Flashback 2019: साल के वो बड़े घटनाक्रम जिन्होंने बदल दी देश की सियासी तस्वीर
नई दिल्ली- यह साल कई बड़े फैसलों और सियासी घटनाक्रमों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। पिछले एक साल में कई ऐसे बड़े फैसले हुए हैं, जिसकी चर्चा तो दशकों या सदियों से चली आ रही थी, लेकिन इसे अमलीजामा पहनाने का काम इस वर्ष हो पाया है। मसलन, अयोध्या का मसला हो या ट्रिपल तलाक या फिर जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाने का मसला। सबसे ताजा घटनाक्रम है नागरिकता (संशोधन) कानून का बनना, जिसको लेकर देश के कई हिस्सों में जोरदार विरोध हो रहा है। आइए पूरे साल भर के इन सभी महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर एक नजर डालते हैं, जो आने वाले दशकों तक देश की दशा और दिशा तय कर सकते हैं।
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नागरिकता (संशोधन) कानून
2019 के दिसंबर महीने में नागरिकता (संशोधन) कानून बनना, इस साल के सबसे महत्वपूर्ण सियासी घटनाक्रमों में से एक साबित हुई है। नागरिकता (संशोधन) विधेयक को लोकसभा ने 2 दिसंबर को पास किया, फिर 4 दिसंबर को इसपर राज्यसभा ने भी इसपर अपनी मुहर लगा दी। इस कानून के तहत 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के शिकार होकर भारत आए हिंदू, सिख, क्रिश्चियन, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है। हालांकि, इस कानून के खिलाफ पूरे देश में काफी विरोध भी देखने को मिल रहा है और मामला सुप्रीम कोर्ट के पास भी पहुंच चुका है।

कर्नाटक के नाटक का फिलहाल अंत
इसी महीने हुए कर्नाटक विधानसभा उपचुनाव में 9 दिसंबर को आए नतीजों के बाद 15 में से 12 सीटें जीतकर चार महीने पुरानी येदियुरप्पा सरकार ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। दरअसल, पिछले साल 15 मई को 222 सीटों पर हुए चुनाव के बाद बीजेपी ने 104, कांग्रेस ने 78 और जेडीएस ने 37 सीटें जीती थी। पहले येदियुरप्पा को सीएम बनाया गया, लेकिन वो विश्वास मत हासिल करने से पहले ही इस्तीफा देकर निकल लिए। इसके बाद कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन सरकार बनाई और नेतृत्व जेडीएस के कुमारस्वामी को दिया। किसी तरह वह सरकार एक साल तक ही चली थी कि कांग्रेस के कई विधायकों ने विद्रोह कर दिया। उस दौरान स्पीकर पद पर कांग्रेस के नेता थे, उन्होंने बागियों को अयोग्य ठहरा दिया। फिर कुमारस्वामी सरकार गिरने के बाद येदियुरप्पा ने किसी तरह बहुमत साबित किया। लेकिन, जब सुप्रीम कोर्ट ने भी कांग्रेस विधायकों की अयोग्यता बरकार रखी कि तो उन विधायकों का उप चुनाव जीतना येदियुरप्पा सरकार के लिए जरूरी हो गया था, नहीं तो वह संकट में पड़ सकती थी।

महाराष्ट्र में राजनीतिक कलाबाजी
इस साल 21 अक्टूबर को महाराष्ट्र विधानसभा के लिए वोटिंग हुई और 24 अक्टूबर को चुनाव नतीजे आ गए। चुनावों में बीजेपी-शिवसेना के चुनाव पूर्व गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिला। लेकिन, शिवसेना ने बीजेपी के सामने मुख्यमंत्री पद के लिए 50-50 यानि ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला रख दिया। जब भाजपा शिवसेना की इस शर्त के लिए तैयार नहीं हुई तो शिवसेना ने पाला बदलकर कांग्रेस और एनसीपी के साथ हाथ मिलाने का फैसला कर लिया। चुनाव नतीजे आने के कई दिनों बाद भी जब किसी पार्टी या गठबंधन ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया तो राज्यपाल ने सबको बारी-बारी से लिस्ट लेकर आने का मौका भी दिया। पहली बार जब सारी पार्टियां नाकाम रहीं तो वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। लेकिन, महाराष्ट्र की राजनीति में तब एक नया मोड़ आ गया, जब 23 नवंबर की सुबह राष्ट्रपति शासन हटाकर अचानक बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और एनसीपी विधायक दल के नेता अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी गई। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और उसने फ्लोर टेस्ट का आदेश दे दिया। लेकिन, जब अजित पवार एनसीपी विधायकों का समर्थन नहीं जुटा पाए तो उन्हें और फडणवीस को पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ गया। इसके बाद शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस ने वैचारिक मतभेदों को किनारे रखकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार बनाने का फैसला किया और पहली बार बाल ठाकरे के परिवार का कोई व्यक्ति राज्य का मुख्यमंत्री बना।

