इतिहास के पन्नों से- फिरोज गांधी और इलाहाबाद के पारसी
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) आमतौर पर माना जाता है कि पारसी समाज कुल मिलाकर मुंबई या महाराष्ट्र में ही बसा हुआ है। हालांकि हकीकत ये है कि कुछ पारसी परिवार देश के सभी खास शहरों में हैं। इनमें उत्तर प्रदेश का इलाहाबाद भी है। हालांकि इधर टाटा, वाडिया या गोदरेज सरीखे नामवर पारसी परिवार तो कोई नहीं रहते, पर कुछेक परिवार अब इधर रहते हैं इस समाज से जुड़े हुए। [रोचक ऐतिहासिक तथ्य]

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी भी इसी प्रयाग शहर से ताल्लुक रखते थे। यानी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पिता का संबंध इलाहाबाद से ही था। यानी सोनिया गांधी के ससुर और राहुल गांधी के दादा फिरोज गांधी।
अब एक अनुमान के अएनुसार, करीब दो दर्जन पारसी इलाहाबाद में रहते हैं। कुछ समय पहले इनके सामने एक संकट ये पैदा हो गया था कि इनके धार्मिक स्थान का पुजारी,जिसे ये रब्बी कहते हैं, नौकरी छोड़कर चला गया था। इसके चलते इन्हें बहुत दिक्कत होती थी।
वैसे बात दें कि दो-तीन पारसी परिवार कानपुर में भी रहते हैं। इलाहाबाद से संबंध रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्केडेंय काटजू ने भी एक बार अपने ब्लाग में इलाहाबाद के पारसी समाज का जिक्र किया था। वे भी इलाहाबाद से ही आते हैं।
पारसी कब्रिस्तान
इलाहाबाद के स्टेनले रोड पर एक पारसी कब्रिस्तान भी है। इधर ही फिरोज गांधी की अस्थियों को दफन किया गया था। उनका अंतिम संस्कार तो दिल्ली में हुआ था, पर उनकी कुछ अस्थियों को इधर दफन किया गया था।
दस हजार पारसी
इलाहाबाद के पुराने लोग बताते हैं कि एक दौर में इधर करीब 5 हजार पारसी रहते थे। पर बाद के सालों में वे देश से बाहर या बड़े शहरों में जाकर बसते रहे। ज्यादातर सिविल लाइंस में रहते थे।
पारसी अंजुमन
इलाहाबदा में पारसी अंजुमन भी है। एकदौर में इधर डायरस दादीवाला नाम के पारसी शख्स काफी एक्टिव थे। अब वे भी नहीं रहे। बहरहाल, ये समझना गलत है कि उत्तर प्रदेश में पारसी नहीं रहते।












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