Flash Back 2020: हमारी दिनचर्या को बदल देने के लिए याद किया जाएगा 2020, कोरोना काल में बदली ये आदतें
Flash Back 2020: हमारी दिनचर्या को बदल देने के लिए याद किया जाएगा 2020, कोरोना काल में बदली ये आदतें
नई दिल्ली। हर एक साल को किसी ना किसी वजह से याद रखा जाता है। हर साल के इतिहास में कुछ अच्छे तो कुछ बुरे घटनाक्रम भी शामिल होते हैं। साल 2020 भी लेकिन काफी कुछ अलग है। ये ऐसा साल है, जिसमें कोरोना ने हर किसी की जिंदगी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर बदल दिया है। कोरोना वायरस के कारण हमारी आदतें और हमारी दिनचर्या काफी हद तक इस साल बदल गई है। इसमें ना सिर्फ कामकाज के तरीके शामिल हैं, बल्कि खानपान से लेकर घर-परिवार में रहने तक के तरीकों में बदलाव आया है। आइए जानते हैं, ऐसे कुछ आदतों की बात करते हैं जो इस साल लगभग हर किसी की बदल गई हैं।

बार-बार सैनेटाइजर का इस्तेमाल
सैनेटाइजर साथ रखना भारत या हमारे जैसे दूसरे देशों में कोई आम बात नहीं थी। आमतौर पर कोरोना महामारी के आने से पहले बहुत कम लोग ऐसे थे, जिनके पास आपको सैनेटाइजर मिलता था। मार्च के बाद साथ रखे जाने वाले सामानों में सबसे अहम सैनेटाइजर हो गया है। ना सिर्फ हाथों पर बार-बार सैनेटाइजर लगाना शुरू किया और ये आदत बन गया बल्कि घर के सामानों और छूने वाली सतहों के सैनिटाइजेशन के प्रति भी हमारी आदत बदल गई है।

चेहरे पर मास्क हुआ आम
इस साल मार्च से पहले चेहरे पर मास्क सिर्फ अस्पतालों के अंदर ही दिखते थे। पब्लिक पैलेस में बहुत मुश्किल से ही कभी कोई मास्क लगाए दिखता था। मास्क एक ऐसी चीज है, जो अब हम सबकी आदत बन गई है। आज चेहरे पर मास्क एकदम आम बात है और हर कोई इसके साथ दिखता है। यहां तक कि घरों में भी अब लोग मास्क पहने दिखते हैं। यहां तक कि जहां पहले लोग मास्क के साथ थोड़े अलग दिखते थे तो वहीं अब कोई मास्क के बिना दिखे तो अजीब लगते हैं और उनको लोग टोकते भी हैं कि आप ऐसा ना करें और एहतियात के लिहाज से मास्क पहनें।

बार-बार हाथ धोने की आदत
कोरोना संक्रमण के डर से हमारी साफ-सफाई की आदतों में एक बड़ा बदलाव आया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, स्वास्थ्य मंत्रालय, डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने कोरोना से बचने के लिए लगातार ये सलाह दी कि दिनभर समय-समय पर हाथ धोते रहने चाहिएं और कम से कम हाथों को 20 सेकेंड तक साबुन से धोना जरूरी है। धीरे-धीरे यह लोगों की आदत में शुमार हो गया।

बदला अभिवादन का तरीका, दूर से ही नमस्ते
कोरोना के बाद बहुत ज्यादा जोर 'देह से दूरी' पर दिया गया। लगातार ये अपील की गई कि मिलने-जुलने में कम से कम दो गज की दूरी बनाकर रखी जाए। इससे हाथ मिलाने या गले मिलने का सिलसिला कम हो गया। आमतौर पर लोगों ने हाथ जोड़कर नमस्ते को ही अपनाया। यहां तक कि यूरोप के लोगों में भी अभिवादन के लिए नमस्ते का चलन दिखा। क्योंकि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होने वाली इस बीमारी में हाथों के जरिए संक्रमण फैलने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। ऐसे में दूर से मिलना आदत हो गई है।

खानपान के तरीके बदले, इम्युनिटी बढ़ाने पर जोर
महामारी काल में जानलेवा वायरस से कैसे बचा जाए, ये चिंता सबको रही है। कोरोना के आने के करीब 10 महीने बाद भी कोरोना की वैक्सीन नहीं आ सकी है। ऐसे में कोरोना से बचने का कारगर तरीका एहतियात रखना और इम्युनिटी बढ़ाना ही रहा। इस सबसे हमारे खान-पान की आदत को भी बदल डाला है। ऐसे में देखा जा रहा है कि खानपान में हेल्थी चीजें बढ़ रही हैं।

वर्क फ्रॉम होम का चलन
कोरोना संकट के दौरान एक बड़ा बदलाव ऑफिस कल्चर में भी हुआ। संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए आईटी से लेकर मार्केटिंग सेक्टर ने भी घर से काम करने की सुविधा दी है। लोग ऑफिस जाने की बजाय घर से काम कर रहे हैं। ऐसा लंबा वक्त बाद देखने को मिल रहा है कि बड़े-बड़े ऑफिस घर से ही चल रहे हैं। जो लोग दफ्तर से काम कर रहे हैं वो भी एक दूरी बनाकर बैठ रहे हैं।
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