अक्षय कुमार की 'सम्राट पृथ्वीराज' इन तीन वजहों से बॉक्स ऑफिस पर नहीं दिखा पाई कमाल

अभिनेता अक्षय कुमार और मिस वर्ल्ड का खिताब जीत चुकीं मानुषी छिल्लर की फ़िल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' हाल ही में रिलीज़ हुई है. इस फ़िल्म का बॉक्स ऑफ़िस पर प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. विशेषज्ञों की मानें तो ये फ़िल्म बॉक्स ऑफिस के हिसाब से इस साल की एक बड़ी फ्लॉप फ़िल्म साबित हो सकती है.

हालांकि, इस फ़िल्म से पहले इसका बड़े स्तर पर प्रमोशन किया गया था. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृह मंत्री अमित शाह और संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस फ़िल्म को देखकर इसके लिए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी. उत्तर प्रदेश में फ़िल्म को टैक्स फ्री भी किया गया.

एक विशेष वर्ग से फ़िल्म को काफ़ी समर्थन मिला था. लेकिन, फिर भी फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस खास कमाल नहीं दिखा पाई. इसके पीछे मुख्यतौर पर तीन वजह नज़र आती है.

फ़िल्म से पहले विवाद

अभिनेता अक्षय कुमार की फ़िल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' इस साल आने वाली बड़ी फ़िल्मों में से एक थी. यशराज फिलम्स के बैनर तले बनी ये फ़िल्म लंबे समय से चर्चा में बनी हुई थी. रिलीज़ से पहले फ़िल्म कई वजहों से विवादों में घिरी हुई थी. पहली वजह थी करणी सेना की मांग को पूरा करते हुए फ़िल्म पृथ्वीराज के आगे सम्राट लगाना.

दूसरी वजह थी अक्षय कुमार के गुटखा विज्ञापन में शामिल होने से शुरू हुआ विवाद. अक्षय कुमार ने इस फ़िल्म में सम्राट पृथ्वीराज की भूमिका निभाई है और फ़िल्म आने से कुछ समय पहले ही उनकी गुटखे का एक विज्ञापन करने के चलते सोशल मीडिया पर आलोचना हुई थी.

फ़िल्म विशेषज्ञ गिरीश वानखेड़े कहते हैं, ''अक्षय कुमार की फिल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' को दर्शकों ने ज़्यादा पसंद नहीं किया. तीन जून को फ़िल्म रिलीज़ हुई और इसका पहले दिन का कलेक्शन था 10.5 करोड़, दूसरे दिन का कलेक्शन था 12. 5 करोड़ और तीन दिनों में इस फ़िल्म ने कमाई की थी 39 करोड़ की. पहले दिन की जो कमाई आती है अगर वही कमाई अगले सोमवार तक रहे तो फ़िल्म सफल कही जाती है लेकिन इस फ़िल्म के साथ ऐसा नहीं हो पाया. इस फ़िल्म का सोमवार का कलेक्शन था 5 करोड़ जो कि बहुत कम था.''

''सोमवार को अगर कलेक्शन पहले दिन से आधा होता है तो फ़िल्म असफल मानी जाती है. सोमवार को जहां कलेक्शन 5 करोड़ था तो वहीं मंगलवार तक इसकी कमाई सिर्फ़ 4 करोड़ पर आ गई. कुल मिला कर इस फ़िल्म की 5 दिन की कमाई हुई 47 करोड़. इसकी कमाई को देखते हुए इसे फ्लॉप फ़िल्म कहा जा सकता है. बॉक्स ऑफिस में अगर इसने सिर्फ़ पांच दिनों में 47 करोड़ की कमाई की है तो इसका मतलब प्रोड्यूसर के हिस्से में बहुत काम आया है जबकि फ़िल्म की पूरी लागत ही 300 करोड़ है.''