सैकड़ों वर्ष पुराना अयोध्या विवाद खत्म
इस साल 9 नवंबर की तारीख सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले से इतिहास में दर्ज हो गई। देश के तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने 40 दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद सदियों पुराने अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद का निपटारा कर दिया। पांचों विद्वान जजों ने एकमत से फैसला राम मंदिर के पक्ष में दिया। राम जन्मभूमि की 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन का मालिकाना हक खुद भगवान 'राम लला' को मिल गया और अदालत ने सरकार को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में ही सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को राम मंदिर के निर्माण और उसके संचालन के लिए एक ट्रस्ट बनाने का भी आदेश दिया। विवादित भूमि के एक और दावेदार निर्मोही अखाड़े को भी उसमें प्रतिनिधित्व देने का अदालत ने आदेश दिया है। इन तीनों आदेशों की तामील के लिए सरकार को 3 महीने का वक्त मिला है। सर्वोच्च अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ 18 पुनर्विचार याचिकाएं भी डाली गईं, जिसे मौजूदा चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की अगुवाई वाली संविधान पीठ ने ठुकरा दिया।

हरियाणा में फिर भाजपा सरकार
महाराष्ट्र के साथ ही 21 अक्टूबर को हरियाणा विधानसभा के लिए वोट डाले गए और 24 अक्टूबर को नतीजे आए। इस बार के चुनाव में 90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा में बीजेपी 45 सीटें लेकर बहुमत से पिछड़ गई। लेकिन, वह जननायक जनता पार्टी के 10 विधायकों के साथ मिलकर दोबारा सरकार बनाने में सफल रही। मनोहर लाल खट्टर लगातार दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने और दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री बनाए गए।

अर्थव्यस्था में मंदी का दौर
इस साल दूसरा कार्यकाल संभालने के बाद प्रधानमंत्री ने 2024 तक देश को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने का सपना देखा है, लेकिन आज दावे के साथ यह कहने के लिए कोई तैयार नहीं होगा कि इस लक्ष्य को हासल करने में कितने पापड़ बेलने पड़ सकते हैं। लगातार 6 तिमाहियों से जीडीपी में गिरावट का दौर जारी है और पिछली तिमाही में यह हाल के वर्षों में सबसे निचले स्तर 4.5% तक पहुंच चुकी है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में हल्के वाहनों की बिक्री घटने के बाद से मंदी की चर्चा हो रही है। घरेलू खपत में गिरावट आने से मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर धीमा हुआ है। इकोनॉमी को रफ्तार देने के लिए सरकार की ओर से कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन फिलहाल यह संकट में ही नजर आ रही है।

चंद्रयान-2 ने उम्मीद जगाकर निराश किया
इस साल 7 सितंबर को भारतीय मून मिशन के चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर को 7 सितंबर को चंद्रमा की दक्षिणी सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करना था। भारत ही नहीं पूरी दुनिया की इसको लेकर काफी उम्मीदें थीं। लेकिन, आखिरी वक्त में आई किसी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से लैंडर विक्रम का इसरो के अर्थ स्टेशन का संपर्क टूट गया, जिससे यह मिशन अधूरा ही रह गया। हालांकि, चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर अभी भी अपना काम कर रहा है और आने वाले कई वर्षों तक यह चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगाता रहेगा। 2 सितंबर को विक्रम इससे सफलतापूर्वक अलग हुआ था। वैसे इसरो का कहना है कि भले ही विक्रम चंद्रमा की दक्षिणी ध्रुप पर सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर पाया हो, लेकिन इस मिशन का अधिकतर लक्ष्य फिर भी पूरा किया जा चुका है। भारत के GSLV MkIII-M1 से 3,840 किलो वजनी चंद्रयान-2 स्पेसक्राफ्ट को 22 जुलाई को छोड़ा गया था।

जम्मू और कश्मीर से धारा-370 खत्म
5 अगस्त, 2019 को मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा राजनैतिक फैसला लिया। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली संविधान की धारा-370 खत्म कर दी गई और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने का ऐलान किया गया। इस फैसले से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर के सभी बड़े नेताओं को नजरबंद कर दिया गया और राज्य में संचार की सभी सेवाएं ठप कर दी गईं। बाद में केंद्र सरकार के इस फैसले को संसद के दोनों सदनों से पारित कर दिया गया। संविधान की इस धारा के खत्म होने के साथ ही जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति वैसी ही हो गई जैसा कि देश के दूसरे इलाकों की है। बाद में 31 अक्टूबर से जम्मू और कश्मीर राज्य दो केंद्र शासित प्रदेश बन गए और उस दिन से दोनों जगहों पर उपराज्यपाल ने शासन-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल ली। अब जम्मू-कश्मीर में एक विधानसभा का प्रावधान बरकरार है, लेकिन उसकी स्थिति दिल्ली या पुडुचेरी जैसी हो गई है।

