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Flashback 2019: कहीं आई बाढ़ तो कहीं फटा ज्वालामुखी, दुनियाभर में कहर बनकर टूटीं ये प्राकृतिक आपदाएं

नई दिल्‍ली। इस साल जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया को बाढ़, सूखा, आग और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा। दुनिया में कहीं जंगलों में आग लगी, तो कहीं ज्वालामुखी फट गया, तो कहीं भूस्खलन और चक्रवाती तूफान का कहर देखने को मिला। वैसे तो सभी देश हर साल किसी ना किसी तरह की प्राकृतिक आपदा का सामना करते ही हैं। चलिए जानते हैं कि 2019 में किस देश में कौन सी प्राकृतिक आपदा आई।

अमेजन के जंगलों में आग

अमेजन के जंगलों में आग

दुनिया के सबसे बड़े वर्षावन अमेजन में 2019 में रिकॉर्ड 73 हजार बार आग लगी। जो बीते साल से दो गुना अधिक है। नासा के मुताबिक आग इतनी बड़ी थी कि इसे अंतरिक्ष तक से देखा जा सकता था। अधिकतर आग स्थानीय किसानों ने लगाई थी क्योंकि वह फसलों के लिए अधिक जमीन चाहते थे।

20 फीसदी जंगल का सफाया

20 फीसदी जंगल का सफाया

खोजकर्ताओं की मानें तो बीते 5 दशक में 20 फीसदी जंगल का सफाया हो चुका है। अगर 20 फीसदी और सफाया हुआ तो ये जंगल सूखने लगेगा या फिर इसमें आग लग जाएगी। अमेजन जंगल का क्षेत्रफल 1345 स्क्वायर किमी तक कम हो गया है। यानी जापान की राजधानी टोक्यो जितने इलाके में फैली है उसका दोगुना क्षेत्र। इसकी सबसे बड़ी वजह पेड़ों की कटाई रिकॉर्ड स्तर पर होना है। रिकॉर्ड स्तर पर लगी आग के कारण पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस ओर कड़े कदम उठाए जाने की जरूरत है।

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में आग

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में आग

ऑस्ट्रेलिया में न्यू साउथ वेल्स और क्वीन्सलैंड में जंगलों में आग लग गई। इस आग के चलते 6 लोगों की मौत हो गई जबकि एक जुलाई तक हजारों घरों में भी आग लग गई। इनमें सबसे अधिक कोआला जीव प्रभावित हुए। आग के कारण करीब 25 फीसदी (करीब 2 हजार) कोआला जीवों की मौत हो गई। इससे सिडनी शहर की हवा इतनी दूषित कि कोई सोच भी नहीं सकता। यहां AQI स्तर 2552 पर पहुंच गया। जो कि खतरनाक का भी 13 गुना अधिक है। हैरानी की बात तो ये है कि 2019 में गूगल पर सबसे अधिक सर्च 'फायर नियर मी' हुआ।

विक्टोरिया फॉल्स

विक्टोरिया फॉल्स

उत्तरी अफ्रीकी देश जांबिया में स्थित विक्टोरिया फॉल्स को दुनिया के सात प्राकृतिक अजूबों में से एक माना जाता है। यहां इस साल पानी की काफी कमी हो गई। इसे सदी के सबसे बड़े सूखे तक का सामना करना पड़ा और पानी का स्तर बीते 25 साल के निचले स्तर पर आ गया। वैज्ञानिकों को डर है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ये झरना ही एक दिन खत्म हो जाएगा। वहीं साउथ अफ्रीका में बड़ी मात्रा में फसलें खराब हो गईं। जिससे 45 मिलियन लोगों को भोजन की कमी पड़ गई।

प्रदूषण का स्तर

प्रदूषण का स्तर

दिल्ली 2019 में दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया। यहां का AQI इस साल 999 को भी पार कर गया, जो कि बेहद ही खतरनाक स्तर माना जाता है। जहरीली हवा से लोगों की सेहत पर काफी बुरा असर पड़ा और उन्हें त्वचा रोग, एलर्जी, रैशिस और प्रीमैच्युर एजिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शहर में त्वचा संबंधी रोगों में 30 फीसदी की वृद्धि हो गई है। यहां तक कि दिल्ली सरकार को हेल्थ इमरजेंसी तक घोषित करनी पड़ी। जिसके तहत स्कूलों को बंद कर दिया गया और लोगों से कहा गया कि वह बाहर ना निकलें।

बाढ़ और सूखा

बाढ़ और सूखा

2019 में सूखे का सामना करने वाले शीर्ष 10 देशों की सूची में भारत का नाम भी शामिल रहा। यहां इस साल दो बड़ी प्राकृतिक आपदाएं आईं- एक सूखा और दूसरी बाढ़। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में लाखों लोगों को सूखे की समस्या से जूझना पड़ा, यहां तक कि लोगों को ठीक से पीने का पानी तक नहीं मिल पाया। हैदराबाद और सिकंदराबाद जैसे शहरों को भी पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर असम में मानसून में आई बाढ़ के कारण 30 लोगों की मौत हो गई और 5.8 मिलियन लोगों को विस्थापित होना पड़ा। केरल में आई बाढ़ में सौ से अधिक लोगों ने जान गंवाई। वैश्विक तौर पर सबकी नजर तूफान हार्वे और इमरा पर भी रही। जिसकी वजह से दक्षिण एशिया में 41 मिलियन लोगों को विस्थापित होना पड़ा।

