MP में शिवराज से ज्यादा मोदी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर, बीजेपी ने चुनाव प्रबंधन पर किया फोकस

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मध्य प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए चुनाव प्रबंधन पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रही है। पार्टी द्वारा किए गए तीन-चार सर्वेक्षणों ने सुझाव दिया है कि बीजेपी बड़े पैमाने पर विरोधी सत्ता का सामना कर रही है। इस सर्वेक्षण की सबसे दिलचस्प बात यह है कि सर्वे में बताया गया है कि, राज्य की तुलना में केंद्र के प्रति अधिक सत्ता विरोधी दिखाई दे रहे है। सूत्रों का कहना है कि, बीजेपी यह अच्छी तरह जानती है कि, विरोध पार्टी के खिलाफ है ना कि किसी व्यक्तिगत के खिलाफ।

 कांग्रेस ने पूरे देश में लोगों के दिमाग में बीजेपी सरकार को लेकर भ्रम पैदा कर दिया

कांग्रेस ने पूरे देश में लोगों के दिमाग में बीजेपी सरकार को लेकर भ्रम पैदा कर दिया

तीन-चार सर्वोक्षणों में सुझाव दिया गया है कि, सत्ता विरोधी लहर सबसे अधिक केंद्र सरकार के खिलाफ है। कांग्रेस जनता बीच डीजल-पेट्रोल , राफेल डील और अन्य कई मुद्दे उठाने में सफल रही है। कांग्रेस ने पूरे देश में लोगों के दिमाग में बीजेपी सरकार को लेकर भ्रम पैदा कर दिया है। ऐसी स्थिति में कई सीटों पर जीत का अंतर काफी कम हो जाएगा। इसलिए दोनों राजनीतिक दलों ना केवल इस मतों के अंतर को बढ़ाने के लिए रणनीति पर काम कर रहे हैं बल्कि बेहतर प्रबंधन भी कर रहे हैं, जिससे यह कम मार्जिन उनकी पक्ष में आ सके।

50 सीटों पर पूरा खेल

50 सीटों पर पूरा खेल

सूत्रों का कहा कि मध्यप्रदेश में बीजेपी अन्य चीजों के अलावा चुनाव प्रबंधन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है क्योंकि राज्य में लगभग 50 सीटें पर दोनों पक्षों के उम्मीदवारों के बीच अंतर 1000-2000 वोट का अंतर रहने की संभावना है। ऐसी स्थिति में बेहतर चुनाव प्रबंधन करने वाली पार्टी को फायदा मिलेगा। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि पिछले चुनाव में इसी तरह की स्थिति रही थी, जहां लगभग 50 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार 2500 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए थे। इससे साफ तौर पर पता चला कि कांग्रेस का प्रबंधन इन सीटों पर अच्छा नहीं था, जबकि बीजेपी ने इसे अच्छी तरह से मैनेज किया था।

जिसका मैनेजमेंट अच्छा होगा वो जीतेगा ये चुनाव

जिसका मैनेजमेंट अच्छा होगा वो जीतेगा ये चुनाव

इस बार सामने आई रिपोर्ट में साफ हो चुका है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच 30-40 सीटों का ही अंतर होगा। इस हिसाब से एंटी-इनकंबेंसी का असर वास्तव में 30-40 सीटों पर ही होगा। इसलिए दोनों पक्षों के लिए प्रबंधन को बेहतर रखना जरूरी है। सूत्रों का कहना है कि बीजेपी यह चुनाव फिर से तभी जीत सकती है अगर वह चुनावों को अच्छी तरह से मैनेज करेगी। उसने इस पर काम करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस इस बात को अच्छी तरह से समझ रही है। अब बीजेपी अधिक ध्यान चुनाव प्रबंधन पर केंद्रित कर रही है।

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