देश में पहली बार! 5 साल के बच्चे का हुआ एन-ब्लॉक किडनी प्रत्यारोपण, अस्पताल से मिली छुट्टी
नई दिल्ली, 16 सितंबर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में 5 वर्ष के बच्चे का सफल एन-ब्लॉक किडनी प्रत्यारोण किया गया। देश में यह पहला मामला है जब इतने कम उम्र के बच्चे का प्रत्यारोपण किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक किडनी प्रत्यारोपण के बाद बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी भी दे गई है। 5 साल के बच्चे का डोनर 16 महीने का एक बच्चा था, जिसे एम्स में ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था और उसके अंगों को दूसरों की जान बचाने के लिए दान कर दिया गया था।

ये भी पढ़ें- युवाओं के लिए गुड न्यूज, 1 सप्ताह के भीतर जारी होगा कैलेंडर, लोक सेवा आयोग का ये है 23 परीक्षाओं का प्लान

ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित था बच्चा
एडिशनल डॉ. मंजूनाथ मारुति पोल ने कहा ने समाचार एजेंसी को बताया कि जिस बच्चे को किडनी प्रत्यारोपण किया गया, उसकी उम्र 5 वर्ष है और बच्चे का वजन 13 किलो है। डॉ. पोल के मुताबिक बच्चा ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित था, जिसकी वजह से उसकी दोनों किडनी खराब हो गई थी। हालांकि, उसकी किडनी ठीक तरह से काम करें, इसके लिए लंबे समय से डायलेसिस किया जा रहा था। बावजूद उसकी दोनों किडनी खराब हो गईं थीं।

काफी चुनौतीपूर्ण थी सर्जरी
डॉ. के मुताबिक बच्चें में छोटे-कैलिबर वाहिकाओं के कारण सर्जरी तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होती है। क्योंकि बच्चों का शरीर पूरी तरह से विकसित नहीं होता है। इसकी वजह से कई तरह की सावधानियां बरतनी पड़ती है। यही वजह है कि एन-ब्लॉक किडनी ट्रांसप्लांट बच्चों में तब किया जाता है, जब कम उम्र का डोनर उसे डोनेट करता है। इसके अलावा प्रत्यारोपण के दौरान, दाता महाधमनी और IVC के समीपस्थ (सुपररेनल) भाग को शल्य चिकित्सा द्वारा बंद कर दिया जाता है और दाता महाधमनी और IVC के बाहर के खंड को इलियाक वाहिकाओं में जोड़ दिया जाता है।

टीम वर्क के साथ किया गया प्रत्यारोपण
डॉ. के मुताबिक इस केस में बच्चे में विकास मंदता के कारण मरीजों के इलियाक वाहिकाओं छोटे कैलिबर (पुनरोद्धार के लिए अपर्याप्त) के थे। इसलिए, दाताओं के महाधमनी को प्राप्तकर्ताओं के महाधमनी और दाताओं के आईवीसी को प्राप्तकर्ताओं के लिए एनास्टोमोस्ड किया गया था। डॉ. पोल ने कहा कि यह टीम वर्क है और हमने टीमों में काम किया। किडनी प्रत्यारोपण के लिए प्रो. संदीप अग्रवाल (सर्जरी यूनिट-2 के प्रमुख), प्रो. सीनू (किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए नोडल अधिकारी) और प्रो. सुनील चुम्बर (सर्जरी विभाग के प्रमुख) ने आवश्यक सहायता प्रदान की। जबकि पेरी-ऑपरेटिव क्रिटिकल केयर पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. अरविंद बग्गा और उनकी टीम द्वारा प्रदान किया गया था।

सोनीपत का रहने वाला है बच्चा
डॉक्टरों के मुताबिक जिस बच्चों की किडनी ट्रांसप्लांट की गई, वह मूलरूप से हरियाणा के सोनीपत जिले का रहने वाला है। एन-ब्लॉक किडनी ट्रांसप्लांट में बच्चे की दोनों किडनियों के साथ दिल तक जाने वाली नसों को भी बदला गया है। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि बच्चे को बाद किसी प्रकार दिक्कत न हो। डॉक्टरों के मुताबिक अब बच्चा सामान्य जीवन जी सकेगा।












Click it and Unblock the Notifications