पड़ोसी देशों में भी आई बाढ़

पड़ोसी देशों में भी आई बाढ़

भारत के अलावा पड़ोसी देश चीन, ईरान और पाकिस्तान में भी लोगों पर बाढ़ ने कहर बरपाया। साथ ही इटली की खूबसूरती को भी बाढ़ ने अपने साथ बहा लिया। फरवरी से अप्रैल माह के बीच पाकिस्तान के कई इलाकों मे भारी बारिश से बाढ़ आ गई। इसमें 140 से अधिक मौतें हुईं। वेनिस की 70 फीसदी ऐतिहासिक इमारत जलमग्‍न हो गईं और यहां आपातकाल लागू कर दिया गया। चीन में आए तूफान लेकिमा और जुलाई से अगस्त के बीच में आई बाढ़ से 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। जबकि 60 से अधिक लोग घायल हुए। वहीं मध्यपूर्वी देश ईरान के 31 में से 25 प्रांतों को बाढ़ का सामना कर पड़ा।

भूकंप का कहर

भूकंप का कहर

दुनिया के कई देशों को भूकंप के झटकों का भी सामना करना पड़ा। इस साल पाकिस्तान में 5.6 की तीव्रता से आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई और 40 लोगों की जान ले ली। कई लोग घायल भी हुए। करीब 10 सेकेंड तक भूकंप का झटका आता रहा। इस दौरान सड़कों में दरारें आ गईं। वहीं चीन के सिचुआन में दो बार भूकंप के झटके ने तबाही मचाई। एक बार 6.0 और दूसरी बार 5.4 की तीव्रता वाला भूकंप आया। इसके अलावा भूकंप के कारण अल्बानिया में भी धरती कांप गई। इस तबाही में यहां 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई।

आग की अन्य घटनाएं

आग की अन्य घटनाएं

नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस रिसर्च द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार बीते साल की तुलना में आग की घटनाओं में इस साल 85 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अमेजन और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों की आग के कहर के बारे में तो हर कोई जानता है। लेकिन इसी साल बोर्नियो के जंगलों में भी आग लगी है। अमेरिका के कैलिफोर्निया में भी जंगलों में आग लग गई। इसके बाद यहां लगभग 50 हजार लोगों को विस्थापित होना पड़ा। लॉस एंजलिस और सोनोमा काउंटी में इमर्जेंसी घोषित की गई थी।

तूफान और भूस्खलन की घटनाएं

तूफान और भूस्खलन की घटनाएं

अमेरिका में इस साल आए तूफान से थैंक्‍स गीविंग वीक के पहले ही दिन इतनी बर्फबारी और बारिश हुई कि सड़कों पर मोटी-मोटी बर्फ की परत जम गई। हिंद महासागर का सातवां बड़ा तूफान बुलबुल बंगाल की खाड़ी में आया। इससे पहले महा, फानी, वायु और क्यार जैसे तूफान भी आए। हिंद महासागर में आए तूफान से इसके उत्तर में बसे देश ईरान, पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश, पूर्व में मलय पेनिनसुला, इंडोनेशिया का सुंडा आइलैंड और पूर्व में ऑस्‍ट्रेलिया प्रभावित हुए। वहीं दक्षिण में अंटार्कटिका और पश्चिम में अफ्रीका और अरब पेनिनसुला प्रभावित हुए हैं। बता दें इसका दक्षिण पश्चिम हिस्‍सा अटलांटिक महासागर से जुड़ता है। इसके अलावा दुनिया के कई देशों में भूस्खलन की घटनाएं भी घटीं। भारत के पहाड़ी क्षेत्रों के साथ-साथ म्‍यांमार, नेपाल, केन्‍या जैसे देशों में भी इस साल भूस्खसन की कई घटनाएं हुई हैं।

न्यूजीलैंड में ज्लावामुखी फटा

न्यूजीलैंड में ज्लावामुखी फटा

9 दिसंबर को न्यूजीलैंड के व्हाइट आईलैंड में एक ज्वालामुखी विस्फोट हुआ। घटना के वक्त ज्वालामुखी के मुंहाने पर कई पर्यटक मौजूद थे। 14 दिसंबर तक 17 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। दो लोग अब भी लापता हैं। जबकि करीब 30 लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। ज्वालामुखी के एक बार फिर फटने के डर के बीच 6 शवों को कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन में बरामद किया गया है। पुलिस का कहना है कि लापता लोगों के बचने के चांस काफी कम हैं। पर्यटकों में ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और मलेशिया के लोग शामिल थे। बताया जा रहा है कि इनके साथ न्यूजीलैंड का गाइड भी वहां मौजूद था।

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