Bihar Elections: पहले चरण में महागठबंधन की अग्निपरीक्षा, RJD की सबसे अधिक सीटें दांव पर

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Elections) का प्रचार अभियान अपने पूरे चरम पर है। पहले चरण की 71 सीटों के लिए 28 अक्टूबर को वोट डाले जाने हैं। इन 71 सीटों के चुनाव में महागठबंधन की अग्निपरीक्षा होने वाली है क्योंकि आधे से ज्यादा सीटों पर वर्तमान में महागठबंधन का कब्जा है।

Tejashwi Yadav

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    बिहार चुनाव के पहले चरण की जिन 71 सीटों पर मतदान होना है उनमें से 37 सीटें अभी महागठबंधन के कब्जे में हैं। वहीं आरजेडी (RJD) के लिए तो ये चरण कुछ ज्यादा ही खास है। आरजेडी की 28 सीटें इस चरण में दांव पर लगी होंगी जहां उसने 2015 में जीत दर्ज की थी। मोकामा सीट को भी ले लें तो ये संख्या 28 हो जाएंगी। पिछली बार मोकामा से निर्दलीय चुनाव जीते अनंत सिंह इस बार राजद के टिकट पर मैदान में हैं। महागठबंधन की दूसरी सहयोगी कांग्रेस को इस चरण में 9 सीटों पर जीत मिली थी।

    एनडीए के लिए भी खास
    सिर्फ महागठबंधन ही नहीं बल्कि एनडीए (NDA) के लिए भी ये चरण खास है। राजद के बाद दूसरे नंबर नीतीश कुमार की जेडीयू थी जिसने 19 सीटों पर पिछले चुनाव में जीत दर्ज की थी वहीं 12 सीट पर एनडीए की दूसरी सहयोगी भाजपा के विधायक हैं। यहां ये बात बता दें कि 2015 के चुनाव में जेडीयू ने महागठबंधन में शामिल होकर चुनाव लड़ा था। बाद में नीतीश फिर से एनडीए में शामिल हो गए थे।

    पहले चरण में ही इमामगंज (सुरक्षित) सीट भी है जहां पिछले चुनाव में हम के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं चेनारी (सुरक्षित) सीट से आरएलएसपी के टिकट पर ललन पासवान ने जीत दर्ज की थी। इस बार जीतनराम मांझी एनडीए के कोटे से मैदान में है तो ललन पासवान जेडीयू में शामिल हो चुके हैं।

    2015 से बिलकुल बदला होगा चुनाव
    2015 के विधानसभा चुनाव की तरह ही इस बार भी मुकाबला महागठबंधन और एनडीए के बीच ही हो रहा है लेकिन परिस्थितियां पूरी तरह से बदल चुकी हैं। 25 साल बाद लालू और नीतीश विधानसभा चुनाव में साथ आए थे। इसके पहले 1990 का चुनाव में दोनों साथ थे। जब नतीजे आए तो महागठबंधन ने क्लीन स्वीप किया था। आरजेडी 80 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल था तो नीतीश की जेडीयू को 71 सीटें मिलीं। कांग्रेस भी महागठबंधन में शामिल थी और उसे 27 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं एनडीए में बीजेपी के साथ लोक जनशक्ति पार्टी और हम साथ थी। इनमें बीजेपी को 53 सीट ही मिली। लोजपा और हम को 2-2 सीटों पर जीत मिली।

    चुनाव में महागठबंधन को बहुमत मिला और नीतीश के नेतृत्व में सरकार बनी लेकिन 16 महीने में दूरियां इतनी बढ़ीं कि दोनों अलग हो गए। नीतीश एक बार फिर भाजपा के साथ आए और फिर मुख्यमंत्री बने। इस बार भी एनडीए का मुख्यमंत्री चेहरा हैं। अगर वर्तमान गठबंधन के आधार देखें तो एनडीए के पास भी पहले चरण में 31 सीटें हैं लेकिन फिर भी महागठबंधन के मुकाबले ये कम ही है। ऐसे में पहला चरण न सिर्फ महागठबंधन बल्कि एनडीए के लिए भी खास है।

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