मोदी सरकार की नोटबंदी की संवैधानिक वैधता की जांच के लिए 5 जजों की बेंच: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट केंद्र की उस आपत्ति को ठुकरा दिया जिसमें उसने कहा था कि नोटबंदी का मामला न्यायिक जांच के दायरे में नहीं आता।
नई दिल्ली। केंद्र की आपत्ति को दरकिनार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पांच जजों की एक संवैधानिक बेंच के गठन का फैसला लिया है जो 8 नवंबर के मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले की वैधता की जांच करेगी।

पांच जजों की बेंच बनाने का फैसला
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि 8 नवंबर को 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का फैसला वैध है या नहीं, इसके निर्णय के लिए पांच जजों की एक संवैधानिक बेंच गठित की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की उस आपत्ति को ठुकरा दिया जिसमें इसने कहा था कि नोटबंदी का फैसला कार्यपालिका के क्षेत्र में आता है और यह न्यायिक जांच के दायरे में नहीं आता।
सरकार को दी सुप्रीम कोर्ट ने राहत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह नोटबंदी को लागू करने के सरकारी काम में दखल नहीं देगी। इससे सरकार को बहुत राहत मिली है।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी से संबंधित केसों को हाई कोर्ट और लोअर कोर्ट में चलाने पर पाबंदी लगा दी। अब इस मामले की सुनवाई सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी लागू करने में लगी सरकार से कहा है कि वह सुनिश्चित करें कि किए गए वादे के मुताबिक जनता को हर सप्ताह 24,000 रुपए कैश मिले।












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