गिरीश बॉक्स ऑफिस का पूरा हिसाब बताते हैं, ''अगर इस फ़िल्म को थोड़ा भी हिट होना था तो इसका कलेक्शन बॉक्स ऑफ़िस में 250 करोड़ होना चाहिए था क्योंकि फिर सैटेलाइट और डिजिटल राइट्स देकर और कमाई के बाद इसे एक सफ़ल फिल्म साबित किया जा सकता था लेकिन जो फ़िल्म 47 करोड़ कमाने के लिए भी संघर्ष कर रही हो उसे और क्या कह सकते हैं. आने वाले दिनों में भी अगर ये ठीक प्रदर्शन करे तो भी 75 करोड़ के आगे नहीं बढ़ पाएगी और अगर इतना भी नहीं कर पाई तो इस साल की सबसे बड़ी फ्लॉप फ़िल्म में इसका नाम शामिल हो जाएगा.

सोशल मीडिया
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बढ़ गया रिजेक्शन रेट

फ़िल्म समीक्षक और वरिष्ठ पत्रकार रामचंद्रन श्रीनिवासन कहते हैं, ''इन दिनों बॉलीवुड की कई फ़िल्में नहीं चल रही हैं. हाल ही में रिलीज़ बॉलीवुड की हिंदी फ़िल्मों का ज़िक्र करें तो 'द कश्मीर फाइल्स' और 'भूल भुलैया 2' ही है जिसने इस साल कुछ अच्छा बिज़नेस किया है. अगर 'केजीएफ 2' और 'आरआरआर' की बात करूं तो ये हिंदी डब फ़िल्म थी जो हिट हुई. ऐसे वक़्त में जहाँ बहुत कम फ़िल्म ही अपना कमाल दिखा पा रही हैं ऐसे में चाहिए कि कंटेंट ऐसा हो जो पहले कभी नहीं देखा हो और साथ में उसकी क्वालिटी भी उतनी अच्छी होनी चाहिए. लेकिन, ये बाद फ़िल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' में नहीं थी.''

रामचंद्रन श्रीनिवासन कहते हैं कि लोग सोशल मीडिया पर आरआरआर की मेकिंग की चर्चा कर रहे हैं क्योंकि वो भी एक ऐतिहासिक कल्पना है और उसके मुक़ाबले 'सम्राट पृथ्वीराज' काफ़ी कमज़ोर है. दो फ़िल्मों की जब तुलना होती है तो लोग अपनी-अपनी राय रखते हैं. वहीं, कोरोना के बाद से ओटीटी इतना बड़ा हो गया है कि लोगों का रिजेक्शन रेट काफी ज़्यादा बढ़ गया है. उदहारण के लिए अपनी बात बताता हूँ. ओटीटी पर अगर मुझे कोई सीन या गाना नहीं अच्छा लगता है तो मैं उसे फॉरवर्ड कर के जल्दी-जल्दी फ़िल्म देखने की कोशिश करता हूँ. ऐसे समय में अगर आप लोगों को थिएटर में बाँधकर रखना चाहते हैं तो कंटेंट बहुत अच्छा होना चाहिए नहीं तो लोग नहीं देखने आएंगे.

हर बार प्रोपेगेंडा कार्ड नहीं चलेगा

रामचंद्रन श्रीनिवासन का ये भी मानना है कि हर बार प्रोपेगेंडा कार्ड नहीं चलता है.

वह कहते हैं, ''लोगों से फ़िल्म देखने को लेकर कितना भी निवेदन कर लो लेकिन फ़िल्म में दम नहीं है तो लोग कैसे पैसे खर्च करेंगे? हाल ही में रिलीज़ फ़िल्म 'द कश्मीर फाइल्स' को देखें तो वो सारी चीज़ उसमें हैं जिस चीज़ को हम सिनेमा नहीं बोलते हैं. उन्होंने कहा इसमें ड्रामा नहीं है. ये फ़िल्म लोगों को असलियत के बहुत नज़दीक लाई. लोगों को भी यही लगा कि ये कहानी हमारे इतिहास में नहीं है. यही आईडिया इस्तेमाल किया गया 'सम्राट पृथ्वीराज' फ़िल्म के लिए और उन्होंने भी यही कहा कि ये हमारे इतिहास में नहीं है. लेकिन ये कार्ड नहीं चला. हर बार प्रोपेगेंडा कार्ड नहीं चलेगा ये बात भी समझने की ज़रुरत है.''

