लालू यादव दोषी करार, कोर्टरूम के बाहर समर्थक फूट-फूट कर रोए
21 साल पुराने इस मामले में सीबीआई ने शुरु में 34 लोगों को आरोपी बनाया था। इसमें 11 की मौत ट्रायल के दौरान हो गई
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नई दिल्ली। चारा घोटाले में फंसे राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू यादव को सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी करार दिया है। सजा का एलान 3 जनवरी 2018 को होगा। जैसे ही ये खबर कोर्टरूम से बाहर आई तो वहां मौजूद लालू समर्थक रोने लगे। समर्थकों ने रोते हुए कहा ये क्या हो गया, हमारे नेता तो सजा हो गई। आपको बता दें कि सुबह से ही लालू समर्थक वहां डटे हुए थे। लालू के अलावा अन्य 14 आरोपियों को भी दोषी करार दिया गया है। ये केस 1994 से 1996 के बीच देवघर जिला कोषागार से फर्जी तरीके से निकाले गए 84.5 लाख रूपये से जुड़ा हुआ है।

इस फैसले के बाद लालू यादव कोर्ट से सीधे रांची की जेल जाएंगे। लालू यादव चारा घोटाले में मुख्य अभियुक्त थे और उनके ऊपर देवघर कोषागार से फर्जीवाड़ा कर 89 लाख रूपये निकालने का आरोप है। उन पर तीन जनवरी को सज़ा का ऐलान किया जाएगा। इसके बाद अब ये तय है कि लालू यादव को नया साल जेल में ही गुजारना होगा। फैसले के फौरन बाद पुलिस ने लालू यादव को अपने कब्जे में ले लिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बड़ी राहत
अदालत ने कुछ इस घोटाले में आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। रांची की सीबीआई अदालत ने लालू यादव समेत 15 लोगों को दोषी करार दिया है जबकि सज़ा का ऐलान तीन जनवरी को किया जाएगा। जबकि, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत सात लोगों को बरी कर दिया।
पटना आवास पर मायूसी
लालू यादव पर आए सीबीआई अदालत के फैसले के बाद लालू यादव का आवास पर सन्नाटा पसरा हुआ है। फैसले के बाद राष्ट्रीय जनता दल के नेता मनोज झा ने सीबीआई पर लालू यादव के प्रति पूर्वाग्रह से इस केस पर जांच का आरोप लगाया। देवघर कोषागार मामले में केसी त्यागी ने कहा कि लालू यादव के कई साथियों को सज़ा हुई थी और अब लालू यादव बाकी थी। उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति का एक अध्याय आज समाप्त हो गया। त्यागी ने कहा कि इसके बाद आरजेडी अपने गिरावट की ओर अग्रसर हो गयी है।
सीबीआई ने शुरु में 34 लोगों को आरोपी बनाया था
21 साल पुराने इस मामले में सीबीआई ने शुरु में 34 लोगों को आरोपी बनाया था। इसमें 11 की मौत ट्रायल के दौरान हो गई। दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए और निर्णय के पूर्व ही अपना दोष स्वीकार कर लिया। सीबीआई ने इस मामले में देवघर कोषागार से फर्जी बिल बना कर राशि की निकासी करने का आरोप लगाया था।आपूर्तिकर्ताओं पर बिना सामान की आपूर्ति किए बिल देने और विभाग के अधिकारियों पर बिना जांच किए उसे पास करने का आरोप है। लालू प्रसाद पर गड़बड़ी की जानकारी होने के बाद भी इस पर रोक नहीं लगाने का आरोप था। जिसमें उनको दोषी पाया गया है।












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