस आमदनी में भी गिरावट की बात सामने आ रही है।

सीपीएम का बकेट कलेक्शन वाला फंडा क्या है ?
जानकारी के मुताबिक सीपीएम की अधिकतर कमाई इसकी केरल यूनिट के ही भरोसे टिकी रहती है। क्योंकि, लेफ्ट के पास अब ले-देकर यहीं पर सरकार रह गई है। केरल में सत्ताधारी दल के भीतर यह मजाक भी प्रचलित है कि पार्टी की केंद्रीय इकाई फंड के लिए केरल के ही भरोसे रहती है। पार्टी का एक सामान्य नियम यह है कि इसकी 70% फंडिंग डोर-टू-डोर कैंपेन और मास-कॉन्टैक्ट के जरिए होनी चाहिए, जिसे के 'बकेट कलेक्शन' के नाम से जाना जाता है। कांग्रेस को उसकी यही तरकीब अपने लिए भी फायदेमंद नजर आ रही है।

दो दिन में बकेट कलेक्शन से जुटाए थे 5 करोड़ रुपये
हालांकि, केरल में सीपीएम के फंड उगाही के तरीके की आलोचना भी होती है और खुद पार्टी के भीतर इसको लेकर सवाल उठाए जा चुके हैं। 2013 में सीपीएम की केरल यूनिट ने केवल दो दिनों के भीतर हरकिशन सिंह सुरजीत भवन और ईएमएस रिसर्ज सेंटर स्थापित करने के लिए 8 करोड़ रुपये जुटा लिए थे। इस 8 करोड़ में से 5 करोड़ रुपये बकेट कलेक्शन के जरिए ही जमा किए गए थे और बाकी के 3 करोड़ रुपये पार्टी के सदस्यों के सहयोग से प्राप्त हुए थे।












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