फ़िल्मी प्रोपेगेंडा का ज़िक्र करते हुए एनालिस्ट गिरीश वानखेड़े भी यही कहते हैं, ''आप गंगा में आरती कर रहे हैं या फिर डुबकी लगा रहे हैं. या मोदी जी और शाह जी इसका प्रमोशन कर रहे हैं तो उस सबसे ये बहुत प्रोपेगेंडा फ़िल्म लग रही है और ऐसी फ़िल्म को लोग पसंद नहीं करते. इससे ऐसा लगता है कि कट्टर हिंदूत्व की बात कर रहे हैं. सोशल मीडिया में ऐतिहासिक तथ्यों लेकर को भी विवाद था. ये भी एक कारण हो सकता है कि लोगों की रूचि इस फ़िल्म में ना रही हो.''

अक्षय फिट नहीं बैठे

'सम्राट पृथ्वीराज' फ़िल्म में अक्षय कुमार के पूरी तरह फिट ना बैठने की भी चर्चा हो रही है. उनके बोलने के लहज़े से लेकर उम्र को लेकर भी तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं.

रामचंद्रन श्रीनिवासन कहते हैं, ''अब लोग जागरूक हो गए हैं. एक ज़माना था जब लोग जीतेन्द्र और धर्मेंद्र को कॉलेज स्टूडेंट समझते थे. वो 40 के होने के बावजूद कॉलेज छात्रों का किरदार निभाते थे. आमिर ख़ान ने भी 3 इडियट्स में कॉलेज छात्र का किरदार निभाया है लेकिन अगर आप देखें तो आमिर शायद थोड़े बहुत कॉलेज स्टूडेंट लगे भी लेकिन आज की ऑडियंस सिनेमा में हकीकत देखना चाहती है. 26 साल वाले रोल में अगर 56 साल के एक्टर रहेंगे तो वो लोगों को कुछ अटपटा ज़रूर लगेगा.''

''आप देखिये ना अक्षय को कितने साल हो गए इंडस्ट्री में. वो जब इंडस्ट्री में आये थे तब 26 के थे. शायद उस समय ये रोल उन पर फिट बैठ जाता लेकिन अब नहीं बैठ रहा है. अब ऑडियंस भी अपनी राय दे रही है कि इस किरदार को किसी युवा अभिनेता को करना चाहिए था. हमारी इंडस्ट्री के बड़े अभिनेताओं को अब ये बात समझनी चाहिए और मान लेनी चाहिए कि अब कुछ अलग किरदार निभाने की ज़रुरत है.''

कलाकारों की उम्र और उनके चुने किरदारों को लेकर रामचंद्रन श्रीनिवासन कहते हैं, ''हाल ही में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने भी इस बात को स्वीकार किया कि फ़िल्म 'मैरी कॉम' में अगर कोई पूर्वोत्तर की लड़की होती तो वो फ़िल्म बेहतर लगती. मैंने शायद उनका मौका छीन लिया है. मुझे लगता है कि प्रियंका की कही ये बात सही भी है. आज सब जागरूक हैं और आप समझ भी रहे हैं कि बहुत सारी फ़िल्में नहीं चल रही हैं. अक्षय की ही बात करूँ तो उनकी 'बच्चन पांडे' फ्लॉप रही और अब 'सम्राट पृथ्वीराज' की भी ज़्यादा कमाई नहीं हुई है. इसे देखते हुए ज़ाहिर सी बात है की लोग सच्चाई के करीब रहना चाहते हैं. उनकी मूँछ की बाला फ़िल्म के किरदार से भी तुलना हुई थी और वो ट्रोल हुए थे.'

फ़िल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' में अक्षय कुमार के अलावा मानुषी छिल्लर संयोगिता के किरदार में नज़र आती हैं. अभिनेता संजय दत्त काका कान्हा के किरदार में और अभिनेता सोनू सूद चंदबरदाई के किरदार में हैं. फ़िल्म का निर्देशन चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने किया है.

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