बिना शादी किए दो बच्चों का पिता बना शख्स, रुला देगी 'सिंगल डैड' की ये कहानी
Father's Day: देश में सरकारी नौकरी का जो क्रेज है, वो किसी से भी नहीं छुपा। अकसर मां-बाप की यही चाह होती है कि उनकी बेटी की शादी किसी सरकारी मुलाजिम से हो। और इसी चाह के चलते एक शख्स की शादी नहीं हो सकी।
ये कहानी है प्रीतेश दवे की, जिनकी कभी सरकारी नौकरी नहीं लग पाई और इसलिए उनकी शादी भी नहीं हो सकी। भले ही प्रीतेश शादी के बंधन में नहीं बंध पाए लेकिन हमेशा से उनकी एक पिता बनने की चाहत बनी रही।

आखिरकार पिछले साल उनकी ये चाहत पूरी हुई और सरोगेसी के जरिये वे दो जुड़वा बच्चों के पिता बने। इन जुड़वा बच्चों में एक लड़का और एक लड़की है। जैसे एक महिला के अंदर मां बनने की चाह होती है, वैसे ही प्रीतेश भी बच्चों को गोद में खिलाना चाहते थे।
देश में लागू हुए सरोगेसी से नए नियमों की बदौलत प्रीतेश को पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। जब से प्रतीश दो बच्चों के बाप बने हैं, उनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं है। इस मामले को लेकर इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर पार्थ बाविशी ने कहा कि दवे उन पुरुषों में एक हैं, जिन्होने नए सेरोगेसी कानून लागू होने से पहले ही ये उपलब्धि हासिल की।
क्या कहते हैं नए नियम?
डॉक्टर पार्थ ने बताया कि नए नियमों के अनुसार, सिंगल पुरुषों, महिलाओं, लिव इन और सेम सेक्स कपल को सरोगेसी की अनुमति नहीं है। दवे खुद को काफी भाग्यशाली मानते हैं। वे कहते हैं कि मेरे जैसा अविवाहित शख्स सेरोगेसी के तहत बच्चों का पिता नहीं बन सकता था।
प्रतीश दवे के बच्चों के नाम धैर्य और दिव्या हैं। वे कहते हैं कि धैर्य और दिव्या के आने से उनकी जिंदगी में खुशियां आ गई हैं। जब मुझे शादी के लिए लड़की नहीं मिली, तो मैं काफी निराश हो गया था। मेरा कोई जीवनसाथी नहीं हो सकता लेकिन मेरे पास अब जिंदगी को जीने के लिए परिवार है। प्रीतेश ने दो बच्चों का होना अपने लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद बताया।
समाज के अन्य पुरुषों के लिए दवे ने कहा कि कई ऐसे पुरुष हैं, जिन्हें दुल्हन नहीं मिल पा रही। माता-पिता अपनी बेटियो्ं की शादी सरकारी नौकरी वाले युवाओं से करना पसंद करते हैं। दवे कहते हैं कि हमारे पास जमीन जायदाद सब है, लेकिन इन सब का कोई मतलब नहीं है।












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