ट्रिपल तलाक कानून लागू
इस साल सत्ता में वापसी के बाद मोदी सरकार का सबसे बड़ा फैसला ट्रिपल तलाक कानून बनाना रहा। पिछली बार दो-दो बार लोकसभा में यह बिल पास हो जाने के बाद राज्यसभा में यह विधेयक अटक जा रहा था। लेकिन, इस बार ट्रिपल तलाक जुलाई महीने में दोनों सदनों से पास होकर पिछले 6 महीने से कानून के तौर पर लागू है। इस कानून के बनने के बाद मुसलमानों में एक साथ या इंस्टेंट तीन तलाक देने की प्रथा गैर-कानूनी बन चुकी है। तीन तलाक बोलना, लिखना, एसएमएस या व्हाट्सएप करना भी गैरकानूनी हो चुका है। पत्नी को तीन तलाक देने वाले किसी भी शख्स को तीन साल तक की कैद की सजा भुगतनी पड़ सकती या इसके अलावा जुर्माना भी देना हो सकता है।

आम चुनाव- 2019
इस साल अप्रैल-मई में देश में आम चुनाव संपन्न हुए। नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार दोबारा पहले से ज्यादा सांसदों के साथ सत्ता में वापस लौटी। इस बार के लोकसभा चुनावों में भाजपा को अकेले 303 सांसद जीतकर संसद पहुंचे। 23 मई को आए चुनाव नतीजों के बाद 30 मई को मोदी सरकार ने शपथग्रहण के साथ अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया है। इसी बहुमत के दम पर मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल में लगातार बड़े-बड़े फैसले लिए हैं। लोकसभा चुनावों के साथ ही ओडिशा, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम विधानसभाओं के लिए भी वोट डाले गए।

एंटी-सैटेलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण
इसी साल 27 मार्च को भारत ने एंटी-सैटेलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया। यह भारत का इस तरह का पहला परीक्षण था। इसके तहत भारतीय मिसाइल ने अंतरिक्ष में लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद टारगेट को सफलतापूर्वक तरीके से खत्म कर दिया, जो कि करीब 300 किलो मीटर की दूरी पर मौजूद था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफल परीक्षण की घोषणा करते हुए इसे 'मिशन शक्ति' का नाम दिया।

पाकिस्तान से अभिनंदन की सकुशल वापसी
करीब 60 घंटे पाकिस्तान में रहने के बाद इस साल 1 मार्च को विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान सकुशल स्वदेश लौटे थे। दरअसल, 27 फरवरी को पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने भारतीय वायुसीमा में घुसपैठ करने की कोशिश की थी। इस दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को ललकारा था और मिग-21 की कमान संभाल रहे विंग कमांडर अभिनंदन ने अपनी बहादुरी और कुशलता का परिचय देते हुए पाकिस्तान के जंगी विमान एफ-16 को मार गिराया था। हालांकि, इस डॉग फाइट के दौरान उनका अपना मिग-21 क्रैश हो गया और अभिनंदन इजेक्ट करने के दौरान सीमा पार जा पहुंचे, जहां से पाकिस्तान ने उनको हिरासत में ले लिया था।

बालाकोट में आतंकी कैंपों पर एयर स्ट्राइक
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए सीआरपीएफ काफिले पर आतंकी हमले जवाब में भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी का रात में पाकिस्तान की सीमा में कई किलोमीटर घुसकर बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद कैंप को तबाह कर दिया था। इसे एयर स्ट्राइक का नाम दिया गया और इसमें 300 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की खबरें आईं, लेकिन पाकिस्तान ने आज तक उसकी पुष्टि नहीं की है। हालांकि, पहले तो पाकिस्तान ने कहा था कि जंगलों में कुछ झाड़ियां जली हैं, लेकिन बाद में इमरान कहते सुने गए थे कि भारत बालाकोट से भी बड़ा हमला करने की तैयारी कर रहा है।

पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर आतंकी हमला
इस साल की सबसे बड़ी आतंकी वारदात 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में घटी थी। वहां जैश-ए-मोहम्मद के फिदायीन हमलावर ने कार से सीआरपीएफ की एक वैन से टकराकर बड़ा विस्फोट किया था। इस वारदात में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना के 13 दिन के भीतर भारत ने बालाकोट में पाकिस्तानी आतंकियों की करतूत का बदला ले लिया था।












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