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सितंबर में मिलेगा इंडियन एयरफोर्स को पहला राफेल जेट, लीबिया के युद्ध में तोड़ी थी गद्दाफी सेना की कमर

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नई दिल्‍ली। देश में चुनावों से पहले राफेल डील पर जारी संग्राम के बीच ही एक खबर फ्रांस से आ रही है। इस खबर के मुताबिक इस वर्ष सितंबर में इंडियन एयरफोर्स को पहला राफेल जेट डिलीवर कर दिया जाएगा। इंडियन एयरफोर्स के एक अधिकारी की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। नवंबर माह में फ्रांस में उस राफेल जेट का परीक्षण किया गया था जिन्‍हें खासतौर पर भारत के लिए बनाया गया है। भारत ने फ्रांस से साल 2015 में 36 राफेल जेट्स की डील 59,000 करोड़ रुपए में की थी।

तय समय पर चल रहा है प्रोग्राम

तय समय पर चल रहा है प्रोग्राम

एक अधिकारी की ओर से मंगलवार को न्‍यूज एजेंसी एएनआई को जानकारी दी गई है कि राफेल प्रोग्राम तय समय के मुताबिक है और इस वर्ष पहला राफेल जेट मिल जाएगा। उन्‍होंने बताया है कि फ्रांस में इंडियन एयरफोर्स को यह जेट सौंपा जाएगा और फिर इसे भारत लाया जाएगा। नवंबर 2018 में फ्रांस के इस्‍त्रे-ले-ट्यूब जो कि मार्सीले में हैं, वहां पर आईएएफ के लिए तैयार राफेल को लैंड कराया गया था। इस टेस्‍ट के दौरान राफेल को रनवे पर लैंड कराया गया और फिर उसके कई टेस्‍ट किए गए है। इन सभी टेस्‍ट्स के बाद इस फाइटर जेट ने अपनी पहली सफल उड़ान को पूरा किया। इस खबर के बीच ही इंडियन एयरफोर्स के वाइस चीफ अनिल खोसला ने कहा है कि राफेल के वायुसेना में शामिल होने से, सेना की युद्धक क्षमता में और इजाफा होगा।

लीबिया में सबसे पहले पहुंचा राफेल

लीबिया में सबसे पहले पहुंचा राफेल

राफेल को साल 2011 में लीबिया में हुए सिविल वॉर में बड़े पैमाने पर प्रयोग किया गया था। फ्रांस की सेना ने ऑपरेशन हारमाट्टान लॉन्‍च किया। इस पूरे ऑपरेशन में राफेल फाइटर जेट सहारा के रेगिस्‍तान के ऊपर उड़ान भरते। इसके बाद अमेरिकी सेनाएं और फिर ब्रिटिश सेना लीबिया में दाखिल हो गईं। इसके बाद कनाडा की सेना भी लीबिया में कूद पड़ी। लीबिया के सिविल वॉर में नो फ्लाइ जोन डिक्‍लेयर किया गया ताकि तानाशाह मुआम्‍मार गद्दाफी की सेना किसी तरह का कोई कदम न उठा सके। 19 मार्च 2011 को पेरिस में इस पूरे मिलिट्री एक्‍शन की तैयारी हुई थी। इस मीटिंग के बाद राफेल, लीबिया में दाखिल हुए। राफेल पहले फाइटर जेट्स थे जिन्‍होंने लीबिया की सेनाओं को निशाना बनाया और चार टैंक्‍स तबाह कर डाले थे।

साल 2007 से चल रही थी प्रक्रिया

साल 2007 से चल रही थी प्रक्रिया

साल 2007 में 126 एमएमआरसीए के लिए टेंडर निकाले गए थे। इसके बाद एयरफोर्स ने ट्रायल किया और फिर राफेल को चुना गया। तीन वर्षों तक चली बातचीत के बाद जून 2015 में इस डील को खारिज कर दिया गया। इसके बाद अप्रैल 2015 में केंद्र की मोदी सरकार ने 36 राफेल फाइटर्स को खरीदने का फैसला किया। इसके अलावा तत्‍कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने उस समय स्‍वीडन में बने ग्रिपेन और अमेरिकी फाइटर जेट एफ-16 को खरीदने के बारे में भी जानकारी दी थी।

क्‍या हैं खासियतें

राफेल एक बार में करीब 26 टन (26 हजार किलोग्राम) वजन के साथ उड़ान भरने में सक्षम है। यह जेट 3,700 किलोमीटर के दायरे में कहीं भी हमला कर सकता है। इसके अलावा यह 36,000 से 60,000 फीट की अधिकतम ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है और यहां तक महज एक मिनट में पहुंच सकता है। एक बार टैंक फुल होने के बाद यह लगातार 10 घंटे तक हवा में रह सकता है। राफेल को हवा से जमीन और हवा से हवा में दोनों में हमला करने में प्रयोग किया जा सकता है। राफेल पर लगी गन एक मिनट में 125 फायर कर सकती है और यह हर मौसम में लंबी दूरी के खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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English summary
First Rafale aircraft to be delivered to Indian Air Force in September this year and the programme is on schedule.
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