सांसदों-विधायकों से जुड़े क्रिमनल केस का एक साल में हो निपटारा: SC

Supreme Court
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि संसद और विधानसभा के सदस्यों के खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक मुकदमों की सुनवाई एक साल के अंदर पूरी की जाए। इसके लिए आवश्यकता हो तो प्रतिदिन सुनवाई की जाए ।न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 8(1), 8(2) और 8(3) के तहत दर्ज मुकदमों की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी की जाए।

न्यायालय ने कहा कि यदि किसी विशेष, असाधारण परिस्थितियों में सुनवाई पूरी नहीं हो पाती तो इसकी जानकारी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को दी जाएगी और उन्हें इसका उचित कारण भी बताया जाएगा, जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश मुकदमों की सुनवाई के लिए समय बढ़ाने या अन्य उचित निर्देश देंगे।न्यायालय ने यह निर्देश पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है, जो देश की राजनीति को अपराधमुक्त करना चाहती है।

इस फैसले के साथ सर्वोच्च अदालत ने इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में बदलाव के विषय को आगे बढ़ाया है। पिछले साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने क्रिमिनल मामलों में दोषी ठहराए गए राजनेताओं के सांसद-विधायक पद पर बने रहने और चुनाव लड़ने की योग्यता समाप्त कर दी थी। कोर्ट के इस आदेश के बाद से कई बड़े नेताओं के खिलाफ मामलों की जल्द सुनवाई और फैसले का रास्ता खुल गया है।

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